Republic Day 2026: गणतंत्र दिवस के मद्देनजर राष्ट्रीय राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद कर दी गई है। दिल्ली पुलिस ने संभावित आतंकी खतरों से निपटने और आपातकालीन स्थिति में सुरक्षा एजेंसियों के ‘रिस्पॉन्स टाइम’ (प्रतिक्रिया समय) को परखने के लिए उत्तरी दिल्ली के अत्यंत संवेदनशील और भीड़भाड़ वाले इलाकों में आतंकवाद-रोधी ‘मॉक ड्रिल’ की एक व्यापक शृंखला का सफलतापूर्वक आयोजन किया।
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दिल्ली पुलिस ने चार बड़े स्थानों को चुना
बताते चले कि, जनवरी के प्रथम पखवाड़े में दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण चार बड़े स्थानों को चुना। इनमें ऐतिहासिक लाल किला, दिल्ली विश्वविद्यालय मेट्रो स्टेशन, आईएसबीटी कश्मीरी गेट और खारी बावली जैसे इलाके शामिल रहे। एक वरिष्ठ अधिकारी ने जानकारी दी कि इन अभ्यासों का मुख्य लक्ष्य केवल सुरक्षा बलों की मुस्तैदी जांचना ही नहीं, बल्कि विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच आपसी तालमेल (कोऑर्डिनेशन) को और अधिक मजबूत बनाना भी है। इसके साथ ही, आम जनता को किसी भी संदिग्ध गतिविधि के प्रति सतर्क रहने के लिए जागरूक करना भी इस अभियान का एक अहम हिस्सा रहा।
भीड़भाड़ वाले बाजारों और महत्वपूर्ण केंद्रों में सुरक्षा की संवेदनशीलता
आपको बता दे कि, उत्तरी दिल्ली का इलाका अपनी ऐतिहासिक महत्ता और व्यापारिक गतिविधियों के लिए जाना जाता है। यहां कई महत्वपूर्ण प्रतिष्ठान, ऐतिहासिक स्मारक और बड़े बाजार स्थित हैं, जहां प्रतिदिन लाखों की संख्या में लोगों का आवागमन होता है। भारी भीड़ के कारण ये क्षेत्र सुरक्षा की दृष्टि से बेहद चुनौतीपूर्ण और संवेदनशील श्रेणी में आते हैं। पुलिस के अनुसार, इन ‘मॉक ड्रिल’ के माध्यम से पुलिस बल यह सुनिश्चित करना चाहती है कि किसी भी विषम परिस्थिति में जान-माल की हानि को न्यूनतम किया जा सके और स्थिति पर तत्काल नियंत्रण पाया जा सके।
आतंकी हमलों के काल्पनिक परिदृश्यों का अभ्यास
इन अभ्यासों के दौरान बम विस्फोट और हथियारबंद आतंकी हमलों जैसे काल्पनिक परिदृश्य (सिमुलेशन) तैयार किए गए थे। इस व्यापक सुरक्षा अभियान में केवल दिल्ली पुलिस ही नहीं, बल्कि इसकी विशिष्ट शाखाएं जैसे विशेष प्रकोष्ठ (स्पेशल सेल), स्वाट (SWAT) और पीसीआर ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। इनके साथ ही दिल्ली अग्निशमन सेवा, श्वान दस्ता (डॉग स्क्वायड), बम निरोधक दस्ता (BDT) और जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA) की टीमों ने अपनी कार्यक्षमता का प्रदर्शन किया। सभी एजेंसियों ने मिलकर यह परखा कि हमला होने की स्थिति में सूचना के आदान-प्रदान से लेकर बचाव कार्य तक की प्रक्रिया कितनी सुगम है।
लाल किले से लेकर कश्मीरी गेट तक
अभ्यास की शुरुआत 3 जनवरी को लाल किले से हुई, जहां हाथी गेट के पास एक बम विस्फोट के परिदृश्य पर ड्रिल की गई। इसके बाद 7 जनवरी को दिल्ली विश्वविद्यालय मेट्रो स्टेशन के गेट नंबर चार पर आतंकी हमले की स्थिति में यात्रियों को सुरक्षित निकालने का अभ्यास किया गया। सबसे चुनौतीपूर्ण ड्रिल 10 जनवरी को आईएसबीटी कश्मीरी गेट पर देखने को मिली, जहाँ बस प्लेटफॉर्म के पास हथियारबंद आतंकवादियों द्वारा अंधाधुंध गोलीबारी और लोगों को बंधक बनाने जैसे दृश्य रचे गए। पुलिस और सुरक्षा बलों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इन ‘नकली’ आतंकियों को काबू में करने और बंधकों को छुड़ाने का सफल प्रदर्शन किया।
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