Cough Syrup Rules: अब मेडिकल स्टोर पर बिना इसके नहीं मिलेगी खांसी-बुखार की सिरप, सरकार का बड़ा फरमान

देशभर में दवाओं की बिक्री को लेकर केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। स्वास्थ्य मंत्रालय की नई अधिसूचना के अनुसार, अब खांसी, सर्दी या बुखार की कोई भी सिरप बिना डॉक्टर के वैध प्रिस्क्रिप्शन के नहीं मिलेगी। औषधि नियम 1945 की अनुसूची 'K' में संशोधन कर सिरप को ओटीसी (OTC) श्रेणी से बाहर कर दिया गया है।

Cough Syrup Rules

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

जून 16, 2026

Cough Syrup Rules: देश भर में मेडिकल स्टोर्स से दवाओं की खरीद-बिक्री को लेकर केंद्र सरकार ने एक बेहद बड़ा और कड़ा कदम उठाया है। अब देश के किसी भी कोने में खांसी, सर्दी, जुकाम, बुखार या अन्य किसी भी बीमारी से जुड़ी सिरप (तरल दवाएं) बिना डॉक्टर के वैध पर्ची (प्रिस्क्रिप्शन) के नहीं खरीदी जा सकेंगी। केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने इस संदर्भ में एक आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है। 9 जून को जारी इस सरकारी आदेश के बाद अब किसी भी प्रकार के सिरप को सीधे काउंटर से खरीदना पूरी तरह प्रतिबंधित हो गया है।

ओटीसी श्रेणी से हटीं तरल दवाएं

बताते चले कि, सरकार द्वारा जारी इस नई अधिसूचना के अनुसार, दशकों पुराने औषधि नियम 1945 (Drugs Rules 1945) में एक बड़ा संशोधन किया गया है। इस बदलाव के तहत नियमों की अनुसूची ‘K’ (Schedule K) से ‘सिरप’ शब्द को हमेशा के लिए हटा दिया गया है। आपको बता दें कि इस अनुसूची से हटने का सीधा मतलब यह है कि जो सिरप पहले ‘ओवर-द-काउंटर’ यानी बिना डॉक्टर की सलाह के सीधे मेडिकल स्टोर से खरीदे जा सकते थे, वे अब इस छूट के दायरे से बाहर हो गए हैं। अब इन्हें सामान्य दवाओं की तरह बिना पर्ची बेचना गैर-कानूनी होगा।

केमिस्टों और मरीजों के लिए कड़े निर्देश

नए नियमों के लागू होने के बाद, अब यदि किसी मरीज को किसी भी प्रकार की सिरप की आवश्यकता है, तो उसे रजिस्टर्ड डॉक्टर द्वारा हस्ताक्षरित वैध पर्चा दिखाना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही, देशभर के सभी दवा विक्रेताओं (Chemists & Druggists) को भी सख्त चेतावनी दी गई है कि वे बिना पर्ची के किसी भी ग्राहक को सिरप की बोतल न दें। स्वास्थ्य विभाग ने साफ किया है कि यदि कोई भी मेडिकल स्टोर संचालक इन नए दिशा-निर्देशों की अवहेलना करता पाया गया, तो उसका लाइसेंस रद्द करने समेत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

सेल्फ-मेडिकेशन और दवाओं के दुरुपयोग पर लगाम

इस ऐतिहासिक फैसले के पीछे मुख्य उद्देश्य मरीजों की सुरक्षा (Patient Safety) को सुदृढ़ करना है। चिकित्सा विशेषज्ञों का लंबे समय से मानना रहा है कि भारत में लोग मामूली सर्दी-खांसी होने पर खुद ही डॉक्टर बन जाते हैं (Self-Medication)। इस तरह अनियंत्रित और बिना सोचे-समझे सिरप पीने से शरीर पर इसके गंभीर और जानलेवा दुष्प्रभाव (Side Effects) देखने को मिलते हैं। सरकार का यह कदम दवाओं के इस अंधाधुंध और अनियंत्रित उपयोग को रोकने के लिए एक बड़ा सुरक्षा कवच साबित होगा।

घटिया दवाओं के निर्माण और बिक्री पर कसेगा शिकंजा

यह कड़ा फैसला एक ऐसे समय में आया है जब हाल ही में मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों से बेहद परेशान करने वाली खबरें आई थीं। वहां दूषित कफ सिरप (Contaminated Cough Syrups) के सेवन के कारण कई मासूम बच्चों की असमय मौत हो गई थी। इन दर्दनाक घटनाओं ने देश के भीतर दवाओं की गुणवत्ता, निर्माण मानकों और उनकी ढीली निगरानी प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे। इसके बाद से ही फार्मास्यूटिकल इंडस्ट्री और सिरप की बिक्री पर कड़े नियंत्रण की मांग लगातार तेज हो रही थी, जिसे सरकार ने अब लागू कर दिया है।

लंबी प्रक्रिया के बाद अंतिम अधिसूचना

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के संयुक्त सचिव हर्ष मंगला द्वारा हस्ताक्षरित इस अधिसूचना को अचानक नहीं थोपा गया है। इस नीतिगत संशोधन का मसौदा (Draft) सबसे पहले 30 दिसंबर 2025 को जारी किया गया था। सरकार ने इस पर आम जनता, डॉक्टरों और दवा उद्योग से आपत्तियां और रचनात्मक सुझाव मांगे थे। प्राप्त हुए सभी फीडबैक और सुझावों पर गहन विचार-विमर्श करने के बाद ही अब इस अंतिम संशोधन को देश भर में पूरी तरह लागू किया गया है।