Jairam Ramesh: आरक्षण को लेकर जारी बहस के बीच कांग्रेस ने एक बार फिर जाति जनगणना का मुद्दा जोर-शोर से उठाया है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि सरकार जिस तरीके से जाति जनगणना कराने की तैयारी कर रही है, उससे सामाजिक न्याय का उद्देश्य पूरा नहीं होगा। उन्होंने इसे लेकर सरकार से प्रक्रिया में बदलाव की मांग की है।
जाति जनगणना पर कांग्रेस का आरोप, सरकार पर साधा निशाना
जयराम रमेश ने कहा कि मौजूदा तरीके से होने वाली जाति जनगणना को सही अर्थों में जातिगत जनगणना नहीं कहा जा सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि अगर जातियों की वास्तविक और सटीक संख्या सामने नहीं आएगी तो सामाजिक न्याय से जुड़ी नीतियों को मजबूत आधार नहीं मिल पाएगा।
‘जाति जनगणना नहीं, धोखा और विश्वासघात’
कांग्रेस नेता ने सरकार से मौजूदा प्रक्रिया को रद्द करने की मांग करते हुए कहा कि जाति जनगणना को पारदर्शी और वैज्ञानिक तरीके से कराया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान व्यवस्था सामाजिक न्याय के उद्देश्य को पूरा करने में सक्षम नहीं होगी और इसे लेकर लोगों के साथ धोखा होने की आशंका है।
बिहार और तेलंगाना मॉडल लागू करने की मांग
जयराम रमेश ने सुझाव दिया कि जाति जनगणना के लिए बिहार और तेलंगाना में अपनाए गए तरीकों का अध्ययन किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिन राज्यों में जातिगत आंकड़े जुटाने के लिए अलग प्रक्रिया अपनाई गई है, उसके अनुभवों को राष्ट्रीय स्तर पर लागू करने पर विचार होना चाहिए।
विशेषज्ञों से चर्चा और सर्वदलीय बैठक की मांग
कांग्रेस महासचिव ने केंद्र सरकार से विशेषज्ञों से सलाह लेने और सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की। उन्होंने कहा कि जाति जनगणना जैसे महत्वपूर्ण विषय पर सभी राजनीतिक दलों और विशेषज्ञों के साथ चर्चा होनी चाहिए। उनके मुताबिक, अगर सरकार सामाजिक न्याय को लेकर गंभीर है तो उसे प्रक्रिया को लेकर व्यापक सहमति बनानी चाहिए।
आरक्षण व्यवस्था से जाति जनगणना का संबंध
जयराम रमेश ने आरक्षण और जातिगत आंकड़ों के बीच संबंध का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि आरक्षण की व्यवस्था जनसंख्या से जुड़ी हुई है और इसके लिए सही आंकड़े जरूरी हैं। उनके अनुसार, यदि जातियों की संख्या का सही आकलन नहीं होगा तो आरक्षण से जुड़ी व्यवस्था को मजबूत आधार देना मुश्किल होगा।
कांग्रेस ने बताया आरक्षण के लिए आंकड़ों को जरूरी
कांग्रेस नेता ने कहा कि सामाजिक न्याय की नीतियां केवल राजनीतिक फैसलों के आधार पर प्रभावी नहीं हो सकतीं। इसके लिए समाज के अलग-अलग वर्गों की संख्या और उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति का सही आंकड़ा उपलब्ध होना आवश्यक है। इसी आधार पर नीतियों और योजनाओं को बेहतर तरीके से तैयार किया जा सकता है।
जाति जनगणना पर PM मोदी को कांग्रेस के पत्रों का जिक्र
जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कांग्रेस की ओर से भेजे गए पत्रों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि 20 अगस्त को कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे तथा लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री को 21 पेज का पत्र लिखा है।
खरगे पहले भी लिख चुके हैं दो पत्र
जयराम रमेश के मुताबिक, जातिगत जनगणना के मुद्दे पर प्रधानमंत्री को कांग्रेस की ओर से यह तीसरा पत्र है। उन्होंने बताया कि इससे पहले 16 अप्रैल 2023 को मल्लिकार्जुन खरगे ने पहला पत्र लिखा था। इसके बाद 5 मई 2025 को दूसरा पत्र भेजा गया, जिसमें कांग्रेस की ओर से कुछ सुझाव भी दिए गए थे।
उन्होंने दावा किया कि इन दोनों पत्रों का अब तक कोई जवाब नहीं मिला है। कांग्रेस ने इसी आधार पर केंद्र सरकार से जाति जनगणना को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।
सही जातिगत आंकड़ों के बिना सामाजिक न्याय अधूरा: कांग्रेस
जयराम रमेश ने कहा कि सामाजिक न्याय की नीतियों को प्रभावी बनाने के लिए विश्वसनीय आंकड़े बेहद जरूरी हैं। अलग-अलग जातियों की संख्या और उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति का सही आकलन तभी संभव है, जब जनगणना में जातिगत जानकारी व्यवस्थित और स्पष्ट तरीके से दर्ज की जाए।
Open-ended सवालों पर कांग्रेस ने उठाए सवाल
कांग्रेस महासचिव ने सरकार द्वारा जातिगत जानकारी जुटाने के लिए अपनाए जा रहे open-ended प्रश्न के तरीके पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि इस तरह की व्यवस्था में जवाब अलग-अलग तरीके से दर्ज हो सकते हैं, जिससे आंकड़ों की विश्वसनीयता प्रभावित होने की आशंका है।
जयराम रमेश ने मांग की कि जाति जनगणना की प्रक्रिया को अधिक स्पष्ट, वैज्ञानिक और पारदर्शी बनाया जाए। कांग्रेस का कहना है कि सही जातिगत आंकड़े सामने आने के बाद ही सामाजिक न्याय और आरक्षण से जुड़ी नीतियों को मजबूत आधार मिल सकेगा।










