UP Assembly Special Session 2026: उत्तर प्रदेश विधानसभा के एकदिवसीय विशेष सत्र के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महिला सशक्तिकरण और विधायी प्रतिनिधित्व (Women Empowerment and Legislative Representation) के मुद्दे पर विपक्षी दलों को जमकर घेरा। सदन को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह सत्र राज्य की ‘आधी आबादी’ के सम्मान और उनके अधिकारों को सुनिश्चित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। सीएम ने चर्चा से पहले ही हंगामा कर रहे विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि नेता प्रतिपक्ष का उतावलापन उनकी गंभीरता की कमी को दर्शाता है।
नारी शक्ति वंदन और नीति-निर्धारण में बढ़ती महिला भागीदारी
बताते चले कि, मुख्यमंत्री ने केंद्र की मोदी सरकार द्वारा पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम (Nari Shakti Vandan Act) का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि 2014 से 2023 के कालखंड में महिलाओं की सुरक्षा और उनके आर्थिक स्वावलंबन (Economic Self-reliance) के लिए जितने ऐतिहासिक निर्णय लिए गए, उतने पहले कभी नहीं हुए। योगी आदित्यनाथ ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि आज देश की संसद में महिलाओं की संख्या अब तक के उच्चतम स्तर पर है। उन्होंने उत्तर प्रदेश विधानसभा में महिलाओं के मौजूदा 11-12 प्रतिशत प्रतिनिधित्व को बढ़ाकर 33 प्रतिशत कोटा (33% Reservation Quota) तक ले जाने की आवश्यकता पर बल दिया ताकि नीति-निर्धारण में महिलाओं की प्रभावी भूमिका हो सके।
सरकारी योजनाओं पर विपक्ष के रवैये की आलोचना
सपा, कांग्रेस, टीएमसी और डीएमके जैसे दलों को आड़े हाथों लेते हुए मुख्यमंत्री ने उन पर महिला विरोधी राजनीति (Anti-women Politics) करने का आरोप लगाया। उन्होंने जनधन योजना का उदाहरण देते हुए कहा कि जब पहली बार गरीब महिलाओं के बैंक खाते खोले जा रहे थे, तब विपक्ष ने इसका मजाक उड़ाया था। सीएम ने कहा कि इन खातों की वजह से आज डीबीटी और वित्तीय समावेश (DBT and Financial Inclusion) का लाभ सीधे महिलाओं तक पहुँच रहा है, जिससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त हो गई है। उन्होंने विपक्षी दलों से सवाल किया कि आखिर वे हमेशा महिला केंद्रित विकास योजनाओं के मार्ग में बाधा क्यों बनते रहे हैं?
स्वच्छता अभियान को बताया सुरक्षा कवच
सदन में चर्चा के दौरान सीएम योगी ने स्वच्छ भारत अभियान को केवल एक निर्माण कार्य मानने से इनकार कर दिया। उन्होंने इसे नारी सम्मान और सुरक्षा का प्रतीक (Symbol of Dignity and Safety) बताया। उन्होंने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में रिकॉर्ड संख्या में शौचालयों का निर्माण कराकर उनकी सरकार ने महिलाओं को अंधेरे का इंतजार करने वाली मजबूरी से मुक्ति दिलाई है। मुख्यमंत्री ने इसे महिला स्वास्थ्य और मर्यादा (Women’s Health and Modesty) से जुड़ी सबसे बड़ी क्रांति करार दिया और विपक्ष को याद दिलाया कि पिछले शासनकालों में इन बुनियादी जरूरतों को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया था।
कन्या सुमंगला और सामूहिक विवाह
मुख्यमंत्री ने अपनी सरकार की फ्लैगशिप योजनाओं, जैसे मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना (Kanya Sumangala Scheme) और सामूहिक विवाह योजना की उपलब्धियां गिनाईं। उन्होंने गर्व के साथ कहा कि उनकी सरकार ने बेटियों को किसी विशेष जाति या वर्ग की नहीं, बल्कि ‘प्रदेश की बेटी’ मानकर उनके जन्म से लेकर विवाह तक की जिम्मेदारी उठाई है। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मालिकाना हक महिलाओं को दिए जाने को उन्होंने महिला सशक्तिकरण का ठोस आधार (Solid Foundation of Empowerment) बताया।
आरक्षण के विरोध पर दागे कड़े सवाल
भाषण के समापन पर योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष को आईना दिखाते हुए राजनीतिक पाखंड और आत्ममंथन की जरूरत बताई। उन्होंने सवाल किया कि जो दल आज 33 प्रतिशत आरक्षण की वकालत कर रहे हैं, उन्होंने पूर्व में संसद के भीतर इसका विरोध क्यों किया था? सीएम ने कहा कि विपक्ष को महिलाओं के अधिकारों पर दोहरी नीति छोड़कर आत्ममंथन करना चाहिए कि क्यों उनके शासनकाल में महिलाएं असुरक्षित और विकास की मुख्यधारा से कटी हुई थीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि भाजपा सरकार महिलाओं को केवल ‘वोट बैंक’ नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की शक्ति मानती है।









