Bulandshahr News: पश्चिमी उत्तर प्रदेश (वेस्ट यूपी) से एक बेहद चौंकाने वाली और बड़ी खबर सामने आई है। भारतीय सुरक्षा बलों और आतंकवाद विरोधी दस्ते (ATS) ने एक बड़े ऑपरेशन के तहत पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सक्रिय पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) और आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है। इस बड़ी कार्रवाई के दौरान वेस्ट यूपी के विभिन्न जिलों से कुल 16 संदिग्ध आतंकवादियों को गिरफ्तार किया गया है, जिनका मुख्य कनेक्शन मेरठ और बुलंदशहर से जुड़ा हुआ पाया गया है।
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गृहमंत्री अमित शाह का बयान: आतंकवाद पर जीरो टॉलरेंस
इस बड़ी सफलता के बाद देश के गृहमंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर सुरक्षा बलों की सराहना की है। उन्होंने लिखा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने स्वतंत्रता दिवस से ठीक पहले पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी के नापाक नेटवर्क को तहस-नहस कर दिया है।
देशभर के 14 राज्यों में सुरक्षा बलों द्वारा चलाए गए इस विशेष अभियान के तहत 200 से अधिक ऑपरेटिव्स को गिरफ्तार किया गया है, जिससे आतंकियों के कई खतरनाक हमलों के प्लान वक्त रहते नाकाम हो गए हैं। यह कार्रवाई आतंकवाद के प्रति भारत की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति की एक शानदार मिसाल पेश करती है।
वेस्ट यूपी कैसे बना आतंकियों के निशाने पर?
एटीएस और सिविल पुलिस की पिछले सात महीनों की संयुक्त कार्रवाई में यह खुलासा हुआ है कि पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी और सरफराज डोगरा के निशाने पर विशेष रूप से वेस्ट यूपी रहा है। इस दौरान हापुड़, गाजियाबाद, मेरठ, सहारनपुर और मुजफ्फरनगर से कुल 16 संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया है, और इन सभी के तार कहीं न कहीं मेरठ से जुड़े मिले हैं।
जांच में यह भी सामने आया है कि उमर, आजाद राजपूत और तुषार चौहान जैसे स्थानीय युवक इन आतंकवादियों के झांसे में आकर इनके लिए काम कर रहे थे। चौंकाने वाली बात यह है कि आरोपी तुषार चौहान ने इनके प्रभाव में आकर अपना नाम तक बदल लिया था। एटीएस का मानना है कि मुख्य आरोपी मोहम्मद जफर की गिरफ्तारी के बाद भी यह सिलसिला थमा नहीं है और इससे जुड़े अन्य स्लीपर सेल की तलाश की जा रही है।
बुलंदशहर के मदरसे से निकला जफर का कनेक्शन
पकड़े गए संदिग्ध आतंकी मोहम्मद जफर का सीधा कनेक्शन बुलंदशहर के एक मदरसे से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है। जांच में खुलासा हुआ है कि बुलंदशहर के एक मदरसे में रहने वाले उसके परिचित ने ही साल 2017 में जफर को पढ़ाई के सिलसिले में मेरठ बुलाया था। एटीएस अब जफर के उन तमाम रिश्तेदारों और परिचितों की कुंडली खंगाल रही है, जो वेस्ट यूपी में रहकर जैश-ए-मोहम्मद के लिए काम कर रहे थे।
कैसे खुला जफर का राज? पाकिस्तान भागने की थी फिराक में
एटीएस ने शुरुआती कार्रवाई में जफर को हापुड़ के शेरपुर स्थित एक मस्जिद से हिरासत में लिया था, लेकिन उस समय पर्याप्त साक्ष्य न मिलने पर उसे छोड़ दिया गया था। हालांकि, उसके पास से बरामद दस्तावेज उर्दू में थे। जब इन दस्तावेजों की जांच उर्दू अनुवादक से कराई गई, तब उसकी खतरनाक सच्चाई सामने आई। पता चला कि जफर बाकायदा चंदा एकत्र कर जैश-ए-मोहम्मद को फंडिंग कर रहा था।
इसके बाद एटीएस ने उसे दोबारा धर दबोचा। पूछताछ में यह भी खुलासा हुआ है कि जफर ने फर्जी या अन्य माध्यमों से बिहार से अपना पासपोर्ट बनवा लिया था और वह जल्द ही पाकिस्तान जाने की योजना बना रहा था। उसने जैश-ए-मोहम्मद के संस्थापक मसूद अजहर के साथ मीटिंग भी फिक्स कर ली थी। पुलिस अब उसके पासपोर्ट को रद्द करने की कानूनी प्रक्रिया में जुटी है, ताकि इस खतरनाक नेटवर्क के बाकी मोहरों को भी बेनकाब किया जा सके।










