Bihar New CM: बिहार की राजनीति एक निर्णायक मोड़ पर खड़ी है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के भीतर राज्य के अगले मुख्यमंत्री के नाम को लेकर हलचल तेज हो गई है। सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली में आलाकमान ने नाम तय कर लिया है और अब केवल औपचारिक घोषणा का इंतजार है।
केंद्रीय पर्यवेक्षक की नियुक्ति
बताते चले कि, भाजपा नेतृत्व ने मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को केंद्रीय पर्यवेक्षक नियुक्त किया है। शिवराज सिंह चौहान बिहार का दौरा कर भाजपा विधायक दल की बैठक की अध्यक्षता करेंगे। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य नए मुख्यमंत्री के चयन की प्रक्रिया को लोकतांत्रिक और औपचारिक रूप देना है। यह माना जा रहा है कि शिवराज की देखरेख में पार्टी एक ऐसे नाम पर मुहर लगाएगी जो आगामी चुनावों और गठबंधन की स्थिरता के लिहाज से उपयुक्त हो।
सीएम की रेस में दिग्गज चेहरे
बिहार के अगले मुख्यमंत्री की दावेदारी की दौड़ में वर्तमान उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का नाम सबसे आगे चल रहा है। उनके साथ ही केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल और दिग्गज नेता रविशंकर प्रसाद के नामों पर भी गंभीर विचार-विमर्श किया जा रहा है। भाजपा महासचिव और बिहार प्रभारी विनोद तावड़े को भी शीर्ष नेतृत्व के फैसले से अवगत करा दिया गया है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि इस बार ‘कमल’ छाप मुख्यमंत्री का होना लगभग तय है।
JDU के साथ सत्ता का संतुलन
भले ही भाजपा में नए नाम पर सहमति बन गई हो, लेकिन नीतीश कुमार ने अभी इस्तीफा नहीं दिया है। माना जा रहा है कि नए नाम की सार्वजनिक घोषणा होने के बाद ही वे राजभवन जाकर अपना त्यागपत्र सौंपेंगे। रविवार को नीतीश कुमार के आवास पर जेडीयू नेताओं की भारी भीड़ रही, जहां उन्होंने स्पष्ट किया कि वे अपने द्वारा बनाए गए जातीय और सामाजिक समीकरण के साथ कोई समझौता नहीं करेंगे। गठबंधन की नई व्यवस्था में सामाजिक न्याय के संतुलन को बनाए रखना दोनों पार्टियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती है।
सत्ता में हिस्सेदारी और जेडीयू की मांग
बिहार विधानसभा के अंकगणित में भाजपा (89 विधायक) और जेडीयू (85 विधायक) के बीच बहुत कम अंतर है। ऐसे में भाजपा के लिए जेडीयू की सहमति अनिवार्य है। चर्चा है कि जेडीयू के भीतर एक धड़ा चाहता है कि मुख्यमंत्री उनकी पार्टी से हो, भले ही उसका चयन भाजपा करे। वहीं, एक वरिष्ठ नेता के अनुसार नीतीश कुमार अपने बेटे के लिए उपमुख्यमंत्री पद की मांग कर रहे हैं। जदयू नेता संजय झा ने संकेत दिए हैं कि सोमवार के बाद इस पूरे घटनाक्रम पर अंतिम फैसला ले लिया जाएगा।
सियासी समीकरण और गठबंधन का गणित
बिहार में संभावित नेतृत्व परिवर्तन केवल एक व्यक्ति का बदलाव नहीं, बल्कि एक नए राजनीतिक गठबंधन मॉडल की शुरुआत है। भाजपा और जेडीयू के वरिष्ठ नेता एक ऐसी व्यवस्था पर काम कर रहे हैं जिससे शासन में पारदर्शिता रहे और दोनों दलों के समर्थकों के बीच समन्वय बना रहे। भाजपा प्रभारी विनोद तावड़े और संजय झा के बीच होने वाली आगामी बैठकें इस सत्ता परिवर्तन की रूपरेखा को अंतिम रूप देंगी।









