Board of Peace Crisis: गाजा शांति या व्यापार युद्ध? ट्रंप ने फ्रांस को दिया 200% टैरिफ का बड़ा झटका

डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों को अपने 'बोर्ड ऑफ पीस' में शामिल करने के लिए 200% वाइन टैरिफ का दांव चला है। ट्रंप ने मैक्रों का वह निजी मैसेज भी सार्वजनिक कर दिया जिसमें ग्रीनलैंड पर सवाल उठाए गए थे। क्या यह व्यापार युद्ध तीसरे विश्व युद्ध की आहट है?

Board of Peace Crisis

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जनवरी 20, 2026

Advertisements
728x90 Uttar Pradesh Police Mission Shakti Digital.jpg

Board of Peace Crisis: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों के बीच एक बार फिर राजनीतिक टकराव खुलकर सामने आ गया है। गाजा युद्ध के बाद शांति और स्थिरता के उद्देश्य से बनाए गए ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होने का निमंत्रण मैक्रों ने ठुकरा दिया। इस फैसले से नाराज ट्रंप ने फ्रांस के खिलाफ कड़े आर्थिक कदम उठाने की धमकी दे दी है। ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा कि यदि फ्रांस ने उनका साथ नहीं दिया तो वह फ्रेंच वाइन और शैंपेन पर 200 प्रतिशत तक का भारी टैरिफ लगा सकते हैं।

ट्रंप का तीखा बयान और टैरिफ की धमकी

जब ट्रंप से सवाल किया गया कि क्या मैक्रों बोर्ड ऑफ पीस में शामिल नहीं होंगे, तो उन्होंने बेहद तीखी प्रतिक्रिया दी। ट्रंप ने कहा कि वैसे भी कोई नहीं चाहता कि मैक्रों कार्यक्रम में आएं, क्योंकि वह जल्द ही सत्ता से बाहर हो सकते हैं। इसके साथ ही उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि अगर फ्रांस की वाइन और शैंपेन पर 200 प्रतिशत टैरिफ लगा दिया गया, तो शायद मैक्रों खुद आने को मजबूर हो जाएंगे। हालांकि, ट्रंप ने यह भी जोड़ा कि मैक्रों की मौजूदगी जरूरी नहीं है।

क्या है बोर्ड ऑफ पीस का उद्देश्य

बोर्ड ऑफ पीस का गठन गाजा में युद्ध के बाद शांति, पुनर्निर्माण और राजनीतिक स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए किया गया है। इस बोर्ड की अध्यक्षता खुद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कर रहे हैं। इसका मुख्य उद्देश्य गाजा में एक अस्थायी फिलिस्तीनी प्रशासन को समर्थन देना, मानवीय सहायता के वितरण का प्रबंधन करना और संघर्ष के बाद शासन व्यवस्था की निगरानी करना है। ट्रंप इसे मध्य पूर्व में अमेरिका की कूटनीतिक पहल का अहम हिस्सा मानते हैं।

वैश्विक नेताओं को भेजा गया न्योता

ट्रंप ने बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने के लिए कई बड़े वैश्विक नेताओं को आमंत्रण भेजा है। इनमें भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन शामिल हैं। हालांकि, अब तक भारत और पाकिस्तान की ओर से इस न्योते को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह बोर्ड काफी चर्चा में है और इसकी भूमिका को लेकर अलग-अलग राय सामने आ रही हैं।

मुद्दे पर अमेरिका और यूरोप आमने-सामने

फ्रांस के साथ विवाद के अलावा अमेरिका और यूरोपीय देशों के बीच ग्रीनलैंड को लेकर भी तनाव बढ़ गया है। ट्रंप ग्रीनलैंड पर अमेरिकी नियंत्रण की इच्छा जता चुके हैं, जिसका आठ यूरोपीय देशों ने खुलकर विरोध किया है। इस विरोध से नाराज होकर ट्रंप ने इन देशों पर 10 प्रतिशत टैरिफ लगाने का ऐलान किया है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी है कि जरूरत पड़ने पर इस टैरिफ को और बढ़ाया जा सकता है।

मैक्रों का निजी संदेश और बढ़ता तनाव

ट्रंप ने हाल ही में मैक्रों का एक निजी संदेश भी सार्वजनिक किया, जिसमें फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने कहा था कि वह ईरान और सीरिया जैसे मुद्दों पर ट्रंप से सहमत हैं। हालांकि, ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप की नीति उन्हें समझ नहीं आ रही है। इस संदेश के सामने आने के बाद दोनों नेताओं के बीच मतभेद और गहरे होते दिख रहे हैं। कुल मिलाकर, ट्रंप की आक्रामक टैरिफ नीति और कूटनीतिक बयानबाजी ने वैश्विक राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है।

2