Delhi Air Pollution : दिल्ली में GRAP का सख्त पहरा, 24 घंटे में 714 वाहनों को बॉर्डर से लौटाया

दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण के बीच ट्रैफिक पुलिस ने सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। 1 नवंबर को महज 24 घंटे में 7,279 वाहनों की जांच हुई। इनमें 714 वाहन बॉर्डर से लौटा दिए गए, जबकि 38 जब्त हुए। आखिर किन वाहनों पर लगी है दिल्ली में एंट्री की रोक?

Delhi Air Pollution

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

नवम्बर 2, 2026

Delhi Air Pollution : राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण का स्तर लगातार चिंता बढ़ा रहा है। सर्दियों की शुरुआत के साथ हवा की गुणवत्ता बिगड़ने और प्रदूषण बढ़ने के बीच दिल्ली सरकार और ट्रैफिक पुलिस ने सख्ती तेज कर दी है। ग्रैडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के तहत राजधानी में प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों के प्रवेश पर रोक लगाने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने सीमावर्ती इलाकों से लेकर प्रमुख सड़कों तक वाहनों की जांच बढ़ा दी है। इस कार्रवाई का मकसद प्रदूषण नियंत्रण के नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों को राजधानी में प्रवेश करने से रोकना है।

24 घंटे में 7,279 वाहनों की हुई जांच

दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, 1 नवंबर को रात 12 बजे से शाम 8 बजे तक विशेष जांच अभियान चलाया गया। इस दौरान पुलिस टीमों ने कुल 7,279 वाहनों की जांच की। नियमों का उल्लंघन करने वाले 714 वाहनों को दिल्ली की सीमा से ही वापस लौटा दिया गया। वहीं, 38 वाहनों को जब्त किया गया और 10 वाहनों के चालान काटे गए। इन आंकड़ों से साफ है कि प्रदूषण नियंत्रण को लेकर राजधानी की सीमाओं पर निगरानी बढ़ा दी गई है। पुलिस की टीमें लगातार वाहनों के दस्तावेज और निर्धारित प्रदूषण मानकों की जांच कर रही हैं।

लोगों को जागरूक करने के लिए भी अभियान

कार्रवाई के साथ दिल्ली ट्रैफिक पुलिस आम लोगों को GRAP के नियमों की जानकारी देने पर भी जोर दे रही है। इसके लिए प्रिंट मीडिया, सोशल मीडिया और एफएम रेडियो के माध्यम से जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। दिल्ली के सभी प्रमुख प्रवेश द्वारों पर सूचना बोर्ड लगाए गए हैं। इसके अलावा वाहन चालकों को नियमों और पाबंदियों की जानकारी देने के लिए पर्चे भी बांटे जा रहे हैं। पुलिस का प्रयास है कि लोग पहले से नियमों को समझें और प्रतिबंधित या मानकों पर खरे नहीं उतरने वाले वाहन लेकर दिल्ली में प्रवेश करने से बचें।

NCR के अधिकारियों के साथ बनाई गई संयुक्त रणनीति

प्रदूषण नियंत्रण अभियान को प्रभावी बनाने के लिए दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने रविवार को पड़ोसी जिलों के पुलिस अधिकारियों के साथ समन्वय बैठक की। इससे पहले पर्यावरण मंत्री मंजिंदर सिंह सिरसा ने नोएडा, फरीदाबाद, गुरुग्राम, सोनीपत और बहादुरगढ़ के परिवहन तथा ट्रैफिक पुलिस अधिकारियों के साथ वर्चुअल बैठक की थी। इसमें सीमावर्ती इलाकों में वाहनों की आवाजाही सुचारू रखने, पुराने और मियाद पूरी कर चुके पेट्रोल-डीजल वाहनों पर कानूनी कार्रवाई करने तथा दिल्ली में प्रवेश की जरूरत नहीं रखने वाले व्यावसायिक ट्रकों को ईस्टर्न और वेस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे की ओर भेजने पर चर्चा हुई।

बसों और ट्रकों के लिए भी तय किए गए नियम

बैठक में दिल्ली-NCR में चलने वाली बसों को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्देशों पर जोर दिया गया। निर्धारित व्यवस्था के अनुसार, ऐसी बसें सीएनजी, इलेक्ट्रिक या BS-VI मानक वाले डीजल ईंधन से चलने वाली होनी चाहिए। इसका उद्देश्य सार्वजनिक परिवहन से होने वाले प्रदूषण को कम करना है। वहीं, दिल्ली में प्रवेश की आवश्यकता नहीं रखने वाले व्यावसायिक ट्रकों को शहर के भीतर आने के बजाय वैकल्पिक मार्गों पर डायवर्ट करने की रणनीति बनाई गई है। इससे राजधानी की सड़कों पर भारी वाहनों का दबाव और उनसे होने वाला प्रदूषण घटाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

रोजाना 10 हजार से ज्यादा चालान, धूल पर भी नजर

दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने बैठक में बताया कि यातायात और प्रदूषण संबंधी नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ रोजाना 10,000 से अधिक चालान जारी किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के निर्देशों का हवाला देते हुए पर्यावरण मंत्री ने कहा कि सर्दियों में वायु गुणवत्ता सुधारने के लिए दिल्ली और आसपास के एनसीआर जिलों को मिलकर काम करना होगा। इसके साथ ही सड़कों की मैकेनिकल स्वीपिंग, पानी का छिड़काव और निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण के उपाय तेज किए जा रहे हैं।

21 अक्टूबर से लागू है GRAP का पहला चरण

गौरतलब है कि दिल्ली-NCR में हवा की गुणवत्ता खराब होने के बाद वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने 21 अक्टूबर को ही पूरे एनसीआर में GRAP का पहला चरण लागू कर दिया था। अब दिल्ली में वाहनों की जांच, चालान और सीमाओं पर सख्ती के जरिए इन पाबंदियों को प्रभावी बनाने की कोशिश की जा रही है। आने वाले दिनों में प्रदूषण का स्तर किस दिशा में जाता है और इन संयुक्त प्रयासों का कितना असर पड़ता है, इस पर सभी की नजर रहेगी।

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