West Bengal Election 2026 : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के रुझानों ने राज्य की सियासत में एक ऐतिहासिक उलटफेर के संकेत दे दिए हैं। भारतीय जनता पार्टी (BJP) की प्रचंड बढ़त के बीच कोलकाता की सड़कों पर भगवा लहर साफ देखी जा सकती है। इसी बीच, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के आवास के बाहर से एक ऐसा वीडियो सामने आया है, जिसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। इस वीडियो में उत्साहित बीजेपी कार्यकर्ता मुख्यमंत्री के घर के ठीक बाहर नारेबाजी करते नजर आ रहे हैं, जिससे इलाके में तनावपूर्ण शांति और राजनीतिक सरगर्मी दोनों बढ़ गई है।
ममता बनर्जी के आवास के बाहर बीजेपी का शक्ति प्रदर्शन
जैसे ही चुनाव आयोग के आंकड़ों में बीजेपी ने बहुमत का आंकड़ा पार किया, कोलकाता के कालीघाट स्थित ममता बनर्जी के आवास के बाहर सुरक्षा घेरा तोड़ते हुए कुछ बीजेपी कार्यकर्ता वहां जा पहुंचे। वीडियो में देखा जा सकता है कि कार्यकर्ता हाथों में पार्टी के झंडे लिए ‘जय श्री राम’ के नारे लगा रहे हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जय-जयकार कर रहे हैं। हालांकि, मौके पर तैनात कोलकाता पुलिस के भारी बल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए कार्यकर्ताओं को वहां से खदेड़ने की कोशिश की। राहत की बात यह रही कि इस दौरान कोई बड़ी हिंसक झड़प नहीं हुई, लेकिन कार्यकर्ताओं के तेवर साफ बता रहे हैं कि बंगाल में सत्ता परिवर्तन की आहट कितनी तेज है।
राजनीतिक हथियार बना ‘जय श्री राम’ का नारा
पश्चिम बंगाल के राजनीतिक इतिहास में ‘जय श्री राम’ महज एक धार्मिक उद्घोष नहीं, बल्कि एक शक्तिशाली राजनीतिक प्रतीक बनकर उभरा है। बीजेपी ने पिछले कई वर्षों से इस नारे को ममता बनर्जी के खिलाफ एक बड़े हथियार के रूप में इस्तेमाल किया है। पार्टी का आरोप रहा है कि ममता सरकार इस नारे से चिढ़ती है और इसे सांप्रदायिक मानती है। वहीं, बीजेपी इसे बंगाल की अस्मिता और तुष्टिकरण के खिलाफ प्रतिरोध की आवाज बताती है। आज मुख्यमंत्री आवास के बाहर इसी नारे का गूंजना इस बात का प्रतीक है कि बीजेपी ने ममता बनर्जी के सबसे संवेदनशील मुद्दे पर प्रहार कर अपनी जीत का परचम लहराया है।
नारेबाजी पर ममता की पुरानी नाराजगी और चर्चित किस्से
यह पहली बार नहीं है जब ‘जय श्री राम’ के नारे ने बंगाल की राजनीति में उबाल पैदा किया हो। साल 2021 की एक घटना आज भी लोगों के जेहन में ताजा है, जब नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती के अवसर पर आयोजित एक सरकारी कार्यक्रम में मंच पर पीएम मोदी की मौजूदगी में लोगों ने यह नारा लगा दिया था। उस वक्त ममता बनर्जी इतनी आहत हुई थीं कि उन्होंने अपना भाषण देने से ही इनकार कर दिया था। उन्होंने इसे अपना अपमान करार देते हुए कहा था कि किसी को आमंत्रित कर उसे नीचा दिखाना उचित नहीं है। इसी तरह 2019 में भी अपने काफिले के सामने नारेबाजी सुन वह गाड़ी से नीचे उतरकर लोगों पर भड़क गई थीं।
गरिमा बनाम विरोध: चुनावी समर का वैचारिक टकराव
ममता बनर्जी हमेशा से यह तर्क देती रही हैं कि सरकारी और सार्वजनिक कार्यक्रमों में एक गरिमा होनी चाहिए और किसी भी राजनीतिक नारे का इस्तेमाल अपमानजनक होता है। लेकिन बीजेपी ने इस रुख को “हिंदू विरोधी” और “विशेष वर्ग को खुश करने की राजनीति” के तौर पर प्रचारित किया। 2026 के इन चुनाव रुझानों से ऐसा प्रतीत होता है कि बीजेपी का यह नैरेटिव जनता के बीच घर कर गया है। कालीघाट के बाहर जमा हुए कार्यकर्ताओं का कहना है कि वे किसी का अपमान नहीं कर रहे, बल्कि अपनी खुशी और जीत का इजहार कर रहे हैं, जो पिछले कई वर्षों के संघर्ष का परिणाम है।
बदलाव की दहलीज पर खड़ा पश्चिम बंगाल
रुझानों में बीजेपी की भारी बढ़त और टीएमसी के पिछड़ने ने यह साफ कर दिया है कि बंगाल की जनता ने इस बार ‘खेला’ कर दिया है। 15 साल के लंबे शासन के बाद ममता बनर्जी के किले में सेंध लगती दिख रही है। कालीघाट की सड़कों पर मची यह हलचल सिर्फ एक चुनावी जीत का जश्न नहीं है, बल्कि एक नए राजनीतिक युग की शुरुआत का संकेत है। प्रशासन ने अब सीएम आवास और बीजेपी मुख्यालय के आसपास सुरक्षा और कड़ी कर दी है ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोका जा सके। फिलहाल, सबकी नजरें अंतिम नतीजों पर टिकी हैं, लेकिन नारों की गूंज ने परिणाम का संदेश पहले ही दे दिया है।
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