Datia Bypoll Twist: मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा उपचुनाव के नतीजों से ठीक पहले प्रदेश की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। कांग्रेस पार्टी ने अपने पूर्व विधायक राजेंद्र भारती को प्राथमिक सदस्यता से निलंबित कर दिया है। पार्टी की ओर से जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, यह कार्रवाई रविवार देर रात की गई। उपचुनाव के परिणाम घोषित होने से कुछ घंटे पहले लिया गया यह निर्णय राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। माना जा रहा है कि इस फैसले का असर चुनावी माहौल और आगामी राजनीतिक समीकरणों पर भी पड़ सकता है।
दतिया सीट पर आज आएगा उपचुनाव का फैसला
दतिया विधानसभा सीट को मध्य प्रदेश की महत्वपूर्ण सीटों में गिना जाता है। इसी सीट पर हुए उपचुनाव की मतगणना आज हो रही है। इस चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया है, जबकि कांग्रेस ने घनश्याम सिंह पर भरोसा जताया है। दोनों प्रमुख दलों के बीच सीधा मुकाबला माना जा रहा है। हालांकि चुनाव मैदान में कुल 20 प्रत्याशी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं, लेकिन मुख्य लड़ाई भाजपा और कांग्रेस के बीच ही देखी जा रही है।
निलंबन पर राजेंद्र भारती की तीखी प्रतिक्रिया
पार्टी से निलंबित किए जाने के बाद राजेंद्र भारती ने कांग्रेस नेतृत्व पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इस फैसले से उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता और वे इसे राजनीतिक साजिश मानते हैं। भारती ने आरोप लगाया कि भाजपा के वरिष्ठ नेता नरोत्तम मिश्रा और कांग्रेस उम्मीदवार घनश्याम सिंह की मिलीभगत के कारण उनके खिलाफ यह कार्रवाई की गई है। उन्होंने दावा किया कि भविष्य में वह अपनी राजनीतिक ताकत का प्रदर्शन करेंगे और 2028 के विधानसभा चुनाव में मजबूती से वापसी करेंगे।
सजा के बाद खाली हुई थी दतिया सीट
दतिया विधानसभा सीट पर उपचुनाव इसलिए कराना पड़ा क्योंकि पूर्व विधायक राजेंद्र भारती की विधानसभा सदस्यता समाप्त हो गई थी। वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने भाजपा के वरिष्ठ नेता नरोत्तम मिश्रा को 7,700 से अधिक मतों से हराकर बड़ी जीत दर्ज की थी। लेकिन अप्रैल 2026 में दिल्ली की एक अदालत ने धोखाधड़ी से जुड़े मामले में उन्हें तीन वर्ष की सजा सुनाई। अदालत के फैसले के बाद उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त कर दी गई, जिसके चलते यह सीट रिक्त हो गई और उपचुनाव की नौबत आई।
भाजपा और कांग्रेस के बीच प्रतिष्ठा की लड़ाई
इस उपचुनाव को दोनों प्रमुख दलों के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न माना जा रहा है। कांग्रेस की ओर से घनश्याम सिंह और भाजपा की ओर से आशुतोष तिवारी मैदान में हैं। दोनों दलों ने जीत के लिए पूरी ताकत झोंकी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह चुनाव केवल एक विधानसभा सीट का नहीं, बल्कि आगामी चुनावों से पहले जनता के मूड का संकेत भी माना जाएगा।
नरोत्तम मिश्रा को लेकर भी रहा राजनीतिक विवाद
उपचुनाव के दौरान भाजपा के वरिष्ठ नेता नरोत्तम मिश्रा का नाम भी लगातार चर्चा में रहा। टिकट वितरण के समय उनके समर्थकों और पुलिस के बीच कथित झड़प की घटनाएं सामने आई थीं। हालांकि बाद में नरोत्तम मिश्रा ने सार्वजनिक रूप से भाजपा उम्मीदवार आशुतोष तिवारी का समर्थन करते हुए पार्टी के लिए पूरी ताकत से चुनाव प्रचार करने की बात कही। इसके बाद भाजपा ने चुनाव अभियान को और तेज किया।
2028 विधानसभा चुनाव से पहले अहम संकेत
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि दतिया उपचुनाव का परिणाम प्रदेश सरकार की स्थिरता पर सीधे तौर पर असर नहीं डालेगा, लेकिन इसके राजनीतिक संदेश काफी महत्वपूर्ण होंगे। हाल के छात्र आंदोलनों और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे जैसे घटनाक्रमों के बाद यह चुनाव भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए जनसमर्थन की परीक्षा माना जा रहा है। ऐसे में इस उपचुनाव के नतीजे 2028 के मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव की रणनीति तय करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
परिणाम पर टिकी प्रदेश की राजनीतिक नजरें
दतिया उपचुनाव के नतीजों का इंतजार सिर्फ राजनीतिक दल ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश की जनता भी कर रही है। कांग्रेस द्वारा पूर्व विधायक राजेंद्र भारती को निलंबित किए जाने और उनके आरोपों के बाद चुनावी मुकाबला और भी दिलचस्प हो गया है। अब यह देखना अहम होगा कि मतदाता किस उम्मीदवार पर भरोसा जताते हैं और इस चुनाव का संदेश मध्य प्रदेश की भविष्य की राजनीति को किस दिशा में ले जाता है।
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