CBSE Fee Hike Controversy : बच्चों की जेब पर सरकारी डाका! जानिए राहुल गांधी ने क्यों खोला सीधा मोर्चा

CBSE School Fee Hike Controversy Updates: देश भर के सीबीएसई स्कूलों में फीस की बेतहाशा बढ़ोतरी को लेकर अभिभावकों के बाद अब विपक्षी दलों ने भी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है! कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इसे 'मध्यम वर्ग की जेब पर सरकारी डाका' बताते हुए केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया है। जानिए क्या है इस बड़े विवाद की पूरी इनसाइड स्टोरी।

CBSE Fee Hike Controversy

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जून 1, 2026

CBSE Fee Hike Controversy : लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद राहुल गांधी ने हाल ही में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की कक्षा 12वीं की परीक्षा देने वाले कुछ छात्रों से मुलाकात की। ये वे छात्र थे जिन्होंने बोर्ड परीक्षा में मिले अपने अंकों और मूल्यांकन प्रक्रिया की विधिक प्रामाणिकता पर गंभीर सवाल उठाए थे। इस मुलाकात के दौरान विपक्ष के नेता ने छात्रों से पुनर्मूल्यांकन (Re-evaluation) के दौरान कथित तौर पर पाई गई तकनीकी और मानवीय कमियों पर विस्तार से चर्चा की। इस पूरी बातचीत का एक वीडियो राहुल गांधी ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर साझा करते हुए पीड़ित छात्रों की मांगों का खुलकर समर्थन किया है।

पुनर्मूल्यांकन की भारी-भरकम फीस को लेकर बोर्ड पर तीखा हमला

साझा किए गए वीडियो में छात्रों ने राहुल गांधी को सीबीएसई की पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया से जुड़ी विधिक और प्रशासनिक जानकारियों से अवगत कराया। छात्रों ने बताया कि प्रति पेपर दोबारा जांच कराने के लिए उन्हें कितनी भारी-भरकम फीस चुकानी पड़ती है। इस बातचीत के आधार पर राहुल गांधी ने सीबीएसई के विधिक ढांचे पर सवाल खड़े किए। उन्होंने पुनर्मूल्यांकन फीस की दरों को अनुचित बताते हुए अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, “जेबकतरों से सावधान – आज वो सीबीएसई के अंदर बैठे हैं। सीबीएसई की गलती से अगर नंबर गलत आए, तो छात्र को बदले में क्या मिलता है? सिर्फ एक भारी बिल: डिजिटल स्कैन कॉपी के लिए ₹100 प्रति विषय, री-टोटलिंग के लिए ₹100 प्रति पेपर और री-इवैल्युएशन के लिए ₹25 प्रति सवाल।”

शिक्षा को सेवा की जगह कारोबार बनाने का लगाया बड़ा आरोप

राहुल गांधी ने शिक्षा व्यवस्था पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि अपनी ही उत्तर पुस्तिका (आंसर शीट) की सही जांच सुनिश्चित कराने के लिए एक सामान्य बच्चे को ₹2000 तक की बड़ी रकम भरनी पड़ रही है। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए सवाल उठाया कि जब देश भर के करीब 4 लाख बच्चों ने इस तरह के सुधार के लिए आवेदन डाले हैं, तो सीबीएसई इसके जरिए कितनी बड़ी कमाई कर रहा है, यह सोचने वाली बात है। उन्होंने ओएसएम (ऑन-स्क्रीन मार्किंग) प्रणाली पर तंज कसते हुए कहा कि जब स्कैनिंग फोन या साधारण उपकरणों से की जा रही हो, तो गलत मार्किंग होना तय है और इस प्रशासनिक गलती को ठीक करवाने की आर्थिक कीमत मासूम बच्चों को चुकानी पड़ रही है।

गलती बोर्ड की और सजा बच्चों को मिलने पर जताई आपत्ति

कांग्रेस सांसद ने सरकार की नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि विधिक रूप से गलती सीबीएसई की होती है, लेकिन उसकी मानसिक और आर्थिक सजा छात्रों को भुगतनी पड़ती है, जबकि इस पूरी प्रक्रिया में वित्तीय कमाई सरकार की हो रही है। उन्होंने बेहद कड़े शब्दों में कहा कि जब देश में शिक्षा को एक पवित्र सेवा न मानकर विशुद्ध कारोबार बना दिया जाता है, तब गलतियां सुधारी नहीं जातीं, बल्कि उन्हें जानबूझकर बढ़ाया जाता है। राहुल गांधी के अनुसार, इसकी सबसे बड़ी और दर्दनाक कीमत हमारे देश के बच्चे चुका रहे हैं – अपने कीमती समय से, अपने मानसिक आत्मविश्वास से और अपने सुनहरे भविष्य से।

वायरल पोस्ट वाले छात्र वेदांत श्रीवास्तव ने बयां किया अपना दर्द

इस विशेष चर्चा में कक्षा 12वीं के प्रतिभावान छात्र वेदांत श्रीवास्तव भी मुख्य रूप से शामिल थे। वेदांत की एक सोशल मीडिया पोस्ट हाल ही में तब जबरदस्त वायरल हो गई थी, जब उन्होंने सीबीएसई की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली के तहत खुद को मिली एक बेहद त्रुटिपूर्ण उत्तर पुस्तिका को सार्वजनिक किया था। इस बातचीत के दौरान वेदांत ने राहुल गांधी को बताया कि जब उन्होंने इस व्यवस्था के खिलाफ आवाज उठाई, तो सोशल मीडिया पर उन्हें ट्रोल किया गया और कथित तौर पर राष्ट्र-विरोधी, डीप स्टेट एजेंट और पाकिस्तानी तक कह दिया गया। इस पर राहुल गांधी ने मजाकिया लहजे में उन्हें ‘सोरस एजेंट’ कहकर ढाढस बंधाया।

प्रतिभाशाली युवाओं को अपमान के बजाय न्याय देने की मांग

राहुल गांधी ने छात्रों के साहस की सराहना करते हुए अपने अगले ट्वीट में लिखा, “मेरे साथी राष्ट्र-विरोधी सोरोस एजेंटों के साथ एक बेहद दिलचस्प और ज्ञानवर्धक बातचीत। वेदांत और उसके सभी दोस्त बेहद प्रतिभाशाली और साहसी युवा भारतीय हैं, जिन्होंने सीबीएसई और मोदी सरकार से बेहद सरल और वाजिब प्रश्न पूछे थे – लेकिन उन्हें विधिक उत्तरों के बजाय केवल सोशल मीडिया पर अपमान मिला। ये बच्चे देश के गौरव हैं और एक उज्ज्वल तथा सुरक्षित भविष्य के पूरी तरह हकदार हैं। हम यह सुनिश्चित करेंगे कि उन्हें हर हाल में उनका विधिक अधिकार और न्याय मिले।”

उत्तर पुस्तिकाओं में हेरफेर और विधिक लापरवाही का गंभीर आरोप

मुलाकात के दौरान छात्र वेदांत और उनके साथियों ने दावा किया कि परिणामों में विसंगति को लेकर सवाल उठाने के बाद उन्हें बदनाम करने की एक सुनियोजित कोशिश की गई। छात्रों के अनुसार, जब उन्होंने पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया के विधिक नियमों के तहत अपनी उत्तर पुस्तिकाओं की फोटोकॉपी मंगवाई, तो उसमें कई चौंकाने वाली गड़बड़ियां और विसंगतियां दिखाई दीं। वेदांत ने बताया कि उत्तर पुस्तिका का कवर पेज तो उनका था और वे अपनी लिखावट को अच्छी तरह पहचान सकते थे, लेकिन अंदर के कुछ पन्नों पर लिखी गई सामग्री और लिखावट उनकी नहीं लग रही थी।

छात्रों का यह भी गंभीर आरोप है कि कुछ महत्वपूर्ण उत्तरों का तो मूल्यांकन ही नहीं किया गया और कई बिल्कुल सही जवाबों को भी अपेक्षा से बेहद कम अंक दिए गए। छात्रों ने स्पष्ट किया कि उन्होंने इस मुद्दे को लेकर कई बार सीबीएसई और संबंधित उच्च अधिकारियों से विधिक संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन उन्हें कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला, बल्कि उन पर व्यवस्था को अस्थिर करने के झूठे आरोप मढ़ दिए गए।

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