Chamba Bridge Collapse: चंबा में भारी लैंडस्लाइड से निर्माणाधीन पुल ध्वस्त, 5 करोड़ की लागत से बन रही थी ‘लाइफलाइन’

सिंयुर पुल रावी नदी पर स्थानीय गांवों की लाइफलाइन माना जा रहा था, जो 80 साल से लोगों का इंतजार था। आसपास के गांवों को जोड़ने वाला पुराने लकड़ी के पुल से ही वाहन गुजरते थे।

Chamba Bridge Collapse:

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

अप्रैल 7, 2026

Chamba Bridge Collapse: हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में निर्माणाधीन सिंयुर पुल एक भारी लैंडस्लाइड के कारण ध्वस्त हो गया। यह पुल भरमौर विधानसभा क्षेत्र में सिंयुर-होली सड़क मार्ग पर बनाया जा रहा था और स्थानीय लोगों के लिए वर्षों से प्रतीक्षित था। सौभाग्य से, हादसे के दौरान किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।

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निर्माणाधीन पुल ध्वस्त, 5 करोड़ रुपये की लागत हुई बर्बाद

सिंयुर पुल का निर्माण पांच करोड़ रुपये की लागत से चल रहा था। यह पुल लोहे का बना था और इसे रावी नदी के ऊपर बनाए जाने के कारण स्थानीय गांवों के लिए महत्वपूर्ण था। पुराने लकड़ी के पुल के स्थान पर यह नया पुल लोगों की जीवन रेखा माना जा रहा था, क्योंकि इसके बनने से क्षेत्र के आसपास के गांवों का संपर्क बेहतर होता।

लेकिन मंगलवार सुबह भारी बारिश और पहाड़ी से आए लैंडस्लाइड के कारण पुल ध्वस्त हो गया। घटना का वीडियो भरमौर के बीजेपी विधायक डॉ. जनक राज़ ने सोशल मीडिया पर साझा किया। पुल के गिरने से स्थानीय लोगों की उम्मीदें और इंतजार और बढ़ गया है।

लंबा इंतजार और असफल प्रयास

स्थानीय लोग लगभग 80 साल से पक्के पुल का इंतजार कर रहे थे। 2023 में इस पुल का टेंडर पास हुआ और इसके बाद निर्माण कार्य शुरू किया गया। हालांकि, लगातार हो रही बारिश और भूस्खलन की घटनाओं ने इस प्रयास को असफल बना दिया। इस हादसे के साथ यह स्पष्ट हो गया कि पहाड़ी इलाकों में निर्माण कार्यों में मौसम और भूगर्भीय परिस्थितियों का विशेष ध्यान रखना कितना जरूरी है।

स्थानीय जीवन पर असर

सिंयुर पुल का निर्माण ग्रामीण इलाकों के लिए लाइफलाइन के रूप में देखा जा रहा था। पुराने लकड़ी के पुल पर वाहन गुजरते थे, लेकिन सुरक्षा और सुविधा की दृष्टि से यह नया पुल अत्यंत आवश्यक था। पुल ध्वस्त होने के बाद, स्थानीय लोगों को अपने रोजमर्रा के आवागमन में कठिनाई का सामना करना पड़ेगा।

आगे की चुनौतियां

हादसे के बावजूद अधिकारियों ने कहा है कि कोई जनहानि नहीं हुई है। लेकिन अब निर्माण की योजना को फिर से तैयार करना होगा और प्राकृतिक आपदाओं के जोखिम को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा उपाय बढ़ाने होंगे। विशेषज्ञों के अनुसार, पहाड़ी क्षेत्रों में ऐसे भारी निर्माण कार्यों में लैंडस्लाइड प्रोटेक्शन और ड्रेनेज सिस्टम को और मजबूत करना आवश्यक है।

सिंयुर पुल का यह हादसा हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश और भूस्खलन की चुनौतियों को स्पष्ट रूप से दर्शाता है। स्थानीय प्रशासन और इंजीनियरिंग विभाग को जल्द ही नए निर्माण के लिए रणनीति बनानी होगी, ताकि लोगों का दशकों का इंतजार व्यर्थ न जाए।

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