Coimbatore Blast Case: टेरर फंडिंग पर ED का बड़ा एक्शन, 16 ठिकानों पर छापेमारी

कोयंबटूर ब्लास्ट केस में टेरर फंडिंग की जांच को लेकर ED ने बड़ा कदम उठाया है। एजेंसी ने चार शहरों में 16 ठिकानों पर छापेमारी कर कथित मनी ट्रेल खंगाली। अब जांच एजेंसियों की नजर उन नेटवर्क और आर्थिक रास्तों पर है, जिनसे संदिग्ध गतिविधियों को फंड मिलने का आरोप है।

Coimbatore Blast Case

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जुलाई 30, 2026

Coimbatore Blast Case:  प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने वर्ष 2022 के कोयंबटूर बम धमाके से जुड़े कथित टेरर फंडिंग मामले में गुरुवार को व्यापक छापेमारी अभियान चलाया। चेन्नई स्थित ईडी की क्षेत्रीय इकाई ने चेन्नई, कोयंबटूर, हैदराबाद और मुंबई सहित चार शहरों में कुल 16 स्थानों पर एक साथ तलाशी ली। यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत की जा रही जांच का हिस्सा है। ईडी ने यह मामला राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) द्वारा दर्ज प्राथमिकी के आधार पर दर्ज किया था और अब कथित वित्तीय नेटवर्क की गहन जांच कर रही है।

2022 के धमाके की पृष्ठभूमि

जांच एजेंसियों के अनुसार, वर्ष 2022 में तमिलनाडु के कोयंबटूर स्थित संगमेश्वरर मंदिर के पास एक कार में विस्फोट हुआ था। इस मामले में जेमशा मुबीन का नाम सामने आया था, जिसे जांच एजेंसियों ने मुख्य आरोपी बताया था। एजेंसियों का आरोप है कि यह हमला कथित रूप से ISIS की विचारधारा से प्रेरित था और इसके लिए विस्फोटकों से संशोधित की गई एक मारुति कार का इस्तेमाल किया गया था। मामले की जांच एनआईए और अन्य एजेंसियों द्वारा लगातार आगे बढ़ाई जा रही है।

टेरर फंडिंग के स्रोतों की जांच पर फोकस

ईडी अब इस मामले में कथित आतंकी गतिविधियों के लिए धन जुटाने के स्रोतों और उससे जुड़े वित्तीय लेनदेन की जांच कर रही है। एजेंसी का उद्देश्य यह पता लगाना है कि कथित आरोपियों तक धन कैसे पहुंचा और किन माध्यमों से उसका उपयोग किया गया। जांच एजेंसियों का मानना है कि यदि वित्तीय नेटवर्क का पूरा खुलासा हो जाता है, तो मामले से जुड़े अन्य लोगों और संस्थाओं की भूमिका भी सामने आ सकती है। इसी उद्देश्य से विभिन्न स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया गया है।

फर्जी वैक्सीन प्रमाणपत्र रैकेट का आरोप

ईडी के अनुसार, जांच में यह आरोप सामने आया है कि कोविड-19 महामारी के दौरान कथित रूप से फर्जी वैक्सीन प्रमाणपत्र जारी करने का एक नेटवर्क संचालित किया गया। एजेंसी का दावा है कि जिन लोगों को बिना टीकाकरण के कोविड प्रमाणपत्र चाहिए था, उनसे धन लेकर नकली प्रमाणपत्र उपलब्ध कराए जाते थे। जांच एजेंसी का आरोप है कि इस कथित अवैध कमाई का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों के लिए धन जुटाने में किया गया। हालांकि, इन आरोपों की न्यायिक प्रक्रिया के तहत अभी जांच जारी है और अंतिम निष्कर्ष आना बाकी है।

कॉलेज के नाम पर दान और निवेश जुटाने का दावा

जांच एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया है कि कथित तौर पर कोवाई अरबी कॉलेज के नाम पर दान और निवेश के जरिए धन एकत्र किया गया। ईडी के अनुसार, जांच में ऐसे संकेत मिले हैं कि इस संस्थान का उपयोग केवल आर्थिक संसाधन जुटाने तक सीमित नहीं था, बल्कि कथित रूप से कुछ युवाओं के कट्टरपंथीकरण के लिए भी किया गया। एजेंसी इस पहलू की भी विस्तार से जांच कर रही है कि जुटाई गई धनराशि का उपयोग किस प्रकार और किन उद्देश्यों के लिए किया गया।

ऑनलाइन-ऑफलाइन सत्रों और छापेमारी पर जांच जारी

ईडी का दावा है कि कोयंबटूर धमाका मामले में आरोपी बनाए गए 12 लोगों, जिनमें जेमशा मुबीन भी शामिल था, ने कथित रूप से कोवाई अरबी कॉलेज के ऑनलाइन और ऑफलाइन सत्रों में भाग लिया था। जांच एजेंसी के अनुसार, इन सत्रों का संचालन कॉलेज के प्रमोटर जमील बाशा द्वारा किया जाता था और आरोप है कि वहां सलफी-जिहादी विचारधारा से प्रभावित करने का प्रयास किया गया।

एजेंसी का यह भी आरोप है कि बाद में इन्हीं व्यक्तियों ने कथित रूप से प्रतिबंधित आतंकी संगठन ISIS के समर्थन में कोयंबटूर हमले की साजिश रची। फिलहाल ईडी की तलाशी कार्रवाई जारी है और एजेंसी को उम्मीद है कि जब्त किए गए दस्तावेजों, डिजिटल उपकरणों और वित्तीय रिकॉर्ड के आधार पर कथित टेरर फंडिंग नेटवर्क से जुड़े महत्वपूर्ण साक्ष्य सामने आ सकते हैं। उल्लेखनीय है कि मामले की जांच जारी है और आरोपों पर अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगा।

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