CJP Protest: पुलिस कार्रवाई पर भड़का CJP, देशव्यापी प्रदर्शन से सरकार पर बढ़ेगा दबाव

नीट पेपर लीक विवाद के बीच केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने आंदोलनकारियों को बातचीत का प्रस्ताव दिया है, जिस पर सीजेपी ने बैठक जंतर-मंतर या किसी न्यूट्रल जगह पर करने की शर्त रखी है।

CJP Protest

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

जुलाई 23, 2026

CJP Protest: देश की राजधानी दिल्ली समेत पूरे देश में नीट (NEET) परीक्षा के विवाद और पेपर लीक के मामलों को लेकर घमासान मचा हुआ है। पुलिस बर्बरता के खिलाफ अब कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने आक्रामक रुख अपनाते हुए कल देश भर में राष्ट्रव्यापी शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने का ऐलान किया है। पार्टी की ओर से अपील की गई है कि देश के हर जिले में छात्र संघ एकजुट होकर इकट्ठा हों और छात्रों की प्रमुख मांगों को सार्वजनिक रूप से पढ़ें। इस बीच, सरकार और आंदोलनकारियों के बीच चल रहे गतिरोध को दूर करने की कोशिशें भी जारी हैं, लेकिन शर्तों को लेकर तनातनी अभी भी बनी हुई है।

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CJP की दो टूक शर्तें और सरकार के साथ बातचीत पर घमासान

सीजेपी के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने देश की जनता और समर्थकों को संबोधित करते हुए एक बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने दावा किया कि सरकार के प्रतिनिधियों ने जंतर-मंतर के प्रदर्शन स्थल पर आने से साफ इनकार कर दिया है। इसके विपरीत, केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह लगातार यह कह रहे हैं कि बातचीत के लिए केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा के सरकारी आवास पर आना होगा।

इस प्रस्ताव पर कड़ा विरोध जताते हुए सीजेपी ने सरकार के सामने अपनी दो स्पष्ट शर्तें रख दी हैं:

बातचीत का स्थान: सीजेपी ने दो टूक कहा है कि यह बैठक केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा के घर पर कतई आयोजित नहीं होगी। यदि सरकार वाकई गंभीर है, तो यह बैठक या तो जंतर-मंतर पर होनी चाहिए या फिर किसी अन्य निष्पक्ष (न्यूट्रल) जगह पर।

ठोस और समयबद्ध आश्वासन: पार्टी की दूसरी शर्त यह है कि सरकार को केवल गोलमोल बातें करने के बजाय ठोस जवाब देना होगा और यह बताना होगा कि छात्रों की मांगें किस निश्चित समय सीमा के भीतर पूरी की जाएंगी।

सीजेपी के एक अन्य प्रवक्ता सौरव दास ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस सोशल मीडिया पोस्ट पर कड़ी प्रतिक्रिया दी, जिसमें उन्होंने पेपर लीक के मामलों के लिए ‘फास्ट-ट्रैक कोर्ट’ बनाने का ऐलान किया है। सौरव दास ने कहा कि इस तरह के कागजी ऐलान अब किसी काम के नहीं हैं और ये सिर्फ जनता को गुमराह करने का जरिया हैं। उन्होंने साफ किया कि पार्टी को केवल जवाबदेही चाहिए और जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा नहीं होता, तब तक वे उनसे नीचे के किसी भी अधिकारी या मंत्री से चर्चा नहीं करेंगे।

पीएम मोदी के ऐलान पर सियासत तेज

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा छात्रों के हित में पेपर लीक के दोषियों को त्वरित सजा दिलाने के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट के गठन के निर्देश दिए जाने के बाद राजनीतिक गलियारों में बयानबाजी तेज हो गई है। दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने पीएम मोदी के इस बयान पर तीखा पलटवार किया है। केजरीवाल ने सोशल मीडिया पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रधानमंत्री के इस बयान से केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का क्या हुआ? उन्होंने प्रधानमंत्री के इस स्टेटमेंट को एक हारे हुए, दिशाहीन और अहंकारी नेतृत्व की प्रतिक्रिया करार दिया है।

हिंसक भीड़ में फंसे एसीपी की डरावनी आपबीती

दूसरी तरफ, प्रदर्शन के दौरान ज़मीनी स्तर पर हालात कितने भयानक थे, इसकी बानगी एसीपी विवेक भगत के बयान से मिलती है। एसीपी विवेक भगत ने अपनी आपबीती साझा करते हुए बताया कि वे रीगल बिल्डिंग से कनॉट प्लेस और संसद मार्ग की ओर ड्यूटी पर जा रहे थे। उनके साथ 5-6 लोगों का स्टाफ और एक अन्य एसीपी प्रोबेशनर रोहित व ऑपरेटर नवनीत भी थे।

जैसे ही वे आगे बढ़े, उन्होंने देखा कि पुलिस कर्मियों पर पानी की बोतलें फेंकी जा रही थीं और सरकार व खाकी के खिलाफ उग्र नारेबाज़ी हो रही थी। भीड़ की हिंसा का शिकार बने एक घायल पुलिसकर्मी को बचाने के प्रयास का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि लहूलुहान चेहरे वाले उस जवान को भीड़ के चंगुल से निकालकर एक-दो मीटर आगे भी लाया गया, लेकिन हिंसक भीड़ इतनी आक्रामक थी कि विशेष रूप से पुलिस अधिकारियों को चुन-चुनकर निशाना बनाया गया। इस पूरी घटना ने सुरक्षा व्यवस्था और आंदोलन के नाम पर हो रही हिंसा की गंभीरता को उजागर कर दिया है।

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