
UP Politics: उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव और स्वामी प्रसाद मौर्य के बीच शुरू हुई बयानबाजी अब पोस्टर वार तक पहुंच गई है। लखनऊ में कई जगह ‘बॉयकॉट अखिलेश यादव’ और ‘बॉयकॉट समाजवादी पार्टी’ के पोस्टर लगाए गए हैं। इन पोस्टरों के जरिए मौर्य समाज ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए 2027 के चुनाव में जवाब देने की बात कही है।
लखनऊ में लगे बॉयकॉट अखिलेश यादव के पोस्टर

राजधानी लखनऊ के अलग-अलग इलाकों में लगे इन पोस्टरों ने राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। पोस्टरों पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और अपनी जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य की तस्वीरें लगाई गई हैं। कुछ पोस्टरों में अखिलेश यादव की तस्वीर के ऊपर क्रॉस का निशान भी बनाया गया है।पोस्टरों पर साफ शब्दों में लिखा है कि स्वामी प्रसाद मौर्य का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इनके नीचे मौर्य, शाक्य, सैनी और कुशवाहा समाज का नाम लिखा गया है। साथ ही ‘बॉयकॉट अखिलेश यादव’ और ‘बॉयकॉट समाजवादी पार्टी’ जैसे नारे भी दिखाई दे रहे हैं।
स्वामी प्रसाद मौर्य के अपमान पर मौर्य समाज ने उठाए सवाल
लखनऊ में एक बड़ी होर्डिंग भी लगाई गई है, जिसमें समाजवादी पार्टी के समर्थकों पर स्वामी प्रसाद मौर्य के खिलाफ सोशल मीडिया पर अभद्र टिप्पणियां करने का आरोप लगाया गया है। होर्डिंग पर सवाल उठाया गया है कि अगर मौर्य समाज पीडीए का हिस्सा है, तो फिर समाज के नेता का अपमान क्यों किया जा रहा है?इसमें सोशल मीडिया पर स्वामी प्रसाद मौर्य के खिलाफ की गई कुछ टिप्पणियों को भी दिखाया गया है। साथ ही आरोप लगाया गया है कि अखिलेश यादव ने स्वामी प्रसाद मौर्य को नीचा दिखाया और उनके समर्थक सोशल मीडिया पर पूरे समाज को निशाना बना रहे हैं।
होर्डिंग के जरिए चेतावनी भी दी गई है कि इस अपमान का जवाब 2027 में असली पीडीए देगा। यानी अब यह मामला सिर्फ दो नेताओं के बीच की बयानबाजी तक सीमित नहीं दिख रहा, बल्कि इसके जरिए सामाजिक और राजनीतिक गोलबंदी का संदेश देने की कोशिश भी हो रही है।
राहुल गांधी से मुलाकात के बाद शुरू हुआ अखिलेश और स्वामी प्रसाद मौर्य के बीच विवाद
दरअसल, इस पूरे विवाद की शुरुआत तीन अक्टूबर को हुई थी। स्वामी प्रसाद मौर्य ने दिल्ली में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी से मुलाकात की थी। इस मुलाकात के बाद उन्होंने विपक्षी इंडिया गठबंधन में शामिल होने का ऐलान किया था।इसके बाद लखनऊ में जब अखिलेश यादव से प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान स्वामी प्रसाद मौर्य की इंडिया गठबंधन में एंट्री को लेकर सवाल पूछा गया, तो सपा प्रमुख नाराज हो गए। उन्होंने साफ कहा कि स्वामी प्रसाद मौर्य उनकी सीटों में शामिल नहीं हो सकते। इसके साथ ही उन्होंने कहा, ‘अवॉयड करो, इग्नोर करो।’

अखिलेश यादव का यह बयान सामने आने के बाद राजनीतिक विवाद और बढ़ गया। खासकर इसलिए क्योंकि स्वामी प्रसाद मौर्य पहले समाजवादी पार्टी में रह चुके हैं और अब अपनी अलग पार्टी के जरिए राजनीति कर रहे हैं।
अखिलेश यादव के बयान पर स्वामी प्रसाद मौर्य का पलटवार
अखिलेश यादव के बयान पर स्वामी प्रसाद मौर्य ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उनकी बातचीत कांग्रेस नेतृत्व से हुई है और अखिलेश यादव पूरे इंडिया गठबंधन नहीं हैं। मौर्य ने सवाल उठाया कि आखिर अखिलेश यादव कौन होते हैं उन्हें कोई सर्टिफिकेट देने वाले?उन्होंने साफ कहा कि अखिलेश यादव इंडिया गठबंधन की एक पार्टी के नेता हैं, पूरा गठबंधन नहीं। इस तरह दोनों नेताओं के बीच जुबानी जंग तेज हो गई।
यूपी चुनाव 2027 से पहले पोस्टर वार ने बढ़ाई सियासी हलचल
इस पूरे घटनाक्रम के बाद सोशल मीडिया पर भी स्वामी प्रसाद मौर्य को लेकर लगातार बयानबाजी देखने को मिल रही है। अब लखनऊ की सड़कों पर लगे पोस्टरों ने इस विवाद को एक नया राजनीतिक मोड़ दे दिया है।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि पीडीए यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक वर्ग की राजनीति करने वाली समाजवादी पार्टी के लिए यह विवाद कितना नुकसानदेह साबित हो सकता है? क्या मौर्य, शाक्य, सैनी और कुशवाहा समाज की नाराजगी का असर 2027 के विधानसभा चुनाव में दिखाई देगा? फिलहाल पोस्टर वार ने यूपी की सियासत में एक नई बहस जरूर छेड़ दी है।











