Delhi Police: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाले वायरल वीडियो के मामले में दिल्ली पुलिस ने बड़ा फैसला लिया है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि इस प्रकरण में नाबालिग लड़की के खिलाफ दर्ज एफआईआर पर अब आगे कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी। यह मामला पिछले महीने दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित छात्र प्रदर्शन के दौरान सामने आया था, जहां एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ था।
इस मामले में सबसे पहले नोएडा पुलिस ने जीरो एफआईआर दर्ज की थी, जिसे बाद में दिल्ली पुलिस को स्थानांतरित किया गया। अब सभी परिस्थितियों और उपलब्ध तथ्यों की समीक्षा के बाद पुलिस ने नाबालिग होने के आधार पर आगे कार्रवाई नहीं करने का निर्णय लिया है।
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माफी मांगते हुए कही भावुक बात
वीडियो वायरल होने के बाद संबंधित किशोरी ने सार्वजनिक रूप से एक वीडियो जारी कर अपनी गलती स्वीकार की थी। उसने कहा कि उसकी उम्र केवल 15 वर्ष है और प्रदर्शन के दौरान वह कुछ लोगों के प्रभाव में आकर ऐसी बातें बोल बैठी, जिनका उसे अब गहरा पछतावा है। अपने संदेश में उसने देशवासियों से क्षमा मांगते हुए कहा कि उसने जो शब्द कहे, वे गलत थे और वह इस व्यवहार के लिए बेहद शर्मिंदा है। उसने यह भी भरोसा दिलाया कि भविष्य में वह ऐसी गलती दोबारा नहीं करेगी।
प्रधानमंत्री मोदी ने दिखाई उदारता
इस पूरे घटनाक्रम के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रतिक्रिया भी चर्चा का विषय बनी। एक सोशल मीडिया संदेश में उन्होंने कहा कि ऐसे बच्चों को दंडित करने या लंबी कानूनी प्रक्रिया में उलझाने से समस्या का समाधान नहीं होगा। उन्होंने कहा कि यदि कोई बच्चा अपनी गलती स्वीकार कर पश्चाताप करता है, तो उसे सुधार का अवसर मिलना चाहिए। साथ ही समाज से भी अपील की कि ऐसे मामलों में संवेदनशीलता और सकारात्मक सोच अपनाई जाए।
मां ने जताया प्रधानमंत्री का आभार
लड़की की मां ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का धन्यवाद करते हुए कहा कि उनकी बेटी को माफ कर उन्होंने बड़ा दिल दिखाया है। उनका कहना था कि प्रधानमंत्री की उदारता से उनकी बेटी को अपनी गलती सुधारने का अवसर मिला है।
उन्होंने यह भी दावा किया कि एफआईआर में उनकी बेटी का नाम और उम्र सही तरीके से दर्ज नहीं की गई थी। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से इस मामले को पूरी तरह समाप्त करने की मांग भी की।
सोशल मीडिया को लेकर उठाई मांग
मामले के बाद लड़की की मां ने एक और महत्वपूर्ण सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों की सोशल मीडिया तक पहुंच सीमित की जानी चाहिए। उनका तर्क था कि कम उम्र के बच्चे आसानी से दूसरों के प्रभाव में आ जाते हैं और कई बार बिना पूरी समझ के ऐसे कदम उठा लेते हैं, जिनका बाद में उन्हें पछताना पड़ता है। उन्होंने अभिभावकों और समाज से भी बच्चों को सही दिशा देने की अपील की।
जंतर-मंतर आंदोलन से जुड़ा था मामला
यह पूरा विवाद दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित छात्र आंदोलन के दौरान सामने आया था। यह प्रदर्शन प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित पेपर लीक के विरोध में किया गया था, जिसमें बड़ी संख्या में छात्र शामिल हुए थे। आंदोलन का नेतृत्व कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने किया था। इस प्रदर्शन को सामाजिक कार्यकर्ता और नवप्रवर्तक सोनम वांगचुक का भी समर्थन मिला था। आंदोलन के दौरान कई बार प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तनाव की स्थिति भी बनी थी। बाद में संगठन ने दावा किया कि सरकार ने उनकी प्रमुख मांगों पर सकारात्मक रुख अपनाया है, जिसके बाद आंदोलन समाप्त करने की घोषणा कर दी गई।
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मामले का वर्तमान स्थिति
दिल्ली पुलिस के फैसले के बाद अब इस मामले में नाबालिग लड़की के खिलाफ आगे कोई कानूनी कार्रवाई नहीं होगी। इस पूरे घटनाक्रम ने सोशल मीडिया के प्रभाव, नाबालिगों की जिम्मेदारी और विरोध प्रदर्शनों में युवाओं की भागीदारी जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर नई बहस को जन्म दिया है।










