BJP president N Amchander rao house arrest: तेलंगाना की राजनीति में उस समय हलचल मच गई जब भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष एन रामचंदर राव को रविवार को कामारेड्डी जाने से पहले उनके आवास पर ही रोक दिया गया। राव ने बताया कि शनिवार रात पुलिस ने उन्हें नजरबंद कर दिया। उनका कार्यक्रम कामारेड्डी जिले का दौरा करने का था, जहां हाल ही में हिंसा की घटनाएं सामने आई थीं।
राव का उद्देश्य बंसवाड़ा जाकर पथराव में घायल हुए लोगों से मुलाकात करना और हालात का जायजा लेना था। लेकिन पुलिस की कार्रवाई के चलते वे निर्धारित कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सके। इस घटनाक्रम ने प्रदेश की राजनीति को गरमा दिया है और भाजपा ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बताया है।
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पीड़ितों से मिलने पर रोक, सरकार पर गंभीर आरोप

एन रामचंदर राव ने आरोप लगाया कि उन्हें पीड़ितों से मिलने से रोकना इस बात का संकेत है कि राज्य की सरकार विपक्ष को जनता के बीच सक्रिय भूमिका निभाने से रोकना चाहती है। उन्होंने कहा कि अगर किसी क्षेत्र में हिंसा हुई है तो विपक्षी दलों का कर्तव्य है कि वे वहां जाकर लोगों की स्थिति समझें और उन्हें समर्थन दें।
राव ने कांग्रेस सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि आम नागरिकों की सुरक्षा को लेकर सरकार गंभीर नहीं है। उनका दावा है कि प्रशासनिक कदम राजनीतिक दबाव में उठाए जा रहे हैं। भाजपा नेताओं का कहना है कि यह कार्रवाई लोकतांत्रिक परंपराओं के विपरीत है और राजनीतिक स्वतंत्रता पर सवाल खड़े करती है।
कामारेड्डी में कैसे बढ़ा तनाव?
कामारेड्डी में तनाव उस समय बढ़ा जब भाजपा विधायक काटिपल्ली वेंकट रमण रेड्डी के कैंप कार्यालय पर हमला हुआ। भाजपा का आरोप है कि यह हमला कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा किया गया। इस घटना के बाद दोनों दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया।
बताया जा रहा है कि 20 और 21 फरवरी को भाजपा और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच हिंसक झड़पें भी हुईं। इन झड़पों की वजह सरकारी डिग्री कॉलेज की जमीन को लेकर विवाद बताया गया। जमीन के स्वामित्व और उपयोग को लेकर दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए, जिससे हालात बिगड़ गए।
राजनीतिक टकराव और कानून-व्यवस्था पर सवाल
कामारेड्डी की घटनाओं ने राज्य की कानून-व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। भाजपा का कहना है कि सरकार निष्पक्ष कार्रवाई करने में विफल रही है, जबकि कांग्रेस का पक्ष है कि प्रशासन ने शांति बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए हैं। एन रामचंदर राव की नजरबंदी को भाजपा ने राजनीतिक प्रतिशोध की कार्रवाई बताया है। वहीं प्रशासन का तर्क है कि यह कदम कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए उठाया गया।
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