Chamba Temple Fire: हिमाचल की प्राचीन विरासत को झटका, 200 साल पुरानी मंदिर जलकर राख

हिमाचल प्रदेश के चंबा में स्थित 200 साल पुराना गिरड़ माता मंदिर भीषण आग की चपेट में आकर पूरी तरह जलकर खाक हो गया। यह मंदिर न सिर्फ धार्मिक आस्था का केंद्र था, बल्कि ऐतिहासिक विरासत भी था। जानिए आग लगने की वजह और प्रशासन की अगली कार्रवाई।

Chamba Temple Fire

Wrriten By :

Neha Mishra

Published On :

फ़रवरी 7, 2026

Chamba Temple Fire: हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले से एक अत्यंत दुखद समाचार सामने आया है। भरमौर क्षेत्र की ग्राम पंचायत खुंदेल के गिरड़ गांव में स्थित ऐतिहासिक गिरड़ माता मंदिर शुक्रवार को भीषण आग की चपेट में आने से पूरी तरह नष्ट हो गया। लगभग 200 वर्षों का गौरवशाली इतिहास समेटे यह मंदिर अब मलबे और राख के ढेर में तब्दील हो चुका है। यह घटना न केवल एक धार्मिक ढांचे का नुकसान है, बल्कि हिमाचल की प्राचीन काष्ठकला और सांस्कृतिक पहचान पर भी गहरी चोट है।

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धू-धू कर जला आस्था का केंद्र

शुक्रवार को मंदिर परिसर में अचानक आग भड़क उठी। चूंकि मंदिर का निर्माण पारंपरिक हिमाचली शैली में देवदार की लकड़ियों से किया गया था, इसलिए लपटों ने देखते ही देखते विकराल रूप धारण कर लिया। दुर्गम क्षेत्र होने के कारण जब तक स्थानीय ग्रामीण कुछ समझ पाते और राहत कार्य शुरू करते, तब तक आग पूरे परिसर को अपनी आगोश में ले चुकी थी। ग्रामीणों ने अपनी जान जोखिम में डालकर आग पर काबू पाने की हरसंभव कोशिश की, लेकिन सूखी लकड़ी और तेज हवाओं के कारण सफलता नहीं मिल सकी।

बहुमूल्य मूर्तियों और प्राचीन नक्काशी का विनाश

इस अग्निकांड में केवल इमारत ही नहीं, बल्कि मंदिर के भीतर मौजूद अमूल्य संपदा भी राख हो गई:

  • दुर्लभ ब्लैक स्टोन: मंदिर के गर्भगृह में स्थापित अत्यंत दुर्लभ ‘काले पत्थर’ और संगमरमर की मूर्तियां आग की भीषण तपिश के कारण खंडित हो गई हैं।
  • धातु की कलाकृतियां: सदियों पुरानी पीतल की मूर्तियों को भी इस आग में भारी क्षति पहुंची है।
  • काष्ठकला का अंत: देवदार की लकड़ियों पर की गई वह बारीक नक्काशी, जो हिमाचली वास्तुकला का बेजोड़ नमूना थी, अब हमेशा के लिए लुप्त हो गई है।

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क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को अपूरणीय क्षति

गिरड़ माता मंदिर केवल एक पूजा स्थल नहीं था, बल्कि भरमौर के इतिहास का एक जीवंत दस्तावेज था। दो शताब्दियों से यह मंदिर स्थानीय समुदायों की सामूहिक आस्था और परंपराओं का केंद्र बना हुआ था। पूर्वजों के समय से चली आ रही इस विरासत के अचानक नष्ट हो जाने से पूरे जिले में शोक की लहर है। श्रद्धालुओं के लिए यह एक ऐसी क्षति है जिसकी भरपाई आने वाले कई दशकों तक संभव नहीं होगी।

प्रशासन की कार्रवाई और जांच के आदेश

घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और प्रशासन की टीम ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। पुलिस ने आधिकारिक तौर पर मामला दर्ज कर लिया है। हालांकि, आग लगने के सटीक कारणों का अभी पता नहीं चल पाया है, लेकिन प्राथमिक तौर पर शॉर्ट सर्किट या मानवीय चूक की संभावना जताई जा रही है। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि वे नुकसान का विस्तृत आकलन कर रहे हैं। वहीं, स्थानीय जनता ने सरकार और पुरातत्व विभाग से मांग की है कि इस ऐतिहासिक स्थल का पुनरुद्धार किया जाए ताकि आने वाली पीढ़ियां अपनी जड़ों से जुड़ी रह सकें।

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