Baghel Attack on Yogi: भूपेश बघेल का योगी आदित्यनाथ पर तीखा हमला, शंकराचार्य विवाद और बजट सत्र पर सवाल

भूपेश बघेल ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर निशाना साधते हुए पूछा है कि आखिर क्यों शंकराचार्यों की अनदेखी की जा रही है? बजट सत्र के दौरान जनता के असल मुद्दों को दबाने का आरोप लगाते हुए बघेल ने भाजपा की हिंदूवादी छवि पर भी सवाल खड़े किए हैं। क्या यह 2026 के नए सियासी समीकरण हैं?

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

फ़रवरी 22, 2026

Baghel Attack on Yogi: छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और भाजपा सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। दुर्ग से दल्लीराजहरा जाते समय मीडिया से बातचीत के दौरान बघेल ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद पर दर्ज एफआईआर को लेकर कड़ी आपत्ति जताई और योगी आदित्यनाथ की कार्यप्रणाली पर तीखे प्रहार किए। उन्होंने न केवल धार्मिक विषयों पर अपनी राय रखी, बल्कि छत्तीसगढ़ के आगामी बजट सत्र की अवधि और सामाजिक सौहार्द जैसे गंभीर मुद्दों पर भी सरकार को आड़े हाथों लिया।

योगी आदित्यनाथ को बताया ‘ढोंगी’: दो पदों की नैतिकता पर उठाए सवाल

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के विरुद्ध दर्ज हुई एफआईआर पर प्रतिक्रिया देते हुए भूपेश बघेल ने योगी आदित्यनाथ के दोहरे उत्तरदायित्वों पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि “महंत” का पद और “मुख्यमंत्री” का पद, दोनों ही पूर्णकालिक जिम्मेदारियां हैं। एक व्यक्ति एक साथ दो पूर्णकालिक पदों के साथ न्याय कैसे कर सकता है? बघेल ने योगी आदित्यनाथ को ‘ढोंगी’ करार देते हुए कहा कि जो व्यक्ति तपस्या के सिद्धांतों पर खरा न उतरे, वह योगी कहलाने का अधिकारी नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री निम्न स्तर की राजनीति पर उतर आए हैं और संतों का अपमान कर रहे हैं।

बजट सत्र की अवधि पर प्रश्नचिन्ह: ‘इतनी जल्दबाजी में क्यों है सरकार?’

छत्तीसगढ़ के आगामी बजट सत्र को लेकर भी पूर्व मुख्यमंत्री ने चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि 24 फरवरी से शुरू होने वाले सत्र में केवल 15 बैठकें प्रस्तावित हैं, जो राज्य के ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा के लिए नाकाफी हैं। उन्होंने परंपराओं का हवाला देते हुए कहा कि 23 फरवरी को राज्यपाल के अभिभाषण के तुरंत बाद धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा होनी चाहिए, लेकिन सरकार 24 तारीख को ही बजट पेश करने की तैयारी में है। बघेल ने सवाल किया कि आखिर सरकार चर्चा से क्यों भाग रही है? क्या उनके पास जनता को बताने के लिए उपलब्धियां खत्म हो गई हैं?

एआई समिट और ‘चाइनीज कुत्ता’: तकनीकी प्रदर्शन पर तंज

हाल ही में हुए एआई (AI) समिट का जिक्र करते हुए बघेल ने सरकार पर व्यंग्य किया। उन्होंने कहा कि आजकल शिक्षकों और प्रोफेसरों की ड्यूटी कुत्तों की निगरानी में लगा दी गई है, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। एआई समिट में दिखाए गए रोबोटिक डॉग को ‘नकली चाइनीज कुत्ता’ बताते हुए उन्होंने कहा कि पूरे निवेश सम्मेलन की गंभीरता एक तरफ रह गई और सरकार एक नकली कुत्ते का प्रदर्शन करने में व्यस्त रही। उन्होंने गलगोटिया यूनिवर्सिटी से जुड़े विवाद पर भी चुटकी लेते हुए कहा कि यह संस्थान सरकार का ‘गला घोंटने’ वाला साबित हो रहा है।

मड़ई मेले में सांप्रदायिक प्रतिबंध: सामाजिक सौहार्द को खतरा

दुर्ग के देवबलोदा में मंदिरों के आसपास मुस्लिम दुकानदारों पर लगाए गए प्रतिबंध को बघेल ने लोकतंत्र और छत्तीसगढ़ की संस्कृति के खिलाफ बताया। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि मेला और मड़ई सबकी साझा विरासत है। अगर आज एक समुदाय को रोका जा रहा है, तो कल को दलितों या आदिवासियों के साथ भी ऐसा व्यवहार किया जा सकता है। उन्होंने बजरंग दल जैसी संस्थाओं की बढ़ती दखलअंदाजी पर चिंता जताते हुए कहा कि यह देश को बांटने की दिशा में उठाया गया कदम है, जिससे सामाजिक ताना-बना बिखर जाएगा।

भाजपा नेताओं के बयानों पर चुप्पी: सुरक्षा और राजनीति का दोहरा मापदंड

बघेल ने भाजपा पर पक्षपाती होने का आरोप लगाते हुए कहा कि जब सत्ताधारी दल के नेता राहुल गांधी या अन्य सांसदों को गोली मारने जैसे हिंसक बयान देते हैं, तब पूरी पार्टी मौन साधे रहती है। उन्होंने सवाल उठाया कि विपक्ष के नेताओं पर तो तुरंत कार्रवाई होती है, लेकिन भाजपा के जहरीले बयानों पर कानून खामोश क्यों रहता है? उन्होंने स्पष्ट किया कि आगामी सत्र में विपक्ष इन सभी मुद्दों पर सरकार को मजबूती से घेरेगा।

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