Chaitra Navratri 2026: कन्या पूजा में भूलकर भी न करें कोई गलती, अभी नोट करें पूजन सामग्री लिस्ट

चैत्र नवरात्रि की महाअष्टमी (26 मार्च 2026) और नवमी पर कन्या पूजन का विशेष आध्यात्मिक महत्व है, जिसे साक्षात मां दुर्गा की प्रसन्नता का मार्ग माना जाता है।

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

मार्च 26, 2026

Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्रि का पर्व नौ दिनों तक चलता है। इस दौरान मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। सातवें दिन के बाद आठवीं तिथि को महाअष्टमी और नौवीं तिथि को महानवमी मनाई जाती है। इन दोनों दिनों का विशेष महत्व है क्योंकि इसी समय कन्या पूजन किया जाता है। इस साल महाअष्टमी 26 मार्च और महानवमी 27 मार्च को पड़ रही है।

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कन्या पूजन का महत्व

Chaitra Navratri 2026
कन्या पूजा में भूलकर भी न करें कोई गलती

कन्या पूजन नवरात्रि का सबसे महत्वपूर्ण अनुष्ठान माना जाता है। इसमें 2 से 10 वर्ष की आयु की नौ छोटी कन्याओं और एक बालक का पूजन किया जाता है। कन्याओं को देवी स्वरूप मानकर उन्हें सम्मानपूर्वक भोजन कराया जाता है और उनके आशीर्वाद से घर में सुख-समृद्धि आती है।

कन्या पूजन की सामग्री

कन्या पूजन से पहले आवश्यक सामग्री जुटाना जरूरी है।

स्वच्छ जल (पैर धोने के लिए)

साफ कपड़ा (पैर पोंछने के लिए)

आसन (कन्याओं को बैठाने के लिए)

थाली में रोली और अक्षत (तिलक व चढ़ाने के लिए)

कलावा (हाथ में बांधने के लिए)

चुन्नी (कन्याओं को ओढ़ाने के लिए)

फल

भोजन के लिए हलवा, पूरी और चना

कन्या पूजन विधि

सबसे पहले मां दुर्गा की पूजा और हवन करें।

2 से 10 वर्ष की नौ कन्याओं और एक बालक को आमंत्रित करें।

उनके पैर धोकर साफ आसन पर बैठाएं।

तिलक लगाकर अक्षत चढ़ाएं और हाथ में कलावा बांधें।

आरती करने के बाद उन्हें हलवा, पूरी और चने का भोग खिलाएं।

अंत में कन्याओं को चुनरी और कुछ राशि भेंट करें।

उनके चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लें।

कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त

पंचांग के अनुसार महाअष्टमी के दिन कन्या पूजन के लिए तीन शुभ समय रहेंगे:

प्रथम मुहूर्त: सुबह 06:16 से 07:48 बजे तक

द्वितीय मुहूर्त: सुबह 10:56 से दोपहर 02:01 बजे तक

अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:02 से 12:52 बजे तक

चैत्र नवरात्रि में कन्या पूजन का विशेष महत्व है। सही विधि और सामग्री के साथ किया गया पूजन न केवल धार्मिक आस्था को पूर्ण करता है बल्कि घर-परिवार में सुख, शांति और समृद्धि भी लाता है। इस बार महाअष्टमी और महानवमी पर कन्या पूजन का आयोजन भक्तों के लिए शुभ फलदायी रहेगा।

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