Bihar Politics: बिहार राजनीति में उबाल, 31 साल पुराने मामले में पप्पू यादव गिरफ्तार, अस्पताल में रहेंगे

पटना पुलिस ने पूर्णिया सांसद पप्पू यादव को 1995 के एक पुराने जालसाजी और धोखाधड़ी मामले में गिरफ्तार किया है। गिरफ्तारी के तुरंत बाद उनका ब्लड प्रेशर बढ़ गया, जिसके चलते उन्हें PMCH अस्पताल में भर्ती कराया गया है। राहुल गांधी ने इसे 'बदले की राजनीति' बताया है। क्या यह महज कानूनी प्रक्रिया है या कोई बड़ी राजनीतिक साज़िश?

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Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

फ़रवरी 7, 2026

Bihar Politics: बिहार की राजनीति में उस वक्त हड़कंप मच गया जब शुक्रवार (6 फरवरी) की देर रात पटना पुलिस ने पूर्णिया से सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव को उनके आवास से गिरफ्तार कर लिया। यह गिरफ्तारी किसी नए मामले में नहीं, बल्कि 31 साल पुराने एक विवादित संपत्ति मामले में की गई है। पुलिस की इस अचानक कार्रवाई से समर्थकों में भारी आक्रोश देखा गया। गिरफ्तारी के तुरंत बाद ही पप्पू यादव की तबीयत बिगड़ने की खबर आई, जिसके बाद पुलिस उन्हें जेल ले जाने के बजाय सीधे अस्पताल ले गई। इस नाटकीय घटनाक्रम ने राज्य के सियासी गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है कि क्या सांसद को वाकई जेल जाना पड़ेगा या वे अस्पताल से ही जमानत की राह तलाशेंगे।

अदालती आदेश: सोमवार तक अस्पताल ही होगा पप्पू यादव का ठिकाना

शनिवार (7 फरवरी) को इस हाई-प्रोफाइल मामले की सुनवाई पटना की विशेष एमपी/एमएलए कोर्ट में हुई। कोर्ट ने सांसद को न्यायिक हिरासत में भेजने का फैसला तो सुनाया, लेकिन उनकी बिगड़ती सेहत को ध्यान में रखते हुए उन्हें फिलहाल पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (PMCH) में ही रखने का निर्देश दिया है। न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि पप्पू यादव 9 फरवरी (सोमवार) तक चिकित्सा विशेषज्ञों की देखरेख में अस्पताल में ही रहेंगे। उनकी जमानत याचिका पर अगली सुनवाई भी सोमवार को ही निर्धारित की गई है, जहाँ अभियोजन और बचाव पक्ष अपनी दलीलें पेश करेंगे। तब तक सांसद को जेल के बजाय अस्पताल के वार्ड में ही समय बिताना होगा।

31 साल पुराना विवाद: क्या है पूरा मामला?

यह पूरा कानूनी विवाद साल 1995 से जुड़ा हुआ है। पप्पू यादव पर आरोप है कि उन्होंने उस समय एक निजी संपत्ति को किराए पर लिया था ताकि उसे अपने कार्यालय के रूप में इस्तेमाल कर सकें। हालांकि, बाद में उन पर उस संपत्ति पर अवैध रूप से कब्जा करने और मालिक को बेदखल करने के आरोप लगे। चूंकि यह मामला दशकों से अदालत में लंबित था और पप्पू यादव कई तारीखों पर पेश नहीं हुए थे, इसलिए कोर्ट ने उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया था। इसी वारंट के आधार पर पटना पुलिस ने इस सप्ताह यह बड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की।

स्वास्थ्य में गिरावट: आईजीआईएमएस से पीएमसीएच तक का सफर

शुक्रवार रात गिरफ्तारी की प्रक्रिया के दौरान ही पप्पू यादव ने बेचैनी और स्वास्थ्य संबंधी अन्य शिकायतों की बात कही। उन्हें तुरंत पटना के इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (IGIMS) ले जाया गया। वहां प्रारंभिक जांच के बाद डॉक्टरों ने उनकी स्थिति को गंभीर माना और बेहतर इलाज के लिए उन्हें पीएमसीएच (PMCH) रेफर कर दिया गया। फिलहाल डॉक्टरों की एक विशेष टीम उनकी हृदय गति, रक्तचाप और अन्य महत्वपूर्ण मानकों की निगरानी कर रही है। समर्थकों का कहना है कि सांसद की तबीयत पुलिस की कठोर कार्रवाई और मानसिक तनाव के कारण बिगड़ी है।

पुलिस का रुख और सोमवार की सुनवाई पर टिकी नजरें

पटना पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, यह गिरफ्तारी पूरी तरह से कानूनी प्रक्रिया और कोर्ट के वारंट का हिस्सा है। पुलिस का कहना है कि उन्होंने कानून के प्रावधानों के तहत ही सांसद को हिरासत में लिया है। अब सभी की निगाहें सोमवार (9 फरवरी) को होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं। क्या कोर्ट उनकी पुरानी बीमारी और उम्र का हवाला देकर उन्हें जमानत देगी, या फिर 31 साल पुराने इस कब्जे के मामले में उन्हें जेल की सलाखों के पीछे जाना होगा? इस फैसले का असर न केवल पप्पू यादव के राजनीतिक भविष्य पर पड़ेगा, बल्कि बिहार की विपक्षी राजनीति में भी इसकी गूंज सुनाई देगी।

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