Naxal Encounter In Chhattisgarh: छत्तीसगढ़ में लाल आतंक पर बड़ा प्रहार! मुठभेड़ में 5 नक्सली ढेर, AK-47 बरामद

छत्तीसगढ़ के बीजापुर और सुकमा में सुरक्षाबलों ने नए साल की शुरुआत में 'लाल आतंक' पर बड़ा प्रहार किया है। नक्सली कमांडर बारसे देवा के सरेंडर के बाद हुई मुठभेड़ में जवानों ने 5 नक्सलियों को मार गिराया और AK-47, INSAS जैसे भारी हथियार जब्त किए। नक्सलवाद के खात्मे की दिशा में यह सुरक्षाबलों की एक महत्वपूर्ण सफलता है।

Naxal Encounter In Chhattisgarh

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

जनवरी 3, 2026

Naxal Encounter In Chhattisgarh: नए साल की शुरुआत के साथ ही छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में ‘लाल आतंक’ के खिलाफ सुरक्षाबलों को एक बहुत बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। नक्सली कमांडर बारसे देवा के आत्मसमर्पण के बाद अब बीजापुर और सुकमा जिलों में हुई दो अलग-अलग मुठभेड़ों ने माओवादियों की कमर तोड़ दी है। इन सैन्य अभियानों में सुरक्षाबलों ने कुल पांच नक्सलियों को मार गिराया है।

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बीजापुर में सैन्य अभियान

बीजापुर जिले के दक्षिण क्षेत्र में सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच तड़के सुबह भीषण मुठभेड़ शुरू हुई। जिला रिजर्व गार्ड (DRG) की एक विशेष टीम नियमित गश्त और सर्च ऑपरेशन के लिए जंगलों में निकली थी। इसी दौरान खुफिया तंत्र से माओवादियों की मौजूदगी की पुख्ता जानकारी मिली।

जवानों ने घेराबंदी शुरू की, जिसे भांपते ही नक्सलियों ने गोलीबारी शुरू कर दी। सुबह 5 बजे से शुरू हुई यह रुक-रुक कर चलने वाली मुठभेड़ काफी देर तक जारी रही। जांबाज जवानों ने रणनीतिक सूझबूझ का परिचय देते हुए दो नक्सलियों को मौके पर ही ढेर कर दिया। सुरक्षाबलों की इस त्वरित कार्रवाई ने इलाके में सक्रिय नक्सली नेटवर्क को भारी नुकसान पहुँचाया है।

सुकमा एनकाउंटर अपडेट

दूसरी ओर, सुकमा जिले के कोन्टा और किस्टाराम के घने जंगलों में भी सुरक्षाबलों को बड़ी सफलता मिली। यहाँ डीआरजी के जवानों और नक्सलियों के बीच आमने-सामने की जंग हुई। इस मुठभेड़ में सुरक्षाबलों ने तीन खूंखार नक्सलियों को मार गिराने में सफलता प्राप्त की।

मुठभेड़ के बाद जब इलाके की सर्चिंग की गई, तो वहां से AK-47 और INSAS जैसे घातक ऑटोमैटिक हथियार बरामद हुए। यह इस बात का प्रमाण है कि मारे गए नक्सली किसी बड़ी साजिश को अंजाम देने की फिराक में थे। आधुनिक हथियारों की इस जब्ती को नक्सलियों की सैन्य शक्ति पर एक बड़े प्रहार के रूप में देखा जा रहा है।

नक्सलवाद के खिलाफ दोहरी मार

छत्तीसगढ़ में नक्सल विरोधी अभियान अब अपने निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। हाल ही में खूंखार नक्सली कमांडर बारसे देवा द्वारा आत्मसमर्पण किए जाने से संगठन पहले ही कमजोर हो चुका था। अब बीजापुर और सुकमा में हुए इन सफल ऑपरेशनों ने माओवादियों पर ‘दोहरी मार’ की है।

अधिकारियों का मानना है कि बड़े कमांडरों के सरेंडर और मैदानी मोर्चे पर मिल रही इन सफलताओं से नक्सलियों का मनोबल पूरी तरह टूट चुका है। सुरक्षाबलों ने अब उन दुर्गम इलाकों में भी अपनी पकड़ मजबूत कर ली है, जिन्हें कभी नक्सलियों का ‘अभेद्य किला’ माना जाता था। सरकार और प्रशासन की ओर से स्पष्ट संदेश है कि हिंसा का रास्ता छोड़ने वालों के लिए पुनर्वास की राह खुली है, अन्यथा सुरक्षाबलों की यह कार्रवाई निरंतर जारी रहेगी।

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