Congress Merger : ममता-पवार के कांग्रेस में विलय की चर्चा तेज, नाना पटोले और राउत के बयान से सियासत गरमाई

क्या देश में फिर से 'अखंड कांग्रेस' बनने जा रही है? पश्चिम बंगाल में मचे राजनीतिक संकट और सोनिया गांधी से मुलाकातों के बीच ममता बनर्जी की टीएमसी और शरद पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस के विलय की अटकलें तेज हैं; जानिए नाना पटोले और संजय राउत के बयानों ने दिल्ली से महाराष्ट्र तक कौन सा नया सस्पेंस खड़ा कर दिया है?

Congress Merger

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जून 12, 2026

Congress Merger : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में अप्रत्याशित और करारी शिकस्त का सामना करने के बाद ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (TMC) इस समय अपने सबसे बड़े राजनीतिक संकट से गुजर रही है। राजनैतिक गलियारों में चर्चा है कि पार्टी के लगभग दो-तिहाई विधायक और सांसद बगावत की राह पर हैं और एक अलग गुट बनाने की पुरजोर कोशिशों में जुटे हैं। टीएमसी के भीतर मची इस आंतरिक भगदड़ और असंतोष के बीच पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के सामने अपनी पार्टी के अस्तित्व को बचाए रखने की एक अत्यंत कठिन चुनौती खड़ी हो गई है।

इसी राजनीतिक उथल-पुथल के बीच देश की राजधानी नई दिल्ली में आयोजित हुई विपक्षी दलों के ‘इंडिया’ (INDIA) ब्लॉक की बैठक के बाद एक नई चर्चा ने जोर पकड़ लिया है। माना जा रहा है कि टीएमसी का अस्तित्व बचाने के लिए उसका कांग्रेस में विलय हो सकता है। इस चर्चा को हवा तब और मिली जब इंडिया गठबंधन की बैठक समाप्त होने के बाद भी ममता बनर्जी के भतीजे और टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी कई दिनों तक दिल्ली में ही डेरा डाले रहे।

महाराष्ट्र की सियासत में भी विलय के कयास

टीएमसी और कांग्रेस के संभावित एकीकरण की खबरों के बीच अब यह सियासी चिंगारी महाराष्ट्र तक भी पहुंच गई है। महाराष्ट्र की राजनीति में भी कांग्रेस से अलग हुए क्षेत्रीय विपक्षी दलों के मुख्य पार्टी में वापस विलय की अटकलें बेहद तेज हो गई हैं। इस महाविलय की थ्योरी को तब और मजबूती मिली जब राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत ने भी एक बड़ा बयान दिया। गहलोत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पूर्व में वैचारिक मतभेदों के कारण कांग्रेस से अलग होकर जितने भी क्षेत्रीय दलों का गठन हुआ था, उन सभी को देश के मौजूदा राजनीतिक हालात को देखते हुए अब एक बार फिर मुख्य कांग्रेस पार्टी के झंडे के नीचे वापस आ जाना चाहिए।

नाना पटोले ने किया वैचारिक एकजुटता का आह्वान

महाराष्ट्र कांग्रेस के कद्दावर नेता नाना पटोले ने इस पूरे घटनाक्रम पर बेहद आक्रामक और मुखर रुख अपनाया है। देश की वर्तमान राजनीतिक और संवैधानिक स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए पटोले ने कहा कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद पवार और टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी अब कांग्रेस के साथ आने और अपनी पार्टियों का विलय करने की मानसिक स्थिति बना रहे हैं।

उन्होंने कहा कि देश के लोकतंत्र और संविधान को बचाने के लिए समान विचारधारा वाले धर्मनिरपेक्ष (सेक्युलर) दलों का एक मंच पर आना आज समय की सबसे बड़ी मांग है। उन्होंने आगे स्पष्ट किया कि यह प्रक्रिया राष्ट्रीय स्तर पर स्वतः स्फूर्त तरीके से शुरू हुई है ताकि आगामी चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के खिलाफ वोटों के होने वाले बड़े बिखराव या विभाजन को हर हाल में रोका जा सके।

कांग्रेस की ओर से कोई आधिकारिक प्रस्ताव नहीं

जब मीडिया कर्मियों ने नाना पटोले से यह तीखा सवाल पूछा कि क्या कांग्रेस पार्टी ने खुद इन क्षेत्रीय क्षत्रपों को विलय का कोई औपचारिक कूटनीतिक प्रस्ताव भेजा है, और क्या ऐसा ही कोई ऑफर शिवसेना के उद्धव ठाकरे गुट (UBT) को भी दिया गया है? तो पटोले ने इन कयासों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने साफ किया कि कांग्रेस की तरफ से किसी भी दल को ऐसा कोई आधिकारिक प्रस्ताव या ऑफर नहीं दिया गया है। यह केवल परिस्थितियों की मांग है जिसे देखते हुए खुद पवार साहब और सुप्रिया सुले ने पूर्व में कई मंचों पर इसका उल्लेख किया है। उन्होंने दोहराया कि यह राज्य स्तर के दलों की अपनी आंतरिक सोच और भूमिका है कि देशहित के लिए उन्हें अब कांग्रेस के मजबूत नेतृत्व के साथ खड़े रहना चाहिए।

संजय राउत का बड़ा सुझाव

दूसरी तरफ, शिवसेना (यूबीटी) के फायरब्रांड नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने इस संभावित ‘महाविलय’ को व्यावहारिक रूप देने के लिए एक बड़ा सुझाव दिया है। राउत ने इसके लिए एनसीपी (एसपी) के मुखिया शरद पवार के नाम को आगे बढ़ाया है। उनका मानना है कि शरद पवार देश के सबसे वरिष्ठ राजनेताओं में से एक हैं और उनके सभी दलों के साथ मधुर संबंध हैं, इसलिए उन्हें कांग्रेस से अलग होकर अस्तित्व में आईं तमाम छोटी पार्टियों को वापस मुख्य कांग्रेस में समाहित करने के अभियान की कमान संभालनी चाहिए और इसमें अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए।

राउत ने जोर देकर कहा कि जो नेता कभी कांग्रेस सरकारों का हिस्सा रहे हैं और आज भी उसी धर्मनिरपेक्ष विचारधारा का समर्थन करते हैं, यदि वे सभी एकजुट हो जाते हैं तो यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के विजय रथ के लिए सबसे बड़ी चुनौती साबित होगी। हालांकि, राउत के इस बयान पर प्रतिद्वंद्वी शिवसेना (शिंदे गुट) के मंत्री संजय शिरसाट ने तीखा पलटवार करते हुए कहा कि संजय राउत यह तय करने वाले कोई नहीं होते कि किसे कांग्रेस में जाना चाहिए और किसे नहीं, वे केवल अपनी पार्टी को बचाने पर ध्यान दें।

सुप्रिया सुले का दिलचस्प अंदाज

कांग्रेस, टीएमसी और एनसीपी के इस त्रिकोणीय विलय की खबरों के बीच शरद पवार की बेटी और लोकसभा सांसद सुप्रिया सुले ने भी अपनी पहली प्रतिक्रिया दी है। सोनिया गांधी और ममता बनर्जी की बंद कमरे में हुई कथित मुलाकात और विलय के प्रस्ताव पर बात करते हुए सुप्रिया सुले ने कहा कि वह उस बैठक का हिस्सा नहीं थीं और न ही इस संबंध में कांग्रेस या टीएमसी नेतृत्व ने उनसे कोई बात साझा की है। हालांकि, उन्होंने अपने भाई समान सहयोगी संजय राउत के सुझावों का सम्मान करते हुए कहा कि लोकतंत्र में हर किसी को अपनी राय रखने का अधिकार है।

जब पत्रकारों ने उनसे सीधे शब्दों में पूछा कि यदि भविष्य में कांग्रेस की ओर से उनकी पार्टी एनसीपी (एसपी) को आधिकारिक रूप से विलय का प्रस्ताव मिलता है तो उनका अंतिम स्टैंड क्या होगा? इस पर सुप्रिया ने अपने चिरपरिचित और हल्के-फुल्के अंदाज में मुस्कुराते हुए जवाब दिया, “अभी से क्या सोचना, पहले बारिश तो होने दो, उसके बाद तय करेंगे कि धूप से बचने के लिए छतरी लेनी है या पानी से बचने के लिए रेनकोट पहनना है।” उनके इस बयान ने राजनीतिक पंडितों को इस महाविलय के भविष्य को लेकर और अधिक सोचने पर मजबूर कर दिया है।

Read More  :  चोट से वापसी के बाद रोहित शर्मा की असली परीक्षा, अफगानिस्तान सीरीज अहम