Uttarakhand News: हरक सिंह रावत और सोनिया आनंद पर जमीन कब्जाने का आरोप, क्या है पूरा मामला?

देहरादून में जमीन से जुड़े दो मामलों ने हलचल मचा दी है। कांग्रेस नेता हरक सिंह रावत और सोनिया आनंद पर भवन के सौदे को लेकर आरोप लगे हैं। वहीं, सरकारी जमीन निजी बताकर बुजुर्ग से करोड़ों रुपये लेने के मामले में पांच लोगों पर मुकदमा दर्ज हुआ है। पुलिस जांच जारी है।

हरक सिंह रावत और सोनिया आनंद पर जमीन कब्जाने का आरोप

Wrriten By :

Neha Mishra

Published On :

नवम्बर 1, 2026

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Uttarakhand News: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में जमीन से जुड़े दो अलग-अलग मामले सामने आए हैं। पहले मामले में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री हरक सिंह रावत तथा सोनिया आनंद पर एक भवन से संबंधित लेनदेन में धोखाधड़ी और जमीन कब्जाने का आरोप लगाया गया है। कंडोली निवासी हरिओम सहगल ने इस संबंध में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रमेंद्र सिंह डोबाल से शिकायत की है। शिकायत मिलने के बाद एसएसपी ने संबंधित अधिकारियों को मामले की गंभीरता से जांच करने के निर्देश दिए हैं। हालांकि, फिलहाल ये आरोप शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए हैं और पुलिस जांच के बाद ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।

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2021 में भवन बेचने का किया गया था दावा

हरिओम सहगल ने पुलिस को दी गई शिकायत में बताया कि उन्होंने 21 जून 2021 को हरक सिंह रावत और सोनिया आनंद को एक भवन बेचा था। शिकायतकर्ता के मुताबिक, इस सौदे के बदले दोनों की ओर से 35 लाख रुपये के दो चेक दिए गए थे। हालांकि, उनका आरोप है कि बाद में ये दोनों चेक वापस ले लिए गए। इसके बाद उन्हें 35 लाख रुपये का एक अन्य चेक दिया गया।

बैंक में चेक लगाने पर हुआ बाउंस

बैंक में चेक लगाने पर हुआ बाउंस
बैंक में चेक लगाने पर हुआ बाउंस

शिकायतकर्ता हरिओम सहगल का कहना है कि उन्होंने 20 अगस्त 2021 को संबंधित चेक बैंक में भुगतान के लिए लगाया था, लेकिन वह बाउंस हो गया। इसके बाद उन्होंने अपने अधिवक्ता के माध्यम से नोटिस भेजकर भुगतान की मांग की। हालांकि, शिकायत के अनुसार, गलत पता होने के कारण कानूनी नोटिस वापस लौट आया। इसके बाद भी भुगतान नहीं होने पर उन्होंने कानूनी कार्रवाई का रास्ता अपनाया।

सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा मामला

हरिओम सहगल के मुताबिक, वर्ष 2024 में उन्होंने इस विवाद को लेकर सर्वोच्च न्यायालय में वाद दायर किया था। बाद में यह मामला देहरादून न्यायालय में स्थानांतरित कर दिया गया। अब उन्होंने पुलिस से भी शिकायत की है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रमेंद्र सिंह डोबाल ने बताया कि शिकायत के आधार पर मामले की जांच की जा रही है। पुलिस अधिकारियों को पूरे प्रकरण की गंभीरता से पड़ताल करने के निर्देश दिए गए हैं।

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सरकारी जमीन को निजी बताकर बुजुर्ग से करोड़ों की ठगी का आरोप

देहरादून में जमीन से जुड़ा दूसरा मामला भी सामने आया है। इसमें सरकारी भूमि को निजी संपत्ति बताकर एक बुजुर्ग को बेचने और उनसे करोड़ों रुपये हड़पने का आरोप लगाया गया है। मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी से सेवानिवृत्त ओमप्रकाश ने इस मामले में पांच लोगों के खिलाफ पटेलनगर कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया है।

दाखिल-खारिज कराने पहुंचे तो सामने आई जमीन की सच्चाई

देवलोक कॉलोनी निवासी ओमप्रकाश के अनुसार, उन्होंने 18 दिसंबर 2025 को पित्थूवाला में अभय कुमार जैन से जमीन खरीदी थी। जमीन खरीदने के बाद जब वह दाखिल-खारिज की प्रक्रिया पूरी कराने पहुंचे, तब उन्हें पता चला कि संबंधित भूमि पहले ही राज्य सरकार में निहित की जा चुकी है। यानी जिस जमीन को निजी संपत्ति बताकर बेचा गया था, वह सरकारी भूमि थी।

रकम लौटाने का भरोसा

ओमप्रकाश का आरोप है कि संबंधित लोगों ने 16 मार्च 2026 को शपथपत्र देकर दो महीने के भीतर पूरी रकम लौटाने का आश्वासन दिया था। लेकिन तय समय बीतने के बाद भी उन्हें पैसे वापस नहीं मिले। इस मामले में पुलिस ने अभय कुमार जैन, राजीव जैन, प्रतीक जैन, आसिफ और फुरकान के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।

जमीन के मामलों की जांच में जुटी पुलिस

देहरादून में सामने आए इन दोनों मामलों ने जमीन की खरीद-फरोख्त और संपत्ति से जुड़े विवादों को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। एक मामले में भवन के भुगतान को लेकर शिकायत की गई है, जबकि दूसरे में सरकारी भूमि को निजी बताकर बेचने का आरोप है। दोनों मामलों में पुलिस की जांच के बाद ही आरोपों की सच्चाई और जिम्मेदार लोगों की भूमिका स्पष्ट हो सकेगी।

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