दशकों की खामोशी टूटी: बस्तर के जंगलों में फिर दर्ज हुई बाघ की मौजूदगी

जगदलपुर छत्तीसगढ़ के बस्तर में एक बार फिर जंगलों से उम्मीद की आहट सुनाई दे रही है। दशकों बाद बाघ की मौजूदगी के संकेत ने न सिर्फ वन विभाग बल्कि पूरे संभाग को चौकन्ना कर दिया है। कभी राष्ट्रीय पशु बाघ का मजबूत गढ़ रहा बस्तर, अब एक बार फिर उसी पहचान की ओर लौटता दिख रहा है। संभाग मुख्यालय जगदलपुर से सटे जंगलों में, भानपुरी और मारेगांव बायपास के आसपास बाघ के ताज़ा पगमार्क मिले हैं। खास बात यह है कि इन निशानों के साथ एक शावक का पगमार्क भी देखा गया है, जिससे यह संभावना मजबूत हो गई

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Published On :

जनवरी 5, 2026

जगदलपुर

छत्तीसगढ़ के बस्तर में एक बार फिर जंगलों से उम्मीद की आहट सुनाई दे रही है। दशकों बाद बाघ की मौजूदगी के संकेत ने न सिर्फ वन विभाग बल्कि पूरे संभाग को चौकन्ना कर दिया है। कभी राष्ट्रीय पशु बाघ का मजबूत गढ़ रहा बस्तर, अब एक बार फिर उसी पहचान की ओर लौटता दिख रहा है। संभाग मुख्यालय जगदलपुर से सटे जंगलों में, भानपुरी और मारेगांव बायपास के आसपास बाघ के ताज़ा पगमार्क मिले हैं। खास बात यह है कि इन निशानों के साथ एक शावक का पगमार्क भी देखा गया है, जिससे यह संभावना मजबूत हो गई है कि एक बाघिन अपने नन्हे शावक के साथ नए शिकार क्षेत्र की तलाश में आगे बढ़ रही है।

गौरतलब है कि बीते करीब तीन दशकों से कांगेर नेशनल पार्क क्षेत्र में बाघ की सक्रिय मौजूदगी दर्ज नहीं की गई थी। ऐसे में यह पहला मौका हो सकता है जब इस इलाके में बाघ की वापसी को लेकर ठोस संकेत सामने आए हैं।

हालांकि यह खबर जितनी उत्साहजनक है, उतनी ही संवेदनशील भी। बाघ की सुरक्षा को लेकर वन विभाग ने विशेष निगरानी टीमें गठित कर दी हैं, जो लगातार बाघ के मूवमेंट रूट पर नजर रखे हुए हैं ताकि उसे किसी तरह का खतरा न हो। क्योंकि यह भी सच्चाई है कि छत्तीसगढ़ में बीते पांच वर्षों में बाघ की खाल तस्करी के सबसे ज्यादा मामले कांकेर जिले से सामने आए हैं। ऐसे में बस्तर जैसे प्राकृतिक पर्यावास में बाघ की वापसी, सुरक्षा की बड़ी जिम्मेदारी भी साथ लेकर आई है।

वहीं बस्तर के सीसीएफ आलोक तिवारी के अनुसार, इंद्रावती टाइगर रिजर्व क्षेत्र में फिलहाल छह बाघों की मौजूदगी बताई जा रही है। अब देखना होगा कि क्या बस्तर के जंगल एक बार फिर बाघों का सुरक्षित घर बन पाएंगे, या यह वापसी सिर्फ एक अस्थायी दस्तक बनकर रह जाएगी।

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