‘वंदे मातरम्’ पर BJP का कांग्रेस के खिलाफ 10 सूत्री प्रस्ताव, देशभर में प्रदर्शन का ऐलान

 नई दिल्ली नई दिल्ली में राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक की शुरुआत 'वंदे मातरम्' के सभी छह छंदों के पूर्ण गायन के साथ हुई। बीजेपी की नई राष्ट्रीय टीम की पहली बैठक में पार्टी की आगामी रणनीतियों को लेकर चर्चा हुई। वहीं पहली बैठक में राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के अपमान पर कांग्रेस को घेरने की तैयारी भी की गई। बैठक में बीजेपी ने कांग्रेस कार्यसमिति के वंदे मातरम् के फैसले के खिलाफ 10 बिंदुओं का कड़ा निंदा प्रस्ताव पारित किया। बीजेपी ने इस मुद्दे पर आक्रामक रुख अपनाते हुए पूरे देश में राजनीतिक प्रदर्शन और

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Published On :

अगस्त 22, 2026

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 नई दिल्ली
नई दिल्ली में राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक की शुरुआत 'वंदे मातरम्' के सभी छह छंदों के पूर्ण गायन के साथ हुई।

बीजेपी की नई राष्ट्रीय टीम की पहली बैठक में पार्टी की आगामी रणनीतियों को लेकर चर्चा हुई। वहीं पहली बैठक में राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के अपमान पर कांग्रेस को घेरने की तैयारी भी की गई।

बैठक में बीजेपी ने कांग्रेस कार्यसमिति के वंदे मातरम् के फैसले के खिलाफ 10 बिंदुओं का कड़ा निंदा प्रस्ताव पारित किया। बीजेपी ने इस मुद्दे पर आक्रामक रुख अपनाते हुए पूरे देश में राजनीतिक प्रदर्शन और जनसंपर्क अभियान चलाने का एलान किया है।

तुष्टीकरण और स्वाभिमान का अपमान
बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सहित शीर्ष नेतृत्व ने कांग्रेस के वंदे मातरम् को लेकर पार्टी के रुख की तीखी आलोचना की है।

बीजेपी ने कांग्रेस के कदम को राष्ट्रगीत, राष्ट्रीय स्वाभिमान और देश के स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान का सीधा अपमान करार दिया।

वंदे मातरम् के सम्मान से समझौता नहीं
बैठक में बीजेपी द्वारा पारित प्रस्ताव में स्पष्ट कहा गया है कि राजनीतिक फायदे या वोट बैंक के तुष्टीकरण के लिए वंदे मातरम् के सम्मान और उसकी ऐतिहासिक विरासत से कोई समझौता मंजूर नहीं किया जाएगा।

पार्टी ने महात्मा गांधी के उस ऐतिहासिक कथन को भी देश भर में प्रचारित करने का संकल्प लिया है, जिसमें उन्होंने वंदे मातरम् को साम्राज्यवाद-विरोधी नारा और शुद्धतम राष्ट्रीय भावना से ओत-प्रोत उद्घोष बताया था।

बीजेपी का लक्ष्य इस देशव्यापी अभियान के जरिए राष्ट्रगीत के पूरे स्वरूप के इतिहास, महत्व और गौरवशाली विरासत को भारत के हर कोने तक पहुंचाना है।

कांग्रेस ने दिया 1937 के प्रस्ताव का हवाला
कांग्रेस कार्य समिति (CWC) ने अपने फैसले में कहा था कि पार्टी अपने कार्यक्रमों में केवल शुरुआती दो पद ही गाएगी। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और अन्य वरिष्ठ नेताओं का तर्क है कि पार्टी 1937 के उसी ऐतिहासिक प्रस्ताव और परंपरा का पालन कर रही है, जिसे स्वतंत्रता संग्राम के दौरान अपनाया गया था।

कांग्रेस के अनुसार, यह फैसला अक्टूबर 1937 में महात्मा गांधी, पंडित जवाहरलाल नेहरू, सरदार वल्लभभाई पटेल, नेताजी सुभाष चंद्र बोस और रवींद्रनाथ टैगोर जैसे महान स्वतंत्रता सेनानियों और राष्ट्रनिर्माताओं की आपसी सहमति से लिया गया था।

कांग्रेस नेतृत्व का कहना है कि वे उसी परंपरा का सम्मान कर रहे हैं जिसे देश के संस्थापकों ने तय किया था।

'वंदे मातरम्' को वैधानिक सुरक्षा का नया कानून
वंदे मातरम् पर राजनीतिक घमासान जारी है। हाल ही में वंदे मातरम् को कानूनी संरक्षण देने वाला राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) कानून पहले ही देश में लागू हो चुका है।

संसद में मंजूरी: यह ऐतिहासिक विधेयक 29 जुलाई को राज्यसभा और 30 जुलाई को लोकसभा से पारित हुआ था।

कानूनी दर्जा: अगस्त के शुरुआती सप्ताह में राष्ट्रपति की स्वीकृति मिलने के बाद इसने आधिकारिक कानून का रूप ले लिया।

3 साल तक की जेल का प्रावधान
इस नए कानून के तहत राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् को अब राष्ट्रगान जन गण मन के समान ही वैधानिक सुरक्षा और सम्मान प्राप्त है। कानून के मुताबिक, यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर राष्ट्रीय गीत के गायन में बाधा उत्पन्न करता है या इसका सार्वजनिक रूप से अपमान करता है, तो उसे कानूनी कार्रवाई के तहत 3 साल तक की जेल की सजा भुगतनी पड़ सकती है।

 

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