Twisha Sharma Case : भोपाल के चर्चित ट्विशा शर्मा मामले में बड़ा मोड़, एमपी सरकार ने की सीबीआई जांच की सिफारिश

भोपाल के बहुचर्चित अभिनेत्री व मॉडल ट्विशा शर्मा संदिग्ध मौत मामले में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पीड़ित परिवार से मुलाकात के बाद बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने मामले की संवेदनशीलता और निष्पक्षता को देखते हुए केंद्र सरकार से सीबीआई (CBI) जांच कराने की आधिकारिक सिफारिश की है।

Twisha Sharma Case

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

मई 22, 2026

Twisha Sharma Case : मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से इस वक्त की एक बहुत बड़ी और महत्वपूर्ण खबर सामने आ रही है। भोपाल के हाई-प्रोफाइल ट्विशा शर्मा दहेज मृत्यु मामले की गंभीरता को देखते हुए मध्य प्रदेश सरकार ने एक बड़ा निर्णय लिया है। राज्य सरकार ने इस पूरे संवेदनशील मामले की कमान अब केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंपने की आधिकारिक सिफारिश कर दी है।

इस मामले में मृतका ट्विशा शर्मा के दुखी परिजनों ने शुरुआत से ही स्थानीय पुलिस पर साक्ष्य (सबूत) छिपाने और पूरी जांच को गलत तरीके से प्रभावित करने के बेहद गंभीर और सीधे आरोप लगाए थे। परिजनों ने न्याय की गुहार लगाते हुए लगातार इस मामले की सीबीआई से निष्पक्ष जांच कराने की पुरजोर मांग की थी, जिसे आखिरकार सरकार ने स्वीकार कर लिया है।

पूर्व जिला जज के रसूख और प्रभाव के कारण निष्पक्ष जांच प्रभावित होने का था गंभीर आरोप

ट्विशा शर्मा के माता-पिता और परिजनों का आरोप है कि उनकी बेटी को ससुराल पक्ष के लोगों द्वारा लगातार दहेज के लिए प्रताड़ित किया जा रहा था, जिसके कारण उसकी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। परिजनों ने मामले में एक बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि ट्विशा के ससुराल पक्ष में एक बेहद प्रभावशाली पूर्व जिला जज (रिटायर्ड डिस्ट्रिक्ट जज) शामिल हैं।

पीड़ित परिवार का सीधा आरोप था कि पूर्व न्यायाधीश के उच्च न्यायिक और प्रशासनिक संपर्कों तथा उनके भारी सामाजिक प्रभाव के कारण स्थानीय पुलिस दबाव में काम कर रही थी। परिजनों को अंदेशा था कि इस रसूख के कारण भोपाल पुलिस द्वारा की जा रही शुरुआती जांच पूरी तरह प्रभावित हो सकती है और उन्हें कभी न्याय नहीं मिल पाएगा। इसी वजह से मामले को राज्य से बाहर की स्वतंत्र एजेंसी को देने की मांग उठी थी।

भोपाल के कटारा हिल्स थाने में नई कानूनी धाराओं के तहत दर्ज है आपराधिक मुकदमा

मध्य प्रदेश गृह विभाग द्वारा जारी की गई आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, इस कथित दहेज मृत्यु और मानसिक व शारीरिक प्रताड़ना के इस गंभीर मामले में भोपाल नगरीय क्षेत्र के थाना कटारा हिल्स में अपराध क्रमांक 133/2026 के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी।

नए कानूनी बदलावों के बाद, इस मामले में देश की नई संहिताओं यानी भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 80(2) (दहेज मृत्यु), धारा 85 (महिला के प्रति क्रूरता) और धारा 3(5) (सामान्य मंशा) के साथ-साथ दहेज प्रतिषेध अधिनियम, 1961 की धारा 3 और 4 के तहत मुकदमा कायम है। मामले की संवेदनशीलता और इसमें जुड़े कानूनी पहलुओं को देखते हुए राज्य शासन ने गहराई से विचार करने के बाद ही इसे केंद्रीय एजेंसी को फॉरवर्ड करने का मन बनाया।

दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना अधिनियम के तहत राज्य सरकार ने सीबीआई को दी पूर्ण सहमति

राज्य सरकार द्वारा जारी की गई विशेष अधिसूचना में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि कानून-व्यवस्था और जनता के विश्वास को बहाल रखने के लिए राज्य शासन ने इस पूरे अनुसंधान (इन्वेस्टिगेशन) को तत्काल प्रभाव से सीबीआई को हस्तांतरित करने का कड़ा निर्णय लिया है। इस निर्णय को अमलीजामा पहनाने के लिए दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना अधिनियम (Delhi Special Police Establishment Act), 1946 की धारा 6 के अंतर्गत निहित शक्तियों का प्रयोग किया गया है।

इसके तहत मध्य प्रदेश सरकार ने केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई को इस विशिष्ट मामले से जुड़े हर पहलू की जांच करने के लिए पूरे राज्य में पूर्ण शक्ति, कानूनी अधिकार और विशेष क्षेत्राधिकार देने की अपनी लिखित सहमति सहर्ष प्रदान कर दी है।

कथित षड्यंत्र, दुष्प्रेरण और सबूत मिटाने के हर पहलू पर पैनी नजर रखेगी केंद्रीय एजेंसी

मध्य प्रदेश सरकार ने अपनी अधिसूचना के अंतिम हिस्से में यह भी पूरी तरह से साफ कर दिया है कि सीबीआई को दी गई यह सहमति केवल मुख्य अपराध तक ही सीमित नहीं रहेगी। यह सहमति इस पूरे मामले से जुड़े हर छोटे-बड़े सह-अपराध, किसी भी प्रकार के आपराधिक दुष्प्रेरण (उकसाने), साक्ष्यों को जानबूझकर नष्ट करने और इसके पीछे रचे गए किसी भी प्रकार के कथित बड़े आपराधिक षड्यंत्र (कॉन्स्पिरेशन) की व्यापक जांच पर भी समान रूप से लागू होगी।

अब सीबीआई इस मामले को टेकओवर करने के बाद नए सिरे से केस डायरी तैयार करेगी और यह पता लगाएगी कि क्या वाकई किसी बड़े रसूखदार के इशारे पर भोपाल में ट्विशा शर्मा की मौत के असली सबूतों के साथ कोई छेड़छाड़ की गई थी या नहीं।

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