Bhojshala Case: भोजशाला विवाद पर सुप्रीम कोर्ट सख्त? आज की सुनवाई पर टिकी सभी की नजरें

धार की भोजशाला-कमाल मौला परिसर विवाद पर आज सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई होगी। अंतरिम व्यवस्था, धार्मिक अधिकारों और मामले की आगे की न्यायिक प्रक्रिया को लेकर सभी की नजर शीर्ष अदालत पर टिकी है।

Bhojshala Case

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

अगस्त 5, 2026

Bhojshala Case: मध्य प्रदेश के ऐतिहासिक और धार स्थित भोजशाला-कमाल मौला परिसर से जुड़े लंबे समय से चले आ रहे संवेदनशील विवाद पर आज सुप्रीम कोर्ट में एक बेहद महत्वपूर्ण सुनवाई होने जा रही है। इस हाई-प्रोफाइल मामले को लेकर हिंदू और मुस्लिम, दोनों ही पक्षों की निगाहें देश की सर्वोच्च अदालत पर टिकी हुई हैं। आज की इस न्यायिक कार्यवाही के दौरान अदालत अंतरिम व्यवस्था, दोनों समुदायों के धार्मिक अधिकारों और आगे की कानूनी प्रक्रिया से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से विचार कर सकती है।

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भोजशाला विवाद की पृष्ठभूमि और दोनों पक्षों के दावे

भोजशाला परिसर को लेकर पिछले कई वर्षों से दोनों समुदायों के बीच अपने-अपने धार्मिक और सांस्कृतिक अधिकारों को लेकर दावेदारी चली आ रही है:

हिंदू पक्ष का दावा: हिंदू समुदाय इस परिसर को ऐतिहासिक रूप से वाग्देवी (मां सरस्वती) का प्राचीन मंदिर मानता है और वहां नियमित पूजा-अर्चना करने का अधिकार मांगता है।

मुस्लिम पक्ष का दावा: दूसरी ओर, मुस्लिम पक्ष इस स्थल को कमाल मौला मस्जिद के रूप में देखता है और अपनी धार्मिक आस्था तथा पारंपरिक नमाज से जुड़े अधिकारों पर जोर देता है।

दोनों पक्षों के इन परस्पर विरोधी दावों और ऐतिहासिक दावों के कारण यह मामला लंबे समय से देश की विभिन्न अदालतों में विचाराधीन चला आ रहा है।

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का फैसला और सुप्रीम कोर्ट में चुनौती

इस विवाद ने तब एक नया मोड़ लिया जब मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने अपने एक फैसले में भोजशाला परिसर को मां सरस्वती का मंदिर माना और वहां नमाज अदा करने की अनुमति को समाप्त कर दिया था।

सुप्रीम कोर्ट में चुनौती: हाईकोर्ट के इसी आदेश से असंतुष्ट होकर मुस्लिम पक्ष ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी और राहत की गुहार लगाई।

शीर्ष अदालत का रुख: सर्वोच्च अदालत ने मामले की गंभीरता को समझते हुए याचिकाओं पर सुनवाई स्वीकार की, लेकिन शुरुआत में यथास्थिति बहाल करने से स्पष्ट इनकार कर दिया था। हालांकि, अदालत ने मानवीय और प्रशासनिक दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार को यह निर्देश दिया था कि शुक्रवार की नमाज के लिए विवादित परिसर के समीप ही एक वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराया जाए। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि यह आदेश केवल एक ‘अंतरिम व्यवस्था’ है और इस पर अंतिम निर्णय सभी पक्षों की विस्तृत सुनवाई के बाद ही लिया जाएगा।

आज की सुनवाई के मुख्य बिंदु और संभावित निर्देश

आज होने वाली सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों के वरिष्ठ वकील अदालत के समक्ष अपने-अपने मजबूत तर्क और दस्तावेज पेश करेंगे:

पक्षों की मांग: जहां एक तरफ हिंदू पक्ष मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के पूर्व फैसले को पूरी तरह बरकरार रखने की जोरदार मांग करेगा, वहीं दूसरी ओर मुस्लिम पक्ष अंतरिम व्यवस्था, संपत्ति के स्वामित्व और अपने पारंपरिक धार्मिक अधिकारों से जुड़े संवैधानिक मुद्दों पर अपनी दलीलें रखेगा।

नमाज की व्यवस्था: पिछले सप्ताह सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी अंतरिम निर्देशों के पालन में भोजशाला परिसर के पीछे स्थित खसरा नंबर 612 पर शांतिपूर्ण तरीके से शुक्रवार की नमाज अदा की गई थी। अब देश भर की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या शीर्ष अदालत इस मौजूदा अंतरिम व्यवस्था को आगे भी यथावत बनाए रखती है या सुनवाई के दौरान कोई नया या संशोधित आदेश पारित करती है।

अंतिम निर्णय का इंतजार: यदि अदालत इस मामले में तत्काल कोई अंतिम फैसला सुनाने के बजाय अपना निर्णय सुरक्षित रखती है, तो यह देखना अहम होगा कि अंतिम आदेश आने तक विवादित स्थल पर नमाज और पूजा की व्यवस्था किस स्वरूप में संचालित होती है।

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