DGCA Safety Audit : क्या असुरक्षित हैं भारतीय विमान? 50% फ्लाइट्स में मिलीं बार-बार होने वाली खराबियां

भारत के आसमान में बड़ा खतरा! संसदीय समिति की ताजा ऑडिट रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि देश के 754 विमानों में से 377 में बार-बार तकनीकी खराबियां आ रही हैं। एयर इंडिया के 82% विमानों में खामियां मिलने से हड़कंप मच गया है। क्या मुनाफे के चक्कर में यात्रियों की जान दांव पर लगी है?

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

मार्च 27, 2026

DGCA Safety Audit :  भारतीय विमानन क्षेत्र (Aviation Sector) की सुरक्षा को लेकर एक संसदीय समिति ने बेहद चौंकाने वाली और चिंताजनक रिपोर्ट पेश की है। इस रिपोर्ट के अनुसार, देश में संचालित होने वाली लगभग 50 प्रतिशत कमर्शियल फ्लाइट्स तकनीकी रूप से पूरी तरह फिट नहीं हैं। पिछले वर्ष किए गए एक विस्तृत ऑडिट के दौरान पैनल ने पाया कि कुल 754 कमर्शियल विमानों की जाँच की गई थी, जिनमें से 377 विमानों में बार-बार तकनीकी खराबी (Technical Snags) की समस्या सामने आई। यह आँकड़ा न केवल विमानन कंपनियों के रखरखाव पर सवाल उठाता है, बल्कि आसमान में सफर करने वाले लाखों यात्रियों की सुरक्षा पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है।

इंडिगो और एअर इंडिया की उड़ानों में सबसे ज्यादा खामियां

रिपोर्ट के आँकड़ों ने देश की दिग्गज एअरलाइंस की पोल खोल दी है। तकनीकी खराबी वाले विमानों की सूची में इंडिगो (IndiGo) सबसे ऊपर है। 3 फरवरी तक किए गए ऑडिट में इंडिगो की 405 फ्लाइट्स की जाँच हुई, जिनमें से 148 विमानों में तकनीकी कमियाँ पाई गईं। वहीं, टाटा समूह की एअर इंडिया (Air India) की स्थिति और भी गंभीर नजर आ रही है। एअर इंडिया की 166 उड़ानों का ऑडिट किया गया, जिनमें से 137 विमानों में बार-बार खराबी की समस्या दर्ज की गई। इसी तरह, एअर इंडिया एक्सप्रेस की 101 उड़ानों में से 54 में तकनीकी खामियां मिलीं, जो यह दर्शाती हैं कि प्रीमियम और बजट दोनों श्रेणियों की उड़ानों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी की जा रही है।

DGCA के ऑडिट में पायलट ट्रेनिंग और केबिन क्रू पर सवाल

रिपोर्ट में पिछले साल 12 जून को हुए अहमदाबाद एअर इंडिया हादसे का विशेष उल्लेख किया गया है। इस घटना के बाद डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) ने 1 से 4 जुलाई 2025 के बीच विशेष ऑडिट किया था। समिति ने अपनी रिपोर्ट में बोइंग 787 और 777 जैसे बड़े विमानों को उड़ाने वाले पायलटों की ट्रेनिंग में बार-बार होने वाली चूक पर गहरी चिंता जताई है। इसके अलावा, ऑडिट में यह भी पाया गया कि कम से कम चार अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में नियमों के मुताबिक पर्याप्त केबिन क्रू मौजूद नहीं था। मैनपावर की कमी और पायलटों की अपर्याप्त ट्रेनिंग किसी भी बड़े हवाई हादसे का कारण बन सकती है।

नियमों का उल्लंघन और ड्यूटी टाइम की सीमा पर चिंता

संसदीय पैनल ने ‘फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन’ (FDTL) के उल्लंघन को लेकर एअरलाइंस को आड़े हाथों लिया है। रिपोर्ट के अनुसार, एअरलाइंस अक्सर पायलटों और क्रू मेंबर्स से तय सीमा से अधिक काम करवाती हैं, जिससे थकान के कारण मानवीय चूक की संभावना बढ़ जाती है। पैनल ने नियामक कार्रवाइयों का विवरण देते हुए बताया कि सुरक्षा नियमों की अनदेखी के लिए एअर इंडिया को डीजीसीए की ओर से नौ कारण बताओ नोटिस भेजे गए हैं। विमानन क्षेत्र में अनुशासन की कमी इस कदर बढ़ गई है कि कई विमानों को एक्सपायर्ड इमरजेंसी इक्विपमेंट (आपातकालीन उपकरण) के साथ ही उड़ान भरने की अनुमति दे दी गई, जो नियमों का खुला उल्लंघन है।

एअरलाइंस को मिले नोटिस और भविष्य के कड़े कदम

वर्ष 2025 के अंत तक विभिन्न एअरलाइंस को कुल 19 कारण बताओ नोटिस भेजे गए थे। इन नोटिसों में न केवल तकनीकी खराबियाँ और सुरक्षा चूक शामिल थीं, बल्कि कॉकपिट में अनऑथराइज्ड एंट्री (अनधिकृत प्रवेश) जैसे सुरक्षा से जुड़े गंभीर मुद्दे भी थे। संसदीय समिति ने सख्त लहजे में कहा है कि एअरलाइंस को मुनाफे से पहले यात्रियों की जान की कीमत समझनी होगी। रिपोर्ट में सिफारिश की गई है कि डीजीसीए को अपने निगरानी तंत्र को और अधिक मजबूत करना चाहिए और नियमों का उल्लंघन करने वाली कंपनियों पर भारी जुर्माना लगाने के साथ-साथ उनके लाइसेंस रद्द करने जैसी कार्रवाई पर भी विचार करना चाहिए।

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