West Bengal Election 2026 : कांग्रेस की बड़ी चाल, 284 उम्मीदवारों की सूची जारी; अधीर रंजन खुद संभालेंगे मोर्चा

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के लिए कांग्रेस ने 284 उम्मीदवारों के नामों का ऐलान कर दिया है। प्रदेश अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी इस बार खुद चुनावी कमान संभालते हुए विरोधियों को कड़ी चुनौती देने के मूड में हैं। क्या कांग्रेस का यह दांव बंगाल की सत्ता का समीकरण बदल देगा?

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

मार्च 29, 2026

West Bengal Election 2026 : पश्चिम बंगाल की राजनीति में चुनावी पारा अपने चरम पर पहुँच गया है। राज्य की सभी 294 विधानसभा सीटों पर अपनी किस्मत आजमाने का फैसला करते हुए कांग्रेस ने रविवार को 284 उम्मीदवारों के नामों का आधिकारिक ऐलान कर दिया है। शनिवार को दिल्ली में हुई कांग्रेस की केंद्रीय चुनाव कमेटी (CEC) की महत्वपूर्ण बैठक के बाद यह बड़ा कदम उठाया गया है। पार्टी ने इस बार अनुभवी दिग्गजों और नए चेहरों के मिश्रण पर दांव लगाया है, ताकि राज्य में अपनी खोई हुई राजनीतिक जमीन को वापस पाया जा सके।

अधीर रंजन चौधरी और मौसम नूर: दिग्गजों पर भरोसा

कांग्रेस ने अपनी इस सूची में अपने सबसे कद्दावर नेताओं को चुनावी मैदान में उतारा है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और वरिष्ठ नेता अधीर रंजन चौधरी अपने गढ़ बहरामपुर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ेंगे। अधीर रंजन की उम्मीदवारी ने इस सीट पर मुकाबले को बेहद दिलचस्प बना दिया है। वहीं, मालदा क्षेत्र की प्रभावशाली नेता मौसम नूर को मालतीपुर से उम्मीदवार बनाया गया है। इन दोनों नेताओं की साख दांव पर है, क्योंकि कांग्रेस को उम्मीद है कि इनके नेतृत्व में पार्टी मालदा और मुर्शिदाबाद जैसे अपने पुराने प्रभाव वाले क्षेत्रों में बेहतर प्रदर्शन कर सकेगी।

भवानीपुर में हाई-प्रोफाइल मुकाबला: ममता बनाम सुवेंदु बनाम प्रदीप

राज्य की सबसे चर्चित सीट भवानीपुर पर कांग्रेस ने प्रदीप प्रसाद को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ मैदान में उतारा है। भवानीपुर की जंग इस बार त्रिकोणीय से कहीं अधिक चतुष्कोणीय नजर आ रही है। जहाँ एक तरफ तृणमूल कांग्रेस (TMC) की ओर से खुद ममता बनर्जी मैदान में हैं, वहीं भाजपा ने उनके धुर विरोधी और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी को उतारकर मुकाबले को कांटे का बना दिया है। इसके अलावा, माकपा (CPIM) ने श्रीजीब विश्वास पर भरोसा जताया है। प्रदीप प्रसाद की उम्मीदवारी के साथ कांग्रेस ने स्पष्ट कर दिया है कि वह किसी भी मोर्चे पर पीछे हटने को तैयार नहीं है।

शनिवार की बैठक और रविवार का बड़ा धमाका

उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया काफी गहन रही। शनिवार को हुई केंद्रीय चुनाव कमेटी की बैठक में कांग्रेस आलाकमान ने बंगाल की जमीनी हकीकत पर चर्चा की। इस बैठक में यह रणनीतिक फैसला लिया गया कि पार्टी किसी भी गठबंधन के बजाय अकेले दम पर सभी 294 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। इसी कड़ी में रविवार को 284 नामों की घोषणा कर दी गई, जबकि शेष 10 सीटों पर नामों का चयन अंतिम चरण में है। पार्टी कार्यकर्ताओं में इस सूची के आने के बाद नया उत्साह देखा जा रहा है।

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शून्य से शिखर तक का सफर: कांग्रेस के लिए बड़ी चुनौती

वर्तमान में पश्चिम बंगाल विधानसभा में कांग्रेस की स्थिति काफी चुनौतीपूर्ण है। 294 सीटों वाली विधानसभा में फिलहाल कांग्रेस का एक भी विधायक नहीं है। पिछला चुनाव भी कांग्रेस और टीएमसी ने अलग-अलग लड़ा था, जिसका परिणाम यह हुआ कि ममता बनर्जी भारी बहुमत के साथ तीसरी बार सत्ता में आईं और भाजपा मुख्य विपक्षी दल के रूप में उभरी। कांग्रेस इस बार ‘शून्य’ के आंकड़े को पार कर एक प्रभावी ताकत बनने की कोशिश में है। पार्टी का लक्ष्य उन मतदाताओं को वापस जोड़ना है जो पिछले चुनावों में टीएमसी या भाजपा की ओर शिफ्ट हो गए थे।

बंगाल का राजनीतिक परिदृश्य और त्रिकोणीय संघर्ष

पश्चिम बंगाल में इस बार चुनावी मुकाबला काफी जटिल होने वाला है। एक ओर टीएमसी अपनी सत्ता बचाने की कोशिश कर रही है, तो दूसरी ओर भाजपा खुद को अगले विकल्प के रूप में पेश कर रही है। ऐसे में कांग्रेस और वामदलों का अलग-अलग या मिलकर चुनाव लड़ना वोटों के ध्रुवीकरण को प्रभावित कर सकता है। कांग्रेस ने 284 सीटों पर उम्मीदवार उतारकर यह संदेश दिया है कि वह बंगाल की राजनीति में अपनी स्वतंत्र पहचान और विचारधारा के साथ डटी हुई है। अब देखना यह होगा कि बंगाल की जनता कांग्रेस के इन उम्मीदवारों को कितना समर्थन देती है।

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