Delhi Pollution: दिल्ली में प्रदूषण का कहर! इंडिया गेट से गाजीपुर तक जहरीली हवा, AQI 400 के पार

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली के कई इलाकों में वायु गुणवत्ता गंभीर श्रेणी में पहुंच गई है। इंडिया गेट पर AQI 414, गाजीपुर में 410 और धौला कुआं में 417 दर्ज किया गया।

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Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

नवम्बर 4, 2026

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Delhi Pollution: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण ने एक बार फिर बेहद खतरनाक और डरावना रूप धारण कर लिया है। सर्दियों की दस्तक के साथ ही दिल्ली की हवा में जहर घुलने लगा है, जिससे आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो गया है। बुधवार सुबह राष्ट्रीय राजधानी का समग्र वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) अपने रिकॉर्ड और अत्यधिक खतरनाक स्तर 605 पर दर्ज किया गया। शहर के अधिकांश हिस्सों में हवा की गुणवत्ता ‘गंभीर’ (Severe) श्रेणी में बनी हुई है, जिसके कारण लोगों को आंखों में जलन, गले में खराश और सांस लेने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

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प्रमुख इलाकों में AQI की खतरनाक स्थिति

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दिल्ली में प्रदूषण का कहर!

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली के कई प्रमुख इलाकों में हवा की गुणवत्ता ‘रेड जोन’ को पार कर चुकी है।

गंभीर श्रेणी वाले इलाके: ऐतिहासिक इंडिया गेट पर AQI 414, गाजीपुर में 410 और धौला कुआं में 417 दर्ज किया गया, जो सीधे तौर पर गंभीर श्रेणी में आते हैं। इसके अलावा पंजाबी बाग (452), आईटीओ (418) और आरके पुरम (423) जैसे इलाकों में स्थिति और भी ज्यादा भयावह है।

‘बहुत खराब’ और ‘खराब’ श्रेणी: चांदनी चौक (369), आईजीआई एयरपोर्ट टी3 (358), लोधी रोड (304) और वसुंधरा एन्क्लेव (328) जैसे क्षेत्रों में हवा ‘बहुत खराब’ श्रेणी में रिकॉर्ड की गई। वहीं, आनंद विहार में AQI 300 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी के अंतर्गत आता है।

प्रशासनिक सख्ती और ट्रैफिक प्रतिबंध

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दिल्ली में प्रदूषण का कहर!

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने कमर कस ली है और प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। दिल्ली-गुरुग्राम सीमा सहित शहर के विभिन्न प्रवेश द्वारों पर पुलिस द्वारा विशेष जांच अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत वाहनों के प्रवेश पर कड़े प्रतिबंध और प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्रों (PUC) की कड़ी जांच की जा रही है। ये तमाम पाबंदियां ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP-2) के प्रावधानों के तहत लागू की गई हैं, ताकि जहरीले धुएं और वाहनों से होने वाले उत्सर्जन को कम किया जा सके।

सरकार का पक्ष और पराली प्रबंधन के दावे

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दिल्ली में प्रदूषण का कहर!

बढ़ते प्रदूषण और बिगड़ते हालातों के बीच केंद्र और राज्य सरकारें भी सक्रिय हो गई हैं। केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने इस संकट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि केंद्र सरकार का वायु गुणवत्ता पैनल मौसम की हर गतिविधि—जैसे हवा की दिशा, गति और मौसमी बदलाव—पर पैनी नजर रखे हुए है। उन्होंने आश्वासन दिया है कि हालात से निपटने के लिए हरसंभव आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

सरकार ने यह भी दावा किया है कि पिछले वर्षों की तुलना में इस बार पराली जलाने की घटनाओं में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। आंकड़ों के मुताबिक, इस सत्र में लगभग 40 प्रतिशत धान की पराली का सदुपयोग ‘एक्स-सीटू’ प्रबंधन के माध्यम से किया गया है, जिससे आने वाले दिनों में प्रदूषण के स्तर को नियंत्रित करने में मदद मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। बहरहाल, मौजूदा हालात ने दिल्लीवासियों को एक बार फिर गैस चैंबर जैसी स्थिति में जीने के लिए मजबूर कर दिया है।

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