BRICS Meeting 2026 : ब्रिक्स बैठक में ईरान का अमेरिका पर तीखा प्रहार, ‘इतिहास के कूड़ेदान में जाएगी दादागिरी’

नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित ब्रिक्स बैठक में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने अमेरिका को 'घायल जानवर' और 'ढलता हुआ साम्राज्य' कहकर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में आग लगा दी है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी दादागिरी अब अंतिम सांसें ले रही है। क्या ब्रिक्स देश ईरान के इस आह्वान पर एकजुट होंगे?

BRICS Meeting 2026

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

मई 15, 2026

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BRICS Meeting 2026 :  भारत की राजधानी नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स (BRICS) देशों के विदेश मंत्रियों की महत्वपूर्ण बैठक के दौरान कूटनीतिक पारा उस समय चढ़ गया, जब ईरान ने अमेरिका की नीतियों पर कड़ा प्रहार किया। ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने अंतरराष्ट्रीय मंच से अमेरिका को सीधे तौर पर चुनौती देते हुए सदस्य देशों से एकजुट होने का आह्वान किया। अराघची ने कहा कि अब वह समय आ गया है जब पश्चिमी देशों, विशेषकर अमेरिका की ‘धौंस’ और ‘जबरदस्ती’ की राजनीति को हमेशा के लिए ‘इतिहास के कूड़ेदान’ में फेंक देना चाहिए। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब मध्य पूर्व में तनाव अपने चरम पर है और ब्रिक्स देश एक नई वैश्विक व्यवस्था की वकालत कर रहे हैं।

अमेरिका की तुलना ‘घायल जानवर’ से: अराघची का तल्ख अंदाज

बैठक को संबोधित करते हुए अराघची ने तर्क दिया कि ब्रिक्स के भीतर लगभग हर सदस्य देश ने कभी न कभी अमेरिका के अनुचित दबाव और आर्थिक शोषण का सामना किया है। उन्होंने अमेरिका की वर्तमान वैश्विक स्थिति की तुलना एक ‘घायल जानवर’ से की। ईरानी विदेश मंत्री ने कहा, “इतिहास इस बात का साक्षी है कि जब भी किसी साम्राज्य का पतन निकट होता है, तो वह अपनी हार को टालने के लिए हिंसक और अनियंत्रित हो जाता है। एक घायल जानवर मरते समय अपनी रक्षा के लिए जिस तरह हाथ-पांव मारता है और दहाड़ता है, ठीक वही स्थिति आज अमेरिका की है।” उन्होंने जोर देकर कहा कि इस वैश्विक ‘दादागिरी’ का मुकाबला केवल सामूहिक शक्ति से ही संभव है।

ब्रिक्स की बढ़ती प्रासंगिकता: भारत की अध्यक्षता में महत्वपूर्ण विमर्श

ईरानी विदेश मंत्री ने अपने संबोधन में इस बात पर खुशी जाहिर की कि आज ब्रिक्स राष्ट्र साझा चुनौतियों के कारण एक-दूसरे के पहले से कहीं अधिक करीब आ गए हैं। भारत ने 14 और 15 मई को इस दो दिवसीय मंत्रिस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की, जिसे वैश्विक कूटनीति में भारत के बढ़ते प्रभाव के रूप में देखा जा रहा है। दुनिया के शीर्ष नेताओं का इस बैठक में शामिल होना यह स्पष्ट करता है कि ब्रिक्स अब केवल एक आर्थिक समूह नहीं रह गया है, बल्कि मिडिल ईस्ट और अन्य वैश्विक संकटों को सुलझाने के लिए एक अनिवार्य मंच बन चुका है। भारत की संतुलित भूमिका ने इस मंच को अंतरराष्ट्रीय शांति के लिए एक नया केंद्र बना दिया है।

पीएम मोदी और अराघची की रणनीतिक मुलाकात: द्विपक्षीय संबंधों में नया अध्याय

ब्रिक्स के मुख्य सत्रों के समापन के बाद, गुरुवार (14 मई) को ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। यह उच्च स्तरीय बैठक रणनीतिक और आर्थिक, दोनों दृष्टिकोणों से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। भारत और ईरान के बीच इस संवाद को क्षेत्रीय सुरक्षा और व्यापारिक कनेक्टिविटी के लिहाज से एक बड़े ‘मील का पत्थर’ के रूप में देखा जा रहा है। ईरानी दूतावास ने इस मुलाकात के बाद सोशल मीडिया (X) पर अपनी आधिकारिक प्रतिक्रिया देते हुए इसे दोनों देशों के पुराने और मजबूत होते द्विपक्षीय संबंधों के लिए एक ऐतिहासिक मोड़ करार दिया।

पश्चिमी प्रभुत्व के खिलाफ एकजुटता: एक बहुध्रुवीय विश्व की ओर कदम

अराघची के बयानों और ब्रिक्स देशों की सक्रियता ने यह संदेश साफ कर दिया है कि दुनिया अब एक ‘एकध्रुवीय’ (Unipolar) व्यवस्था से निकलकर ‘बहुध्रुवीय’ (Multipolar) विश्व की ओर बढ़ रही है। ईरान ने ब्रिक्स मंच का उपयोग करके यह स्पष्ट कर दिया है कि वह अमेरिका द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों और कूटनीतिक दबाव के आगे झुकने वाला नहीं है। वहीं, भारत ने अपनी अध्यक्षता के दौरान यह सुनिश्चित किया कि ब्रिक्स के सभी सदस्य देशों की चिंताओं को सुना जाए। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बैठक के निष्कर्ष आने वाले समय में वैश्विक राजनीति की दिशा तय करेंगे और विकासशील देशों को एक मजबूत आवाज प्रदान करेंगे।

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