Chhota Rajan Passport Case: फर्जी दस्तावेजों से पासपोर्ट मामले में छोटा राजन को 7 साल की सजा, CBI कोर्ट का फैसला

फर्जी दस्तावेजों के जरिए पासपोर्ट हासिल करने से जुड़े मामले में CBI की विशेष अदालत ने गैंगस्टर छोटा राजन को सात साल की सजा सुनाई है। लंबे समय से चल रहे इस मामले में अदालत के फैसले के बाद कानूनी कार्रवाई एक नए चरण में पहुंच गई है। जानिए पूरा मामला और फैसले की अहम बातें।

Chhota Rajan Passport Case

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जुलाई 30, 2026

Chhota Rajan Passport Case: कुख्यात गैंगस्टर राजेंद्र सदाशिव निखल्जे, जिसे दुनिया छोटा राजन के नाम से जानती है, उसके जीवन में कानूनी शिकंजा और अधिक कस गया है। फर्जी दस्तावेजों के सहारे पासपोर्ट प्राप्त करने के दो दशक से भी अधिक पुराने एक संवेदनशील मामले में चेन्नई की विशेष सीबीआई अदालत ने उसे कड़ा झटका दिया है। अदालत ने सुनवाई पूरी करते हुए छोटा राजन को धोखाधड़ी और जालसाजी जैसे गंभीर आरोपों में पूरी तरह दोषी करार दिया है। इस फैसले के तहत उसे सात साल के कारावास की सजा सुनाई गई है, जो उसके आपराधिक इतिहास में एक और बड़ा न्यायिक कदम माना जा रहा है।

अदालत ने लगाया 55,000 रुपये का भारी जुर्माना

न्यायालय ने केवल कारावास की सजा ही नहीं सुनाई, बल्कि आर्थिक दंड भी सुनिश्चित किया है। अदालत के आदेशानुसार, छोटा राजन पर कुल 55,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया है। अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत किए गए पुख्ता सबूतों और गवाहों के बयानों के आधार पर यह फैसला आया। इस मामले में कानूनी प्रक्रिया काफी लंबी चली, लेकिन अंततः अदालत ने जालसाजी और धोखाधड़ी के इस कृत्य को गंभीर अपराध मानते हुए यह जुर्माना लगाया है, जिसे अदा करना अनिवार्य होगा।

‘विजया कदम’ के फर्जी नाम से बनवाया था पासपोर्ट

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की विस्तृत जांच रिपोर्ट के अनुसार, यह पूरा मामला वर्ष 2002 का है। इस दौरान छोटा राजन ने अपनी वास्तविक पहचान को पूरी तरह से छिपाने का षड्यंत्र रचा। उसने कानून की आँखों में धूल झोंकने के उद्देश्य से ‘विजया कदम’ नाम का इस्तेमाल करते हुए भारतीय पासपोर्ट के लिए औपचारिक आवेदन किया था। अपनी इस फर्जी पहचान को कानूनी रूप से वैध साबित करने के लिए उसने कई झूठे और मनगढ़ंत दस्तावेजों का सहारा लिया था।

जमा किए गए थे स्कूल ट्रांसफर सर्टिफिकेट और राशन कार्ड

फर्जी आवेदन को पुख्ता और सही ठहराने के लिए छोटा राजन ने सुनियोजित तरीके से कई नकली दस्तावेज तैयार करवाए थे। इसमें स्कूल का एक फर्जी ट्रांसफर सर्टिफिकेट, राशन कार्ड और बैंक डिमांड ड्राफ्ट जैसे महत्वपूर्ण कागजात शामिल थे। इन सभी जाली दस्तावेजों को चेन्नई स्थित संबंधित कार्यालय में जमा कराया गया था ताकि अधिकारी उसकी असली पहचान न भांप सकें और धोखे से पासपोर्ट जारी कर दिया जाए।

सीबीआई ने 19 मार्च 2002 को दर्ज किया था मामला

इस बड़े फर्जीवाड़े की भनक लगते ही केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई ने त्वरित कार्रवाई की। सीबीआई ने इस सिलसिले में 19 मार्च 2002 को आधिकारिक तौर पर मामला दर्ज किया और अपनी तफ्तीश शुरू कर दी। एजेंसी ने एक-एक दस्तावेज की गहराई से जांच की और यह पता लगाने का प्रयास किया कि इस आपराधिक षड्यंत्र के पीछे कौन-कौन लोग शामिल थे।

चेन्नई क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय को दिया गया था धोखा

गहन और लंबी तफ्तीश के दौरान यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि चेन्नई में स्थित क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय (Regional Passport Office) के अधिकारियों को पूरी तरह धोखे में रखा गया था। फर्जी पहचान के आधार पर पासपोर्ट हासिल करने वाला शातिर व्यक्ति कोई और नहीं बल्कि मुंबई का वही कुख्यात गैंगस्टर छोटा राजन था, जो लंबे समय से कानून की गिरफ्त से बचने के लिए अपनी पहचान बदल रहा था।

22 जनवरी 2004 को अदालत में दाखिल की गई थी चार्जशीट

जांच को आगे बढ़ाते हुए और पुख्ता सबूत जुटाने के बाद, सीबीआई ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट तैयार की। इसके तहत 22 जनवरी 2004 को अदालत के समक्ष औपचारिक रूप से चार्जशीट यानी आरोप पत्र दाखिल किया गया। इस चार्जशीट में छोटा राजन द्वारा अपनाए गए तौर-तरीकों और जमा किए गए फर्जी दस्तावेजों का पूरा कच्चा-चिट्ठा पेश किया गया था, जिसके आधार पर आगे की न्यायिक कार्रवाई शुरू हुई।

लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद आया अदालत का फैसला

इस मामले की सुनवाई लंबी कानूनी प्रक्रिया के दौर से गुजरी। अदालत में दोनों पक्षों की दलीलें सुनी गईं और पेश किए गए साक्ष्यों का बारीकी से परीक्षण किया गया। लंबी और विस्तृत सुनवाई के बाद आखिरकार अदालत ने अपना फैसला सुनाया, जिसमें छोटा राजन को फर्जी पहचान का इस्तेमाल करने, गंभीर धोखाधड़ी करने और जाली दस्तावेज अदालत एवं प्रशासन के समक्ष पेश करने का पूरी तरह दोषी पाया गया।

इंडोनेशिया के बाली से अक्टूबर 2015 में हुई थी गिरफ्तारी

गैंगस्टर छोटा राजन को पकड़ने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी प्रयास किए गए थे। उसे अक्टूबर 2015 में इंडोनेशिया के खूबसूरत द्वीप बाली से गिरफ्तार किया गया था और इसके बाद विशेष सुरक्षा के बीच उसे भारत लाया गया था। उसकी गिरफ्तारी भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ी सफलता मानी गई थी, जिसके बाद से उस पर चल रहे विभिन्न मामलों में तेजी से सुनवाई शुरू हुई।

वर्तमान में नई दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद है छोटा राजन

फर्जी दस्तावेजों के मामले में सजा पाने वाला छोटा राजन इस समय अपनी बाकी जिंदगी की सजाएं काट रहा है। वर्तमान में वह नई दिल्ली की अत्यधिक सुरक्षित तिहाड़ जेल में बंद है। यहाँ वह पहले से ही एक अन्य बेहद चर्चित और गंभीर आपराधिक मामले में उम्रकैद की सजा काट रहा है, और अब इस नए फैसले से उसकी मुश्किलें और अधिक बढ़ गई हैं।

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