CG Legal Metrology Registration : छत्तीसगढ़ में लीगल मेट्रोलॉजी बदली, कारोबारियों के लिए आया बड़ा ऑनलाइन नया नियम

छत्तीसगढ़ में लीगल मेट्रोलॉजी व्यवस्था में बड़ा बदलाव, लाइसेंस की जगह अब ऑनलाइन पंजीयन प्रमाणपत्र मिलेगा, निर्माता, सुधारक और विक्रेताओं के लिए प्रक्रिया होगी आसान, लेकिन नए नियम में आवेदन कैसे होगा, किन दस्तावेजों की जरूरत पड़ेगी और कारोबारियों को क्या फायदा मिलेगा, जानिए पूरी जानकारी और महत्वपूर्ण अपडेट यहां

CG Legal Metrology Registration

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

सितम्बर 4, 2026

CG Legal Metrology Registration: छत्तीसगढ़ सरकार ने विधिक माप विज्ञान यानी Legal Metrology व्यवस्था को अधिक सरल, पारदर्शी और डिजिटल बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने छत्तीसगढ़ विधिक माप विज्ञान (प्रवर्तन) नियम, 2011 में संशोधन किया है। नए प्रावधानों के तहत बाट और माप के निर्माता, सुधारक तथा विक्रेताओं के लिए पहले लागू लाइसेंस आधारित व्यवस्था को समाप्त कर दिया गया है। अब इनके लिए पंजीयन प्रमाण-पत्र की नई व्यवस्था लागू होगी।

लाइसेंस की जगह अब पंजीयन प्रमाण-पत्र

संशोधित नियमों के अनुसार, निर्माताओं, सुधारकों और विक्रेताओं को अब लाइसेंस हासिल करने की पुरानी प्रक्रिया से नहीं गुजरना होगा। इसके स्थान पर उन्हें विभागीय पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन करना होगा। पंजीयन की प्रक्रिया स्व-घोषणा यानी Self Declaration के आधार पर पूरी की जाएगी। इससे कारोबार शुरू करने या संचालित करने में लगने वाले समय और कागजी प्रक्रिया को कम करने में मदद मिलेगी।

फिजिकल इंस्पेक्शन की अनिवार्यता समाप्त

नई व्यवस्था की सबसे अहम विशेषताओं में से एक पंजीयन प्रमाण-पत्र जारी करने से पहले होने वाले भौतिक निरीक्षण की अनिवार्यता खत्म करना है। अब निर्धारित प्रारूप में ऑनलाइन स्व-घोषणा प्रस्तुत करने के आधार पर पंजीयन प्रमाण-पत्र जारी किया जा सकेगा। इससे संबंधित कारोबारियों को विभागीय कार्यालयों के चक्कर लगाने और प्रारंभिक निरीक्षण के लिए लंबा इंतजार करने की जरूरत कम होगी।

पंजीयन में बदलाव भी ऑनलाइन होंगे

सरकार ने पंजीयन प्रमाण-पत्र में संशोधन या अतिरिक्त जानकारी दर्ज कराने की प्रक्रिया को भी डिजिटल कर दिया है। पंजीयनधारी इसके लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। इसके साथ ही सभी पंजीकृत निर्माता, सुधारक और विक्रेताओं का ऑनलाइन डेटाबेस तैयार किया जाएगा। पंजीयन प्रमाण-पत्र स्थायी रूप से वैध रहेगा और सामान्य परिस्थितियों में इसके नवीनीकरण की आवश्यकता नहीं होगी।

दूसरे राज्य में इस्तेमाल होने वाले बाट-माप को राहत

व्यवसाय सुगमता को बढ़ावा देने के लिए नियमों में एक महत्वपूर्ण प्रावधान जोड़ा गया है। यदि किसी निर्माता द्वारा तैयार किए गए बाट या माप का इस्तेमाल दूसरे राज्य में किया जा रहा है और उसमें मरम्मत की जरूरत पड़ती है, तो अब अलग से सुधारक पंजीयन प्रमाण-पत्र लेना जरूरी नहीं होगा। निर्माता को संबंधित विधिक माप विज्ञान अधिकारी को मरम्मत की पूर्व सूचना देना पर्याप्त होगा।

गलत जानकारी पर पंजीयन हो सकता है रद्द

नई व्यवस्था में पंजीयन निरस्त करने के नियमों को भी स्पष्ट किया गया है। यदि पंजीयन के दौरान दी गई जानकारी जांच में गलत, भ्रामक या तथ्यहीन पाई जाती है, तो कार्रवाई की जा सकती है। इसके अलावा अधिनियम या संबंधित नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर भी पंजीयन प्रमाण-पत्र रद्द किया जा सकता है। हालांकि, अंतिम कार्रवाई से पहले संबंधित पंजीयनधारी को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाएगा।

सुधार और शमन प्रक्रिया भी होगी डिजिटल

नियमों में उल्लंघन की स्थिति में जारी होने वाली सुधार सूचना और शमन सूचना की प्रक्रिया को भी इलेक्ट्रॉनिक बनाया गया है। निर्धारित प्रारूप के अनुसार संबंधित व्यक्ति को इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से सुधार सूचना भेजी जा सकेगी। यदि निर्धारित समय के भीतर कमियों को दूर नहीं किया जाता है, तो नियमों के तहत अभियोजन, अपराध के शमन तथा पंजीयन के निलंबन या निरस्तीकरण जैसी कार्रवाई की जा सकती है।

पंजीयन के लिए निर्धारित की गई फीस

संशोधित नियमों में पंजीयन शुल्क की राशि भी तय की गई है। निर्माता के लिए पंजीयन शुल्क 50 हजार रुपये निर्धारित किया गया है। वहीं सुधारक के लिए राज्य, संभाग और जिला स्तर पर 20 हजार रुपये शुल्क तय किया गया है। पंजीयन प्रमाण-पत्र में संशोधन या अतिरिक्त प्रविष्टि कराने के लिए एक हजार रुपये शुल्क देना होगा।

उपभोक्ता सुरक्षा के नियम रहेंगे लागू

सरकार ने कारोबारियों के लिए पंजीयन प्रक्रिया भले ही आसान कर दी है, लेकिन उपभोक्ताओं के हितों से जुड़े नियमों में ढील नहीं दी गई है। पंजीयनधारियों के लिए सत्यापित और मुद्रांकित बाट-माप का इस्तेमाल करना अनिवार्य रहेगा। असत्यापित, बिना मुहर वाले या अमानक बाट-माप को बिक्री के लिए रखना प्रतिबंधित रहेगा। नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की जा सकेगी।

डिजिटल व्यवस्था से कारोबारियों को मिलेगी सुविधा

सरकार के इस संशोधन का उद्देश्य विधिक माप विज्ञान से जुड़ी प्रक्रियाओं को सरल बनाने के साथ कारोबारियों के लिए अनुपालन व्यवस्था को आसान करना है। ऑनलाइन आवेदन, स्थायी पंजीयन और डिजिटल नोटिस जैसी व्यवस्थाओं से पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद है। वहीं, उपभोक्ताओं की सुरक्षा के लिए गुणवत्ता और सत्यापन से जुड़े प्रावधान पहले की तरह लागू रहेंगे। इस तरह नई व्यवस्था में Ease of Doing Business और Consumer Protection के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की गई है।

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