Cabinet: केंद्र सरकार ने दक्षिण भारत के दो प्रमुख राज्यों, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक के बीच कनेक्टिविटी और औद्योगिक विकास को नई रफ्तार देने के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण आर्थिक गलियारे (Economic Corridor) के विकास को आधिकारिक मंजूरी दे दी है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने प्रेस को जानकारी देते हुए बताया कि इस महत्वाकांक्षी बुनियादी ढांचा पहल के लिए कुल 4,294 करोड़ रुपये के भारी-भरकम वित्तीय निवेश को हरी झंडी दिखाई गई है। कैबिनेट के इस ऐतिहासिक फैसले से दोनों राज्यों के बीच परिवहन सुगम होगा, व्यापारिक गतिविधियों में तेजी आएगी और क्षेत्रीय विकास को अभूतपूर्व मजबूती मिलेगी।
दो प्रमुख परियोजनाओं का विवरण और बजट आवंटन
अश्विनी वैष्णव के मुताबिक, इस वृहद योजना के तहत मुख्य रूप से दो बड़ी और परिवर्तनकारी परियोजनाओं पर युद्धस्तर पर काम किया जाएगा:
बल्लारी-गुंटकल रेलवे लाइन विस्तार (1,264 करोड़ रुपये): इस परियोजना के तहत बल्लारी और गुंटकल के बीच तीसरी और चौथी नई रेलवे लाइन का निर्माण किया जाएगा। यह रेल विस्तार क्षेत्र में माल ढुलाई (Freight) की क्षमता में भारी इजाफा करेगा।
भव्य रसायन योजना (3,030 करोड़ रुपये): औद्योगिक उत्पादन और विकास को नई ऊंचाइयां देने के लिए शुरू की जा रही इस विशेष योजना के लिए 3,030 करोड़ रुपये की भारी राशि निर्धारित की गई है, जो क्षेत्र के औद्योगिक परिदृश्य को पूरी तरह बदल देगी।
किन उद्योगों और क्षेत्रों को मिलेगा सीधा लाभ?
यह नया आर्थिक गलियारा विशेष रूप से बल्लारी-होसपेट क्षेत्र में फैले स्टील (इस्पात) और सीमेंट क्लस्टरों के लिए वरदान साबित होगा।
आसान परिवहन: भारी उद्योगों के लिए आवश्यक कच्चे माल और निर्मित उत्पादों का आवागमन अब पहले से कहीं अधिक तेज, सुरक्षित और सुगम हो जाएगा।
बंदरगाहों और पर्यटन से जुड़ाव: यह गलियारा देश के प्रमुख समुद्री बंदरगाहों और प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों तक पहुंच को बेहद आसान बनाएगा।
माल ढुलाई में भारी वृद्धि: रेलवे के इस बहु-लाइन विस्तार से हर साल 1.6 करोड़ टन अतिरिक्त माल ढुलाई संभव हो सकेगी, जिससे व्यापार और वाणिज्यिक गतिविधियों को अभूतपूर्व विस्तार मिलेगा।
परियोजना से जुड़ी 5 प्रमुख और खास बातें
कुल वित्तीय बजट: आंध्र-कर्नाटक आर्थिक कॉरिडोर के लिए केंद्र सरकार द्वारा कुल 4,294 करोड़ रुपये के निवेश को मंजूरी।
रेलवे ट्रैक विस्तार: बल्लारी-गुंटकल मार्ग पर तीसरी और चौथी लाइन के निर्माण पर 1,264 करोड़ रुपये का खर्च।
औद्योगिक प्रोत्साहन: भव्य रसायन योजना के तहत औद्योगिक गति बढ़ाने के लिए 3,030 करोड़ रुपये का आवंटन।
रोजगार सृजन: इस परियोजना के निर्माण और परिचालन के दौरान लगभग 31 लाख मानव-दिवस (Man-days) का नया रोजगार उत्पन्न होगा।
अतिरिक्त फ्रेट क्षमता: प्रति वर्ष 1.6 करोड़ टन से अधिक अतिरिक्त माल की आवाजाही सुनिश्चित की जाएगी।
पर्यावरण संरक्षण और लॉजिस्टिक लागत में भारी बचत
यह आधुनिक आर्थिक गलियारा केवल वित्तीय और व्यापारिक लाभ तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह पर्यावरण के लिहाज से भी एक मील का पत्थर साबित होगा।
कार्बन उत्सर्जन में कमी: इस परियोजना के धरातल पर उतरने से प्रति वर्ष लगभग 6.67 करोड़ किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) का उत्सर्जन कम होगा, जो कि करीब 27 लाख नए पेड़ लगाने के बराबर पर्यावरण संरक्षण का काम करेगा।
लॉजिस्टिक लागत की बचत: आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास से उद्योगों को प्रति वर्ष 149 करोड़ रुपये की लॉजिस्टिक लागत की बचत होगी। परिवहन खर्च घटने से स्थानीय उद्योगों के उत्पादों की बाजार में प्रतिस्पर्धात्मकता (Competitiveness) में भी जबरदस्त सुधार देखने को मिलेगा।
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