Chandra Grahan 2026: सूर्य की राशि में साल का पहला चंद्र ग्रहण, क्या भारत में दिखेगा ब्लड मून?

Chandra Grahan 2026 होलिका दहन के दिन लगने जा रहा है। जानें चंद्र ग्रहण की सही तारीख, समय, भारत में इसकी दृश्यता और सूतक काल से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी।

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Nivedita Kasaudhan

Published On :

फ़रवरी 25, 2026

Chandra Grahan 2026: साल 2026 खगोलीय और ज्योतिषीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण रहने वाला है। फरवरी में हुए सूर्य ग्रहण के बाद अब मार्च के महीने में साल का पहला चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है। विशेष बात यह है कि इस बार चंद्रमा ‘ब्लड मून’ के रूप में नजर आएगा और यह ग्रहण भारत में भी दिखाई देगा। ऐसे में हम आपको अपने इस लेख द्वारा चंद्र ग्रहण से जुड़ी जानकारी प्रदान कर रहे हैं तो आइए जानते हैं विस्तार से।

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चंद्र ग्रहण की तारीख और समय

Chandra Grahan 2026
साल का पहला चंद्र ग्रहण

हिंदू पंचांग के अनुसार, साल का पहला चंद्र ग्रहण 3 मार्च 2026, मंगलवार को लगने जा रहा है। यह दिन फाल्गुन मास की पूर्णिमा का है, जिस दिन होलिका दहन का पर्व भी मनाया जाएगा।

भारतीय समयानुसार ग्रहण की अवधि

ग्रहण का आरंभ (उपच्छाया स्पर्श): दोपहर 02:16 बजे

प्रच्छाया स्पर्श (आंशिक आरंभ): दोपहर 03:21 बजे

खग्रास (पूर्ण ग्रहण) प्रारंभ: शाम 04:35 बजे

परमग्रास (अधिकतम प्रभाव): शाम 05:04 बजे

खग्रास (पूर्ण ग्रहण) समाप्त: शाम 05:33 बजे

ग्रहण का पूर्ण समापन (उपच्छाया अंत): रात 07:52 बजे

भारत में चंद्रोदय का समय: शाम 06:26 बजे

भारत में दृश्यता और सूतक काल का प्रभाव

अक्सर कई ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देते, लेकिन 3 मार्च का चंद्र ग्रहण भारत में दृश्य होगा। इसी कारण धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यहाँ सूतक काल पूरी तरह प्रभावी रहेगा।

दृश्यता वाले क्षेत्र: यह ग्रहण विशेष रूप से उत्तर-पूर्वी भारत (अरुणाचल प्रदेश, असम, नगालैंड, मणिपुर) में स्पष्ट दिखेगा। दिल्ली, मुंबई, लखनऊ, जयपुर और बेंगलुरु जैसे शहरों में यह आंशिक रूप में दिखाई देगा।

सूतक काल का समय: चंद्र ग्रहण का सूतक ग्रहण शुरू होने से 9 घंटे पहले लग जाता है। अतः 3 मार्च की सुबह 09:39 बजे से सूतक काल शुरू हो जाएगा, जो शाम को ग्रहण की समाप्ति तक रहेगा। इस दौरान मंदिरों के कपाट बंद रहेंगे और मांगलिक कार्यों पर रोक रहेगी।

जानें क्या होता है ब्लड मून

इस ग्रहण की सबसे रोमांचक बात इसका ‘ब्लड मून’ होना है। वैज्ञानिक दृष्टि से, जब चंद्रमा पूरी तरह से पृथ्वी की प्रच्छाया (Umbra) में प्रवेश कर जाता है, तो सूर्य की किरणें पृथ्वी के वायुमंडल से टकराकर मुड़ जाती हैं। वायुमंडल में केवल लाल रंग की तरंगें ही चंद्रमा तक पहुँच पाती हैं, जिससे चंद्रमा गहरा लाल या तांबे जैसा चमकता हुआ दिखाई देता है।

ज्योतिषीय विश्लेषण: सिंह राशि में ग्रहण योग

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, यह ग्रहण सिंह राशि और पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र में लगने जा रहा है।

ग्रहों की स्थिति: ग्रहण के समय चंद्रमा सिंह राशि में केतु के साथ विराजमान रहेंगे, जिससे ‘ग्रहण योग’ का निर्माण होगा।

राशियों पर प्रभाव: सिंह राशि के जातकों को इस दौरान विशेष सावधानी बरतनी होगी। अन्य 12 राशियों के लिए भी यह ग्रहण मिश्रित परिणाम लेकर आएगा। चूंकि यह होलिका दहन के दिन पड़ रहा है, इसलिए आध्यात्मिक साधना और मंत्र जाप के लिए यह समय अत्यंत प्रभावशाली माना गया है।

सावधानियां और नियम

आपको बता दें कि सूतक काल प्रभावी होने कारण कुछ बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है, जिसमें सूतक काल में भोजन बनाने और करने से बचना चाहिए। खाने-पीने की वस्तुओं में तुलसी के पत्ते पहले ही डाल दें। गर्भवती महिलाओं को ग्रहण के दौरान नुकीली वस्तुओं का प्रयोग नहीं करना चाहिए। ग्रहण समाप्त होने के बाद शुद्ध जल से स्नान करें और दान-पुण्य करें।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां पौराणिक कथाओं,धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। खबर में दी जानकारी पर विश्वास व्यक्ति की अपनी सूझ-बूझ और विवेक पर निर्भर करता है। प्राइम टीवी इंडिया इस पर दावा नहीं करता है ना ही किसी बात पर सत्यता का प्रमाण देता है।