
Blue Drum Murder Case: उत्तर प्रदेश के मेरठ शहर में हुए सनसनीखेज सौरभ राजपूत हत्याकांड, जिसे आमतौर पर ‘नीला ड्रम केस’ के नाम से जाना जाता है, में एक नया और बड़ा कानूनी मोड़ आ गया है। मेरठ की जिला एवं सत्र अदालत द्वारा मौत की सजा पाने वाले दोषी मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला ने निचली अदालत के इस फैसले को इलाहाबाद हाईकोर्ट में आधिकारिक तौर पर चुनौती दी है। दोनों दोषियों की ओर से उनके वकीलों ने एक संयुक्त अपील दाखिल करते हुए अदालत से दोषसिद्धि और मौत की सजा के पूरे आदेश को पूरी तरह से रद्द करने की जोरदार मांग की है। इस महत्वपूर्ण मामले पर अगले हफ्ते इलाहाबाद हाईकोर्ट की डबल बेंच में सुनवाई होने की पूरी संभावना जताई जा रही है।
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दोषियों के वकीलों द्वारा उठाए गए मुख्य कानूनी तर्क

दोषियों की ओर से हाईकोर्ट में दाखिल की गई अपील में यह मुख्य तर्क दिया गया है कि अभियोजन पक्ष उनके खिलाफ लगाए गए तमाम गंभीर आरोपों को कानूनन संदेह से परे साबित करने में पूरी तरह विफल रहा है। अपील में कहा गया है कि यह पूरा मामला मुख्य रूप से परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर ही आधारित था, लेकिन ट्रायल कोर्ट ने साक्ष्यों और स्थापित कानूनी सिद्धांतों का सही ढंग से मूल्यांकन किए बिना ही यह दोषसिद्धि का कठोर फैसला सुना दिया।
इसके अलावा, अपील में हत्या में इस्तेमाल किए गए हथियार, सीमेंट और उस नीले ड्रम की खरीद से जुड़े गवाहों के बयानों में भारी विरोधाभास होने का दावा भी किया गया है। दोषियों के वकीलों का यह भी कहना है कि खरीदारी से संबंधित कोई भी पुख्ता सीसीटीवी फुटेज या वैध रसीदें अदालत में पेश नहीं की गई थीं।

रिकवरी मेमो और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों पर तकनीकी सवाल

इस अपील में कई तकनीकी आधारों को भी प्रमुखता से उठाया गया है। इसमें कहा गया है कि पुलिस द्वारा बनाई गई बरामदगी (रिकवरी) से जुड़े दस्तावेजों पर किसी भी स्वतंत्र गवाह के हस्ताक्षर मौजूद नहीं हैं। साथ ही, वीडियोग्राफी की पूरी प्रक्रिया में कथित अनियमितताएं बरते जाने और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की प्रमाणिकता के लिए कानूनी रूप से अनिवार्य माने जाने वाले जरूरी प्रमाण पत्र उपलब्ध न कराए जाने का गंभीर मुद्दा भी उठाया गया है। दोषियों के इन्हीं बिंदुओं और तर्कों के आधार पर ट्रायल कोर्ट के फैसले को खारिज करने की गुहार लगाई गई है, जिन पर हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान विस्तार से विचार किया जाएगा।
वरिष्ठ वकीलों की टीम रखेगी पक्ष और सजा का पिछला क्रम
इलाहाबाद हाईकोर्ट में दाखिल इस अपील को आगे बढ़ाने के लिए वरिष्ठ वकीलों की एक अनुभवी टीम बनाई गई है, जिसमें वरिष्ठ वकील सुशील शुक्ला, एडवोकेट निधि त्रिवेदी, रवितेंद्र प्रताप सिंह चंदेल और संदीप कुमार दुबे के नाम शामिल हैं। इन्होंने अदालत से 30 सितंबर को पारित दोषसिद्धि के आदेश और 14 अक्टूबर को सुनाई गई मौत की सजा को तत्काल प्रभाव से निरस्त करने की गुहार लगाई है।
गौरतलब है कि मेरठ की अदालत ने इस बहुचर्चित हत्याकांड में 30 सितंबर 2026 को दोनों आरोपियों को दोषी करार दिया था। इसके बाद, 14 अक्टूबर 2026 को अदालत ने इस जघन्य अपराध को ‘विरल से विरलतम’ श्रेणी का मामला मानते हुए दोनों को फांसी की सजा सुनाई थी और साथ ही 50-50 हजार रुपये का आर्थिक जुर्माना भी लगाया था। अब सभी की निगाहें इलाहाबाद हाईकोर्ट की आगामी सुनवाई पर टिकी हुई हैं।
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