Chaitra Navratri Day 8: चैत्र नवरात्रि का आठवां दिन शक्ति की देवी मां महागौरी को समर्पित है। मां महागौरी पवित्रता, शांति और अमोघ फल देने वाली देवी मानी जाती हैं। इस वर्ष महाअष्टमी का पावन पर्व 26 मार्च 2026 को अत्यंत श्रद्धा के साथ मनाया जाएगा। मान्यता है कि अष्टमी के दिन मां की सच्चे मन से की गई उपासना साधक के जन्म-जन्मांतर के पापों को नष्ट कर देती है और जीवन में सुख-समृद्धि का संचार करती है।
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मां महागौरी का स्वरूप और पौराणिक कथा

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, मां पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए हजारों वर्षों तक कठिन तपस्या की थी। इस कठोर तप के कारण उनका शरीर काला पड़ गया था। जब भगवान शिव उनकी तपस्या से प्रसन्न हुए, तब उन्होंने मां को गंगाजल से स्नान कराया। गंगाजल के स्पर्श से मां का शरीर बिजली के समान देदीप्यमान और अत्यंत गौर वर्ण का हो गया। इसी कारण उन्हें ‘महागौरी’ के नाम से पुकारा जाने लगा। उनका वाहन वृषभ (बैल) है और उनके चार हाथ हैं, जो अभय और वरद मुद्रा में रहते हैं।
शुभ मुहूर्त और विशेष समय
अष्टमी के दिन विशेषकर कन्या पूजन और संधि पूजा का विधान है। इस वर्ष पूजा के लिए निम्नलिखित समय अत्यंत फलदायी रहेंगे:
प्रातः कालीन पूजा: सुबह 06:19 बजे से 08:40 बजे तक का समय देवी की आराधना के लिए श्रेष्ठ है।
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:02 बजे से 12:51 बजे तक। यदि आप कन्या पूजन करना चाहते हैं, तो यह समय सर्वोत्तम माना गया है।
संधि पूजा: अष्टमी समाप्त होने और नवमी शुरू होने के संधिकाल में की जाने वाली विशेष पूजा का भी अपना आध्यात्मिक महत्व है।
कैसे प्रसन्न करें मां महागौरी को?
मां महागौरी को सफेद रंग और नारियल अत्यंत प्रिय है। पूजा की शुरुआत इस प्रकार करें:
वस्त्र चुनाव: अष्टमी के दिन साधक को सफेद या हल्के गुलाबी रंग के वस्त्र धारण करने चाहिए।
स्नान और श्रृंगार: मां की प्रतिमा या तस्वीर को गंगाजल से पवित्र करें। उन्हें सफेद फूल, अक्षत, सिंदूर और चंदन अर्पित करें।
विशेष भोग: मां महागौरी को नारियल या नारियल से बनी मिठाइयों का भोग लगाना बहुत शुभ माना जाता है।
मंत्र जाप: पूजा के दौरान “ॐ देवी महागौर्यै नमः” मंत्र का निरंतर जाप करें। यह मंत्र मानसिक शांति और एकाग्रता प्रदान करता है।
कन्या पूजन का महत्व और विधि
अष्टमी के दिन कन्या पूजन के बिना नवरात्रि अधूरी मानी जाती है। इसमें 2 से 10 वर्ष तक की कन्याओं को ‘साक्षात देवी’ का रूप मानकर पूजा जाता है—
सबसे पहले कन्याओं के पैर धोकर उन्हें आसन पर बिठाएं। उन्हें कुमकुम का तिलक लगाएं और कलावा बांधें। भोजन में विशेष रूप से हलवा, पूरी और काले चने खिलाएं। भोजन के पश्चात अपनी सामर्थ्य अनुसार दक्षिणा या उपहार देकर उनके पैर छुएं और आशीर्वाद लें।
आध्यात्मिक लाभ और फल
मां महागौरी की भक्ति व्यक्ति के भीतर के क्रोध, ईर्ष्या और नकारात्मकता को समाप्त कर देती है। जब हम निस्वार्थ भाव से कन्याओं की सेवा करते हैं और मां की आरती करते हैं, तो घर के क्लेश दूर होते हैं और पारिवारिक संबंधों में मधुरता आती है। महाअष्टमी की शाम को मां के चरणों में दीप प्रज्वलित कर अपनी गलतियों के लिए क्षमा मांगें। मां की कृपा आपके जीवन के हर अंधकार को मिटाकर उसे सौभाग्य और उज्ज्वल प्रकाश से भर देगी।
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Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां पौराणिक कथाओं,धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। खबर में दी जानकारी पर विश्वास व्यक्ति की अपनी सूझ-बूझ और विवेक पर निर्भर करता है। प्राइम टीवी इंडिया इस पर दावा नहीं करता है ना ही किसी बात पर सत्यता का प्रमाण देता है।









