
पीएम मोदी ने वैश्विक दक्षिण के विकास पर दिया जोर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में वैश्विक दक्षिण के विकास, आपसी सहयोग और तकनीकी प्रगति को प्रमुखता दी। उन्होंने कहा कि तेजी से बदलती वैश्विक परिस्थितियों के बीच विकासशील देशों के बीच सहयोग को और मजबूत करने की जरूरत है। भारत ने ब्रिक्स मंच के माध्यम से तकनीक, नवाचार और समावेशी विकास को बढ़ावा देने की दिशा में अपनी प्रतिबद्धता भी जाहिर की।
ओपन सेशन का मुख्य विषय रहा समावेशी वैश्विक विकास
इस वर्ष ब्रिक्स ओपन सेशन का विषय ‘Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability: Shaping the Future for Inclusive Global Growth’ रखा गया है। इसका उद्देश्य मजबूत अर्थव्यवस्था, नवाचार, आपसी सहयोग और टिकाऊ विकास के माध्यम से समावेशी वैश्विक वृद्धि का रास्ता तैयार करना है। सम्मेलन में इन सभी क्षेत्रों को भविष्य की वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए अहम आधार के तौर पर प्रस्तुत किया जा रहा है।

पीएम मोदी ने रखा संयुक्त स्टार्टअप फंड का प्रस्ताव
प्रधानमंत्री मोदी ने सम्मेलन के दौरान ब्रिक्स देशों के बीच सहयोग बढ़ाने के लिए एक संयुक्त स्टार्टअप फंड बनाने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा कि मौजूदा दौर तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और युवा उद्यमियों के बढ़ते प्रभाव का है। ऐसे में ब्रिक्स देशों को अपने-अपने स्टार्टअप इकोसिस्टम को एक-दूसरे से जोड़कर नवाचार को बढ़ावा देना चाहिए। प्रस्तावित फंड युवा उद्यमियों और नए इनोवेटर्स को आर्थिक मदद उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हो सकता है।
युवा इनोवेटर्स को मिल सकता है वैश्विक मंच
स्टार्टअप फंड की अवधारणा का उद्देश्य ब्रिक्स देशों के युवा उद्यमियों और नवोन्मेषकों को वित्तीय तथा तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराना है। इसके जरिए नई तकनीक विकसित करने वाले स्टार्टअप्स को ब्रिक्स के बड़े बाजारों तक पहुंच बनाने का अवसर मिल सकता है। इससे सदस्य देशों के बीच निवेश, तकनीकी साझेदारी और नए कारोबारी अवसरों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

तकनीकी सहयोग से रोजगार के नए अवसरों पर जोर
प्रधानमंत्री मोदी के प्रस्ताव में स्टार्टअप और तकनीकी नवाचार के साथ रोजगार सृजन की संभावनाओं पर भी जोर दिखाई दिया। तेजी से विकसित हो रही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल अर्थव्यवस्था युवाओं के लिए नए अवसर पैदा कर रही है। ऐसे में ब्रिक्स देशों के बीच सहयोग से स्टार्टअप्स को विस्तार देने और नई नौकरियों के अवसर पैदा करने में मदद मिल सकती है।
भारत ने सामूहिक विकास की दिशा में रखा अपना विजन
ब्रिक्स मंच पर भारत की ओर से रखे गए प्रस्ताव से तकनीक आधारित साझेदारी और सामूहिक विकास पर जोर स्पष्ट हुआ। सम्मेलन में वैश्विक चुनौतियों का सामना करने के लिए बहुपक्षीय सहयोग को मजबूत करने की आवश्यकता पर चर्चा हो रही है। नवाचार, डिजिटल परिवर्तन और टिकाऊ विकास को प्राथमिकता देकर सदस्य देश वैश्विक अर्थव्यवस्था को अधिक समावेशी और लचीला बनाने की दिशा में आगे बढ़ने का प्रयास कर रहे हैं।

ब्रिक्स के भविष्य में स्टार्टअप सहयोग बन सकता है अहम
स्टार्टअप फंड का प्रस्ताव ब्रिक्स देशों के बीच आर्थिक और तकनीकी सहयोग का नया क्षेत्र खोल सकता है। यदि इस पहल को आगे बढ़ाया जाता है, तो सदस्य देशों के स्टार्टअप्स के बीच निवेश, ज्ञान और तकनीक का आदान-प्रदान बढ़ सकता है। इससे युवा उद्यमियों को नए बाजार मिलेंगे और ब्रिक्स समूह के भीतर नवाचार आधारित आर्थिक विकास को गति मिल सकती है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने की कोशिश
नई दिल्ली में हो रहा ब्रिक्स शिखर सम्मेलन वैश्विक आर्थिक सहयोग के लिहाज से महत्वपूर्ण मंच बनकर सामने आया है। प्रधानमंत्री मोदी के संबोधन और संयुक्त स्टार्टअप फंड के प्रस्ताव ने तकनीक और युवा उद्यमिता को भविष्य के विकास से जोड़ने की दिशा दिखाई है। सम्मेलन के दौरान सहयोग, नवाचार और टिकाऊ विकास पर जोर यह संकेत देता है कि ब्रिक्स देश वैश्विक आर्थिक व्यवस्था में अपनी भूमिका को और मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं।
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