CJP Protest: ‘कॉकरोच है तो दवा भी है…’ कुमार विश्वास के बयान पर विवाद

दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए CJP प्रोटेस्ट के बाद कुमार विश्वास के ‘कॉकरोच है तो दवा भी है’ बयान ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक बहस तेज हो गई है कि क्या यह टिप्पणी छात्र आंदोलन और सियासी माहौल को प्रभावित करेगी।

कुमार विश्वास के बयान पर विवाद

Wrriten By :

Neha Mishra

Published On :

जून 7, 2026

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CJP Protest: दिल्ली के जंतर-मंतर पर शनिवार को कॉकरोच जनता पार्टी द्वारा किए गए प्रदर्शन को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। इस प्रदर्शन को लेकर कवि और वक्ता कुमार विश्वास का बयान सामने आया है, जिसने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा बढ़ा दी है। नैनीताल में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने इस प्रदर्शन पर अप्रत्यक्ष रूप से टिप्पणी करते हुए कहा कि कुछ लोग विदेशों में बैठकर सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए भारत की छवि को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने बिना नाम लिए कुछ यूट्यूबर्स और CJP से जुड़े लोगों पर भी तंज कसा।

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विदेश से जुड़े प्रभाव और ‘भारत बनाम नेपाल’ टिप्पणी

कुमार विश्वास ने अपने संबोधन में कहा कि उन्हें इस बात की खुशी है कि जब कुछ लोग विदेशी मंचों से भारत की सामाजिक और सांस्कृतिक स्थिति पर सवाल उठाने की कोशिश कर रहे हैं, तब देश के युवा अपने देश की परंपराओं और मूल्यों के साथ खड़े नजर आ रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ डिजिटल माध्यमों के जरिए भारत को अस्थिर दिखाने का प्रयास किया जा रहा है, जिसे वे स्वीकार्य नहीं मानते। उनके इस बयान ने सोशल मीडिया पर भी चर्चा को जन्म दिया है।

‘कॉकरोच’ उपमा पर विवाद और पुराना बयान

इससे पहले भी कुमार विश्वास ने कॉकरोच जनता पार्टी को लेकर एक सख्त टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था कि कॉकरोच एक ऐसा जीव होता है जो अंधेरे और गंदे स्थानों में पनपता है और अक्सर नुकसान पहुंचाता है। उनका कहना था कि जैसे घर में कॉकरोच को खत्म करने के लिए दवा का उपयोग किया जाता है, वैसे ही समाज में नकारात्मकता फैलाने वाली ताकतों से निपटने के लिए भी उपाय मौजूद हैं। इस बयान को लेकर भी उस समय काफी बहस हुई थी।

जंतर-मंतर पर बड़ी संख्या में जुटे प्रदर्शनकारी

दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए इस प्रदर्शन में कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके भी शामिल हुए। इस आंदोलन में सैकड़ों लोग पहुंचे, जिनमें बड़ी संख्या में युवा और छात्र शामिल थे। प्रदर्शन के दौरान कई प्रतिभागियों ने कॉकरोच के मुखौटे पहन रखे थे और हाथों में फूल लेकर शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखी। कुछ स्कूली छात्र भी अपने अभिभावकों के साथ प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे।

शिक्षा व्यवस्था और परीक्षाओं पर उठाए सवाल

इस प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे NEET, CBSE, CUET और SSC में कथित अनियमितताओं के खिलाफ आवाज उठाना था। प्रदर्शनकारियों ने इन परीक्षाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग की। साथ ही शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी की गई। प्रदर्शन के दौरान यह भी कहा गया कि छात्रों के भविष्य से जुड़े मामलों में गंभीरता और पारदर्शिता आवश्यक है।

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शांति और करुणा का संदेश

सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने प्रदर्शन में शामिल लोगों से अपील की कि वे आंदोलन को शांतिपूर्ण तरीके से आगे बढ़ाएं। उन्होंने प्रदर्शनकारियों से पुलिसकर्मियों को फूल भेंट कर करुणा और सम्मान का संदेश देने की भी बात कही। इस पूरे घटनाक्रम ने एक ओर जहां सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में बहस को तेज कर दिया है, वहीं दूसरी ओर शिक्षा व्यवस्था को लेकर उठ रहे सवालों को भी फिर से केंद्र में ला दिया है।

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