बरेली में टंकी गिरने की वजह आया सामने, नदी के तेज कटान से हुआ हादसा; निर्माण में नहीं थी लापरवाही

बरेली में टंकी गिरने का प्रमुख कारण नदी का तेज कटान, निर्माण में नहीं हुई कोई लापरवाही ओवरहेड टैंक गिरने पर सामने आई जल निगम ग्रामीण की रिपोर्ट निर्माण के वक्त 150 मीटर दूर थी किच्छा नदी, बाद में बदली धारा से पहुंचा नुकसान तीन मीटर गहरी नींव के आस-पास बह गई थी मिट्टी, तेज कटान से गिरी निर्माणाधीन टंकी जल निगम की रिपोर्ट में खुलासा, गुणवत्ता नहीं प्राकृतिक परिस्थितियां बनीं टंकी गिरने की वजह लखनऊ/बरेली शेरगढ़ विकासखंड के ग्राम बैरमनगर में जल जीवन मिशन के अंतर्गत निर्माणाधीन ओवरहेड टैंक गिरने की घटना के पीछे जल निगम (ग्रामीण) की रिपोर्ट

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Published On :

सितम्बर 10, 2026

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बरेली में टंकी गिरने का प्रमुख कारण नदी का तेज कटान, निर्माण में नहीं हुई कोई लापरवाही

ओवरहेड टैंक गिरने पर सामने आई जल निगम ग्रामीण की रिपोर्ट

निर्माण के वक्त 150 मीटर दूर थी किच्छा नदी, बाद में बदली धारा से पहुंचा नुकसान

तीन मीटर गहरी नींव के आस-पास बह गई थी मिट्टी, तेज कटान से गिरी निर्माणाधीन टंकी

जल निगम की रिपोर्ट में खुलासा, गुणवत्ता नहीं प्राकृतिक परिस्थितियां बनीं टंकी गिरने की वजह

लखनऊ/बरेली
शेरगढ़ विकासखंड के ग्राम बैरमनगर में जल जीवन मिशन के अंतर्गत निर्माणाधीन ओवरहेड टैंक गिरने की घटना के पीछे जल निगम (ग्रामीण) की रिपोर्ट में निर्माण गुणवत्ता की कमी नहीं, बल्कि अत्यधिक जलप्रवाह और किच्छा नदी के तेज कटान को प्रमुख कारण बताया गया है। विभाग की गहन रिपोर्ट के मुताबिक निर्माण के समय टैंक स्थल नदी से करीब 150 मीटर दूर था। साथ ही यह फ्लड जोन में भी शामिल नहीं था। मिट्टी का परीक्षण कराकर स्वीकृत ड्राइंग-डिजाइन एवं निर्धारित मानकों के अनुरूप निर्माण कराया जा रहा था।

रिपोर्ट के मुताबिक पिछले सप्ताह अत्यधिक बारिश और संभवतः गौला बैराज से अधिक पानी छोड़े जाने के बाद नदी का जलप्रवाह अचानक बढ़ा। इसके चलते नदी की धारा बदली और महज 3-4 दिनों में तेजी से कटान करते हुए पानी टैंक परिसर के किनारे तक पहुंच गया। जल निगम ने सुरक्षा के लिए सैंड बैग और पिचिंग की व्यवस्था की, लेकिन पानी का बहाव अधिक और गहरा होने के कारण कटान रोकने की स्थायी व्यवस्था तत्काल संभव नहीं हो सकी।

नींव के आस-पास की मिट्टी बही
तेज कटान से टैंक की करीब तीन मीटर गहरी नींव के आस-पास की मिट्टी बह गई, जिससे नींव का धरातलीय सहारा कमजोर हुआ और एक तरफ झुक गया। इसी वजह से 8 सितंबर को आंशिक रूप से निर्मित टैंक अस्थिर होकर नदी में गिर गया। रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि निर्माण सामग्री व गुणवत्ता में कोई कमी नहीं थी। निर्माण के बाद नदी की धारा और तटरेखा में आया असामान्य बदलाव व प्राकृतिक परिस्थितियों से उत्पन्न तेज कटान इस घटना की प्रमुख वजह रही।

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