Green Shipping India: सोनोवाल का बड़ा निर्देश, हरित ईंधन के लिए बंदरगाहों की तैयारी होगी तेज

भारत के समुद्री क्षेत्र में हरित बदलाव की तैयारी तेज हो गई है। केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने बंदरगाहों को वैकल्पिक ईंधन के लिए तेजी से तैयार होने के निर्देश दिए हैं। ग्रीन बंकरिंग हब और जीरो-एमिशन शिपिंग कॉरिडोर पर भी काम आगे बढ़ रहा है, लेकिन इसका असर कितना बड़ा होगा?

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

सितम्बर 4, 2026

Green Shipping India:  केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने शुक्रवार को गुरुग्राम स्थित द एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट (TERI) के ग्वाल पहाड़ी परिसर का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने भारत में ग्रीन शिपिंग से जुड़ी योजनाओं और परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। मंत्री ने समुद्री क्षेत्र से कार्बन उत्सर्जन घटाने के प्रयासों को और तेज करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत कम-कार्बन समुद्री व्यापार के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की ओर तेजी से बढ़ रहा है।

ग्रीन शिपिंग को वैश्विक जरूरत बताया

सोनोवाल ने कहा कि 2026 में ग्रीन शिपिंग अब केवल भविष्य की योजना नहीं रह गई है, बल्कि यह वैश्विक आवश्यकता बन चुकी है। समुद्री परिवहन से होने वाले कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लिए दुनियाभर में प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत इस बदलाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए प्रतिबद्ध है। बंदरगाहों को भविष्य में इस्तेमाल होने वाले स्वच्छ और वैकल्पिक ईंधनों के अनुरूप तैयार करना जरूरी है।

राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र ने प्रस्तुत की प्रगति

बैठक में ग्रीन पोर्ट्स एंड शिपिंग के लिए राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र (NCoEGPS) ने अपनी गतिविधियों, परियोजनाओं और आगामी योजनाओं की जानकारी दी। केंद्र की ओर से समुद्री क्षेत्र को कार्बन-मुक्त बनाने में मंत्रालय को दिए जा रहे तकनीकी और शोध सहयोग पर भी चर्चा हुई। इसके अलावा सरकार, शोध संस्थानों और समुद्री उद्योग के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की जरूरत को रेखांकित किया गया।

ग्रीन शिपिंग कॉरिडोर पर बढ़ा फोकस

समीक्षा बैठक में ग्रीन शिपिंग कॉरिडोर भी प्रमुख विषय रहा। रॉकी माउंटेन इंस्टीट्यूट (RMI) ने कम और शून्य उत्सर्जन वाले समुद्री कॉरिडोर विकसित करने की दिशा में किए जा रहे कार्यों की जानकारी साझा की। चर्चा के दौरान स्वच्छ समुद्री ईंधनों और आधुनिक तकनीकों को अपनाने की संभावनाओं पर भी विचार हुआ। ऐसे कॉरिडोर भविष्य में समुद्री परिवहन से होने वाले उत्सर्जन को कम करने में अहम साबित हो सकते हैं।

तीन प्रमुख बंदरगाहों में ग्रीन बंकरिंग हब

दीनदयाल पोर्ट अथॉरिटी, पारादीप पोर्ट अथॉरिटी और वी.ओ. चिदंबरनार पोर्ट अथॉरिटी ने ग्रीन फ्यूल बंकरिंग हब की तैयारियों का ब्यौरा दिया। इन बंदरगाहों पर वैकल्पिक एवं हरित समुद्री ईंधनों के भंडारण, आपूर्ति और बंकरिंग के लिए जरूरी ढांचा विकसित किया जा रहा है। इससे भविष्य में स्वच्छ ईंधन से संचालित जहाजों को बंदरगाहों पर आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

शोर पावर से घटेगा जहाजों का उत्सर्जन

कामराजार पोर्ट लिमिटेड ने शोर पावर यानी तटवर्ती विद्युत आपूर्ति व्यवस्था के बारे में जानकारी दी। पोर्ट के कोयला टर्मिनलों पर यह सुविधा उपलब्ध कराई गई है। इसके माध्यम से बंदरगाह पर खड़े जहाज अपने इंजन चलाने के बजाय सीधे तट से बिजली प्राप्त कर सकते हैं। इससे ईंधन की खपत घटाने के साथ जहाजों से होने वाले उत्सर्जन को कम करने में मदद मिलेगी।

स्वच्छ और प्रतिस्पर्धी समुद्री क्षेत्र का लक्ष्य

सोनोवाल ने कहा कि ग्रीन बंकरिंग हब, वैकल्पिक ईंधन, शोर पावर और ग्रीन शिपिंग कॉरिडोर जैसी पहल भारतीय समुद्री क्षेत्र को अधिक स्वच्छ, आधुनिक और प्रतिस्पर्धी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। उन्होंने जोर दिया कि इन योजनाओं की सफलता के लिए सरकार, बंदरगाहों, उद्योग और शोध संस्थानों को मिलकर काम करना होगा।

भविष्य के ईंधनों के लिए तैयार होंगे बंदरगाह

सरकार ऐसे समुद्री बुनियादी ढांचे के विकास पर ध्यान दे रही है, जो भविष्य में कम और शून्य उत्सर्जन वाले ईंधनों की बढ़ती मांग को पूरा कर सके। इसके तहत बंदरगाहों पर वैकल्पिक ईंधनों के भंडारण, आपूर्ति और बंकरिंग सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। साथ ही तटवर्ती बिजली जैसी तकनीकों के इस्तेमाल को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।

ग्रीन शिपिंग को मिलेगी नई गति

मंत्री का यह दौरा भारत के समुद्री क्षेत्र में स्वच्छ ऊर्जा आधारित बदलाव को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मंत्रालय प्रमुख बंदरगाहों पर ग्रीन शिपिंग कॉरिडोर और स्वच्छ ईंधन बंकरिंग क्षमता विकसित करने पर जोर दे रहा है। इन प्रयासों का उद्देश्य भारतीय समुद्री परिवहन को वैश्विक स्तर पर उत्सर्जन घटाने के लक्ष्यों के अनुरूप तैयार करना है।

हितधारकों के साथ भविष्य की रणनीति पर चर्चा

कार्यक्रम के अंत में मंत्री, मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों, बंदरगाह प्रतिनिधियों और संबंधित संस्थानों के बीच संवाद हुआ। इसमें स्वच्छ ऊर्जा, वैकल्पिक ईंधन, बंदरगाहों की तैयारियों और भविष्य के ग्रीन शिपिंग कॉरिडोर पर चर्चा की गई। सरकार का लक्ष्य इन पहलों के माध्यम से भारतीय समुद्री क्षेत्र को पर्यावरण-अनुकूल और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप विकसित करना है।

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