CEC Gyanesh Kumar: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दायर याचिका पर सोमवार सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता की ओर से उनके निलंबन और चुनाव आयोग से जुड़े कथित एकतरफा फैसलों पर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की गई थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस स्तर पर ज्ञानेश कुमार के निलंबन को लेकर कोई अंतरिम आदेश जारी करने से इनकार कर दिया।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल मीडिया या न्यूज रिपोर्ट के आधार पर कोई आदेश पारित नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि किसी रिपोर्ट में दी गई जानकारी पूरी तरह सही, आंशिक रूप से सही या गलत भी हो सकती है। ऐसे में न्यायिक आदेश जारी करने से पहले मामले के तथ्यों और संबंधित पक्षों का जवाब देखना जरूरी है।
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याचिका में SIR को भी चुनौती
आपको बता दें कि, याचिकाकर्ता राकेश कुमार सिहं की ओर से दायर याचिका में केवल CEC के खिलाफ कार्रवाई की मांग नहीं की गई है, बल्कि विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR की प्रक्रिया को भी चुनौती दी गई है। याचिका में SIR को गैरकानूनी घोषित करने और मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित करने की मांग की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि चुनाव आयोग से जुड़े कुछ फैसले अन्य चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना लिए गए। इस पूरे मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग के कामकाज और उसके निर्णय लेने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए गए हैं।
वकील ने चुनाव आयुक्तों के अधिकारों और संरक्षण का मुद्दा उठाया

याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने अदालत के सामने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति, अधिकारों और कानूनी संरक्षण से जुड़े प्रावधानों का मुद्दा उठाया। उन्होंने 2023 में कानून में किए गए बदलावों का उल्लेख करते हुए कहा कि चुनाव आयोग की शक्तियों और उसके कामकाज से जुड़े प्रावधानों को नए तरीके से देखा जाना चाहिए। वकील ने यह भी दलील दी कि चुनाव आयुक्तों को उनके कार्यकाल के दौरान किए गए कामों के संबंध में व्यापक कानूनी संरक्षण हासिल है। उन्होंने इसी आधार पर CEC के निलंबन की मांग अदालत के सामने रखी।
‘आयोग का काम कैसे चलेगा?’ SC ने पूछा सवाल

सुनवाई के दौरान जब CEC को निलंबित करने की मांग रखी गई तो अदालत ने पूछा कि ऐसी स्थिति में चुनाव आयोग का कामकाज किस तरह चलेगा। इस पर याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि दो अन्य चुनाव आयुक्त आयोग का काम संभाल सकते हैं। वकील ने यह मांग भी रखी कि जब तक मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, तब तक चुनाव आयोग के महत्वपूर्ण फैसले सामूहिक या बहुमत के आधार पर लिए जाने का निर्देश दिया जाए। अदालत ने इस पर कहा कि आयोग को कानून के दायरे में रहकर ही काम करना होगा।
सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने मामले में केंद्र सरकार, तीनों चुनाव आयुक्तों, कैबिनेट सचिव, वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त मनीष गर्ग और आईटी प्रमुख सीमा खन्ना को नोटिस जारी किया है। अदालत संबंधित पक्षों से जवाब चाहती है, जिसके बाद मामले पर आगे सुनवाई होगी। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि यदि बाद में किसी निर्णय या कार्रवाई में कानूनी खामी सामने आती है, तो अदालत उस पर हस्तक्षेप कर सकती है और जरूरत पड़ने पर संबंधित फैसले को रद्द भी कर सकती है। फिलहाल कोर्ट ने न्यूज रिपोर्ट को अंतिम आधार मानकर CEC के खिलाफ कोई अंतरिम आदेश जारी नहीं किया है।










