Braj Holi 2026: ब्रज में होली का उत्सव हर साल देश और विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए खास आकर्षण का केंद्र होता है। इस वर्ष 2026 में ब्रज में होली की तैयारियां पहले से ही शुरू हो चुकी हैं। पुलिस और प्रशासन सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पूरी तरह अलर्ट हैं और लगातार समीक्षा बैठकें कर रहे हैं, ताकि श्रद्धालु बिना किसी चिंता के होली का आनंद ले सकें।
ब्रज में होली केवल रंगों का खेल नहीं है, बल्कि यह लोक संस्कृति और धार्मिक परंपराओं का भी जीवंत प्रदर्शन है। बरसाना, नंदगांव, मथुरा, वृंदावन, गोकुल, महावन और बल्देव सहित ब्रज के कई हिस्सों में उत्सव की तैयारियां जोरों पर हैं।
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ब्रज होली का प्रमुख कार्यक्रम

ब्रज में होली के उत्सव कई दिनों तक चलेंगे और प्रत्येक दिन का आयोजन अलग-अलग आकर्षण लेकर आएगा।
21 फरवरी 2026 – ब्रज के प्रमुख संत, गुरुशरणानंद महाराज के रमनरेती आश्रम में साधु-संत और भक्त मिलकर होली खेलेंगे। यह आयोजन श्रद्धालुओं और साधु-संतों के लिए विशेष महत्व रखता है।
24 फरवरी 2026 – नंदगांव में फाग आमंत्रण आयोजित किया जाएगा। इसी दिन बरसाना में लड्डू मार होली की रंगीन परंपरा शुरू होगी, जिसमें लोग उत्साह के साथ लड्डू मारकर होली खेलते हैं।
25 फरवरी 2026 – बरसाना में लट्ठमार होली का आयोजन होगा, जो पूरे ब्रज में बेहद प्रसिद्ध है। महिलाएं लठ लेकर पुरुषों पर हंसी-मजाक के साथ होली खेलती हैं।
26 फरवरी 2026 – नंदगांव में लट्ठमार होली का आयोजन श्रद्धालुओं को देखने का अनूठा अवसर देगा।
27 फरवरी 2026 – रंगभरनी एकादशी से ब्रज में होली का उत्सव पूरे रंगीन रूप में शुरू हो जाता है। इस दिन प्रमुख मंदिरों में गुलाल उड़ाना और रंग खेलना शुरू हो जाता है।
इसी दिन श्री कृष्ण जन्मभूमि में होली का आयोजन होगा।
वृंदावन स्थित बिहारी जी मंदिर की होली में श्रद्धालुओं की भागीदारी देखने लायक होगी।
1 मार्च 2026 – मथुरा के द्वारकाधीश मंदिर और गोकुल में छड़ीमार होली का आयोजन होगा।
3 मार्च 2026 – चतुर्वेदी समाज का डोला निकलेगा और इसी दिन होलिका दहन का आयोजन होगा।
4 मार्च 2026 – सुबह 4 बजे फालेन गांव में जलती होली के बीच पंडा निकलेगा। इसके बाद संपूर्ण ब्रज में धुलेंडी होली मनाई जाएगी।
5 मार्च 2026 – दाऊजी का कपड़े फाड़ हुरंगा के साथ ब्रज में होली का रंगीन महापर्व समापन की ओर बढ़ेगा।
ब्रज होली की खासियत

ब्रज होली केवल रंग और मस्ती का उत्सव नहीं है। यह संस्कृति, परंपरा और श्रद्धा का भी मेल है। बरसाना और नंदगांव की लट्ठमार होली, वृंदावन और मथुरा के मंदिरों की होली और गोकुल की छड़ीमार होली सभी श्रद्धालुओं को धार्मिक और सांस्कृतिक अनुभव प्रदान करती हैं। इस बार होली में स्थानीय संस्कृति और लोक परंपरा को प्रमुखता दी गई है। रंगों के साथ-साथ लोक संगीत, नृत्य और धार्मिक अनुष्ठान भी देखने को मिलेंगे। प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था से श्रद्धालु निश्चिंत होकर होली के हर आयोजन में भाग ले सकते हैं।
ब्रज होली 2026 के ये कार्यक्रम न केवल श्रद्धालुओं के लिए आनंद का स्रोत होंगे, बल्कि ब्रज की संस्कृति और परंपरा को जीवित रखने में भी मदद करेंगे। अगर आप ब्रज में होली देखने का अनुभव लेना चाहते हैं, तो 21 फरवरी से लेकर 5 मार्च तक के आयोजनों में शामिल होना आपके लिए यादगार रहेगा।
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Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां पौराणिक कथाओं,धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। खबर में दी जानकारी पर विश्वास व्यक्ति की अपनी सूझ-बूझ और विवेक पर निर्भर करता है। प्राइम टीवी इंडिया इस पर दावा नहीं करता है ना ही किसी बात पर सत्यता का प्रमाण देता है।









