Parliament Protest: संसद में फिर हंगामा, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अड़ा विपक्ष; कार्यवाही 12 बजे तक स्थगित

CJP प्रदर्शन को लेकर संगठन ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराई है। संगठन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फास्ट-ट्रैक कोर्ट के ऐलान को पर्याप्त कदम नहीं बताया और आंदोलन जारी रखने की बात कही। छात्र मुद्दों और परीक्षा व्यवस्था को लेकर प्रदर्शनकारियों और सरकार के बीच मतभेद बना हुआ है।

Parliament Protest

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जुलाई 23, 2026

Parliament Protest: संसद में सत्ता पक्ष और विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ के बीच गतिरोध थमता नजर नहीं आ रहा है। गुरुवार को संसद पहुंचते ही विपक्ष ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। विपक्षी सांसदों ने मकरद्वार पर एकजुट होकर जमकर नारेबाजी की। उनके हाथों में ‘पेपर लीक’ लिखी तख्तियां थीं। विपक्ष की प्रमुख मांग शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा है। विपक्ष ने स्पष्ट किया कि जब तक शिक्षा मंत्री इस्तीफा नहीं देते, वे नीट (NEET) पेपर लीक और शिक्षा से जुड़े अन्य मुद्दों पर चर्चा नहीं करेंगे। वहीं, एनडीए सांसदों ने सरकार का बचाव किया।

कार्यवाही ठप और सरकार का पक्ष

लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सदस्यों ने भारी हंगामा शुरू कर दिया। संसदीय कार्य मंत्री किरन रिजिजू ने कहा कि सरकार पेपर लीक मुद्दे पर सकारात्मक चर्चा के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि विपक्ष चर्चा नहीं चाहता और यह चर्चा शर्तों पर नहीं हो सकती। रिजिजू के आग्रह के बावजूद विपक्ष अपनी बात पर अड़ा रहा। हंगामा शांत न होने पर लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने सदन की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी। उच्च सदन राज्यसभा में भी जोरदार हंगामा जारी रहा।

फास्ट ट्रैक कोर्ट का अहम आश्वासन

इस बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘एक्स’ पर एक महत्वपूर्ण बयान जारी किया। उन्होंने पेपर लीक के दोषियों को सजा सुनिश्चित करने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन की बात कही। पीएम ने कहा कि युवाओं का भविष्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। त्वरित सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक अदालतें बनेंगी ताकि दोषियों को कठोर दंड मिले। संबंधित विभागों को आवश्यक कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई सुनिश्चित करने के सख्त निर्देश दे दिए गए हैं।

प्रियंका गांधी का सरकार पर प्रहार

इस घोषणा पर कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने कहा, ‘प्रधानमंत्री एक नेता हैं और अब वास्तव में नेतृत्व दिखाने का समय आ गया है।’ उन्होंने कहा कि छात्रों की मांगें सुनी जानी चाहिए, जो मंत्री के इस्तीफे और लाठीचार्ज करने वालों पर कार्रवाई चाहते हैं। प्रियंका ने कहा कि छात्रों का सिस्टम से भरोसा उठ चुका है; उसी सिस्टम के भीतर समाधान वे स्वीकार नहीं करेंगे। उन्होंने सवाल किया कि अगर छात्रों पर भरोसा है, तो उन पर लाठियां क्यों बरसाई गईं?

पीएम की विश्वसनीयता पर उठे सवाल

कांग्रेस पार्टी के सांसद के.सी. वेणुगोपाल ने सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि आज प्रधानमंत्री की बातों पर कोई विश्वास नहीं करता। उनके शब्दों की विश्वसनीयता पूरी तरह खत्म हो चुकी है। वेणुगोपाल ने मांग की कि संकट के इस समय में सबसे पहले धर्मेंद्र प्रधान को शिक्षा मंत्री पद से हटाना चाहिए, उसके बाद ही छात्रों से बातचीत की मेज पर आना चाहिए।

भाजपा का दोषियों पर सख्त कार्रवाई

भाजपा सांसद मनन कुमार मिश्रा ने सरकार का बचाव करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री पहले ही भरोसा दिला चुके हैं कि नीट परीक्षा में छात्रों की परेशानी के जिम्मेदार लोगों को बख्शा नहीं जाएगा। फास्ट-ट्रैक कोर्ट से मामले का जल्द निपटारा होगा और किसी भी सूरत में होनहार छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

वामदलों का शिक्षा मंत्री पर निशाना

सीपीआई सांसद पी. संदोश कुमार ने गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि यह नया बयान धर्मेंद्र प्रधान को बचाने की नाकाम कोशिश है। प्रधानमंत्री जमीनी हकीकत से कट चुके हैं और पूरा विपक्ष छात्रों के साथ है। इस संकट की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए धर्मेंद्र प्रधान को तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए।

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