बिहार में मंत्रिमंडल विस्तार मई के पहले सप्ताह में, 70% पुराने चेहरे रहेंगे

पटना  बिहार में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के मंत्रिमंडल का विस्तार मई के पहले सप्ताह में होगा। यह विस्तार पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के नतीजे आने के बाद होगा। चुनावों के नतीजे 4 मई को आएंगे। हालांकि संभावना यही है कि बिहार का नया मंत्रिमंडल कोई खास सरप्राइज देने वाला नहीं होगा। कैबिनेट में करीब 70 प्रतिशत वही चेहरे होंगे जो नीतीश कुमार की पिछली सरकार के मंत्रिमंडल में थे। बीजेपी क्यों कर रही 5 विधानसभा चुनावों के नतीजों का इंतजार? बताया जाता है कि पश्चिम बंगाल का विधानसभा चुनाव भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के लिए सबसे खास है। इस

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Published On :

अप्रैल 17, 2026

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पटना

 बिहार में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के मंत्रिमंडल का विस्तार मई के पहले सप्ताह में होगा। यह विस्तार पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के नतीजे आने के बाद होगा। चुनावों के नतीजे 4 मई को आएंगे। हालांकि संभावना यही है कि बिहार का नया मंत्रिमंडल कोई खास सरप्राइज देने वाला नहीं होगा। कैबिनेट में करीब 70 प्रतिशत वही चेहरे होंगे जो नीतीश कुमार की पिछली सरकार के मंत्रिमंडल में थे।

बीजेपी क्यों कर रही 5 विधानसभा चुनावों के नतीजों का इंतजार?
बताया जाता है कि पश्चिम बंगाल का विधानसभा चुनाव भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के लिए सबसे खास है। इस चुनाव में दो चरणों में 23 और 29 मई को मतदान होना है। इससे पहले बीजेपी के तमाम बड़े नेता बंगाल में चुनाव प्रचार में जुटे हैं। यानी इस महीने बीजेपी के नेता फुरसत में नहीं हैं। दूसरी तरफ बिहार में पहली बार बीजेपी के नेतृत्व वाली एनडीए की सरकार बनी है। वह सरकार के मंत्रिमंडल के विस्तार के बाद होने वाले शपथ समारोह को भव्य बनाना चाहती है। बीजेपी चाहती है कि शपथ समारोह में पार्टी के सभी वरिष्ठ नेता मौजूद रहें। यही कारण है कि वह पश्चिम बंगाल सहित असम, तमिलनाडु, केरल और पुद्दुचेरी के विधानसभा चुनावों के नतीजे आने का इंतजार कर रही है। उसे इस चुनाव में असम के साथ बंगाल में भी बीजेपी का परचम लहराने की उम्मीद है। इसी आशा में वह बिहार के शपथ समारोह में दोहरा जश्न मनाना चाहती है।

नई कैबिनेट में 70 प्रतिशत पुराने चेहरे दिखने के आसार
बिहार में सम्राट चौधरी की नई सरकार के मंत्रिमंडल का विस्तार 4 मई के बाद होने के आसार हैं। संभावना यही है कि बिहार सरकार के इस नए मंत्रिमंडल में 70 प्रतिशत मंत्री वही होंगे, जो इससे पहले नीतीश कुमार सरकार की कैबिनेट में थे। बताया जाता है कि शेष करीब 30 फीसदी मंत्री जातीय समीकरणों और क्षेत्रीय संतुलन को साधते हुए बनाए जा सकते हैं।

पिछली सरकार के कई मंत्रियों के बदल सकते हैं विभाग
बिहार सरकार में पिछली सरकार के मंत्रियों में से कई के विभाग बदले जा सकते हैं। उनमें से कई को अधिक महत्वपूर्ण विभाग दिए जा सकते हैं। बताया जाता है कि स्वास्थ्य, शिक्षा, ऊर्जा, जल संसाधन और वित्त जैसे विभाग पुराने मंत्रियों को ही दिए जा सकते हैं। बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी के मुताबिक कैबिनेट में विस्तार पर अंतिम निर्णय बैठक में होगा। सम्राट चौधरी का कहना है कि बिहार में अब मोदी और नीतीश मॉडल चलेगा। उन्होंने अब नीतीश मॉडल के साथ पीएम मोदी का भी नाम जोड़ दिया है। पूर्व में सिर्फ नीतीश मॉडल की बात कही जाती रही थी।

सत्ता के बंटवारे का समीकरण
बताया जाता है कि नए मंत्रिमंडल में बीजेपी की प्रमुख सहयोगी पार्टी जनता दल यूनाईटेड ( जेडीयू ) से ज्यादातर मंत्री पुराने ही होंगे। बीजेपी के कोटे से उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम), चिराग पासवान की पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी- रामविलास (एलजेपी-आर) और जीतनराम मांझी की पार्टी हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) के विधायकों को मंत्री बनाया जाएगा। एलजेपी-आर को दो, आरएलएम को एक और ‘हम’ को एक मंत्री पद मिल सकता है। बताया जाता है कि सम्राट चौधरी के मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने वाले मंत्रियों में से किसी को भी दो से अधिक विभाग नहीं दिए जाएंगे।

 

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