Unique Man of the Match : स्कोरबोर्ड पर सब शून्य फिर भी मिला प्लेयर ऑफ द मैच, क्या थी इसके पीछे की वजह?

क्रिकेट के मैदान पर प्रदर्शन को रनों और विकेटों से मापा जाता है, लेकिन एक ऐसा भी मैच हुआ जहां एक खिलाड़ी ने न तो बल्लेबाजी की, न विकेट लिया और न ही कोई कैच पकड़ा, फिर भी वह 'प्लेयर ऑफ द मैच' बना। आखिर उस खिलाड़ी ने मैदान पर ऐसा क्या जादू किया था?

Unique Man of the Match

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अप्रैल 6, 2026

Unique Man of the Match : सामान्यतः क्रिकेट के मैदान पर ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ का खिताब उस खिलाड़ी को मिलता है जिसने शतकीय पारी खेली हो या अपनी गेंदबाजी से विपक्षी टीम के पांच-छह विकेट चटकाए हों। कभी-कभी शानदार फील्डिंग और कैचों के दम पर भी यह अवार्ड मिल जाता है। लेकिन क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि किसी खिलाड़ी ने मैच में न तो एक भी रन बनाया, न ही कोई विकेट लिया और न ही कोई कैच लपका, फिर भी वह मैच का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी चुन लिया गया? सुनने में यह किसी चमत्कार जैसा लगता है, लेकिन साल 2001 में एक वनडे इंटरनेशनल मैच के दौरान ऐसा सच में हुआ था। यह रिकॉर्ड आज भी क्रिकेट प्रेमियों के बीच चर्चा का विषय बना रहता है।

2001 का वह यादगार मैच: वेस्टइंडीज बनाम जिम्बाब्वे

यह वाकया जून 2001 का है, जब वेस्टइंडीज की टीम जिम्बाब्वे के दौरे पर थी। हरारे क्रिकेट स्टेडियम में दोनों टीमों के बीच एक रोमांचक मुकाबला खेला जा रहा था। वेस्टइंडीज ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया। वेस्टइंडीज के बल्लेबाजों ने सधी हुई शुरुआत की और निर्धारित 50 ओवरों में 5 विकेट खोकर 266 रनों का एक चुनौतीपूर्ण स्कोर खड़ा किया। उस दौर में 260 से ऊपर का स्कोर काफी सुरक्षित माना जाता था। सलामी बल्लेबाज डेरेन गंगा (66), क्रिस गेल (53) और अनुभवी शिवनारायण चंद्रपॉल (51) ने अर्धशतकीय पारियां खेलकर टीम को मजबूत स्थिति में पहुँचाया।

जिम्बाब्वे की चुनौती और वेस्टइंडीज की शानदार जीत

267 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी जिम्बाब्वे की टीम की शुरुआत अच्छी रही। सलामी बल्लेबाज एलिस्टर कैंपबेल ने 68 रनों की कप्तानी पारी खेलकर अपनी टीम की जीत की उम्मीदें जगाए रखीं। हालांकि, मिडिल ऑर्डर के बल्लेबाज वेस्टइंडीज के अनुशासित गेंदबाजी आक्रमण के सामने संघर्ष करते नजर आए। पूरी कोशिश के बावजूद जिम्बाब्वे की टीम 50 ओवर में 9 विकेट खोकर 239 रन ही बना सकी और यह मैच वेस्टइंडीज ने 27 रनों से अपने नाम कर लिया। वेस्टइंडीज की ओर से मार्विन ढिल्लन ने सबसे ज्यादा 3 विकेट हासिल किए।

हैरान कर देने वाला फैसला: कैमरून कॉफी बने हीरो

मैच खत्म होने के बाद जब ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ के नाम की घोषणा हुई, तो स्टेडियम में मौजूद हर शख्स और कमेंटेटर हैरान रह गए। यह अवार्ड वेस्टइंडीज के गेंदबाज कैमरून कॉफी को दिया गया। अब सवाल उठा कि आखिर कॉफी ने ऐसा क्या किया था? बल्लेबाजी में उनकी बारी नहीं आई क्योंकि वेस्टइंडीज के केवल 5 विकेट गिरे थे। गेंदबाजी में उन्होंने अपने कोटे के पूरे 10 ओवर डाले, लेकिन उनके खाते में एक भी सफलता (विकेट) नहीं दर्ज हुई। यहाँ तक कि फील्डिंग के दौरान उन्होंने कोई कैच भी नहीं पकड़ा।

कंजूस गेंदबाजी ने रच दिया नया कीर्तिमान

दरअसल, कैमरून कॉफी को यह सम्मान उनकी अविश्वसनीय और बेहद किफायती गेंदबाजी के लिए दिया गया था। उन्होंने 10 ओवरों के अपने स्पेल में मात्र 20 रन खर्च किए और 2 ओवर मेडन फेंके। उस समय उनका इकॉनमी रेट मात्र 2.00 का था। जहाँ मार्विन ढिल्लन ने 3 विकेट लिए लेकिन 4.8 की दर से 48 रन लुटाए, वहीं कॉफी ने एक छोर से रन गति पर ऐसा अंकुश लगाया कि जिम्बाब्वे के बल्लेबाज दबाव में आकर गलतियां करने लगे। क्रिकेट इतिहास का यह अनोखा उदाहरण साबित करता है कि कभी-कभी विकेट न लेना भी मैच जिताने में विकेट लेने से ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकता है।

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