Bengal Politics : बंगाल में मतुआ मुद्दे पर BJP घिरी, घुसपैठ बयान और मारपीट आरोपों से बढ़ी सियासी मुश्किलें

पश्चिम बंगाल में मतुआ समुदाय को लेकर भाजपा की रणनीति अब उलटी पड़ती दिख रही है। घुसपैठियों को लेकर पार्टी के ताजा बयानों और मतुआ नेताओं के साथ कथित मारपीट की खबरों ने बंगाल की राजनीति में तूफान खड़ा कर दिया है। क्या 2026 के चुनावों से पहले भाजपा का यह मजबूत किला ढह जाएगा या ममता बनर्जी इस नाराजगी को सत्ता की सीढ़ी बना पाएंगी?

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Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जनवरी 5, 2026

Bengal Politics : पश्चिम बंगाल में बांग्लादेशी घुसपैठियों को लेकर दिए गए एक बयान ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) को असहज स्थिति में डाल दिया है। 4 जनवरी को कोलकाता में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान BJP अनुसूचित जाति मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष लाल सिंह आर्य ने कहा कि जो लोग अवैध रूप से बांग्लादेश से भारत आए हैं, उनके नाम मतदाता सूची में नहीं होने चाहिए। इस बयान के बाद राज्य की राजनीति में खासतौर पर मतुआ समुदाय के बीच नाराजगी बढ़ गई।

Bengal Politics :  मतुआ समुदाय में उभरा आक्रोश

लाल सिंह आर्य के बयान को मतुआ समुदाय ने अपने खिलाफ माना है। समुदाय का कहना है कि इस तरह की टिप्पणियां उन्हें संदेह के घेरे में लाती हैं। बढ़ते विरोध को देखते हुए BJP प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने सफाई दी कि यह बयान आर्य का निजी विचार है, न कि पार्टी की आधिकारिक राय। इसके साथ ही, विवादित वीडियो को सोशल मीडिया से हटा लिया गया है।

Bengal Politics :  ठाकुरनगर में मारपीट का आरोप

इसी बीच उत्तर 24 परगना जिले के ठाकुरनगर में एक और विवाद सामने आया है। यहां मतुआ समुदाय के एक गोसांई (पंडित) के साथ कथित तौर पर मारपीट की गई। आरोप है कि यह घटना केंद्रीय मंत्री शांतनु ठाकुर के समर्थकों द्वारा की गई, क्योंकि गोसांई ने SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) के तहत नाम हटाए जाने पर सवाल उठाए थे। इस घटना ने BJP की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।

BJP का इनकार, TMC समर्थकों का विरोध

BJP ने मारपीट के सभी आरोपों से इनकार किया है। वहीं, इस घटना के विरोध में TMC समर्थित ऑल इंडिया मतुआ महासंघ ने पश्चिम बंगाल में सड़क जाम करने का ऐलान किया है। संगठन का कहना है कि मतुआ समुदाय को डराने और दबाने की कोशिश की जा रही है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

चुनावी राजनीति में मतुआ समुदाय की अहमियत

मतुआ समुदाय बांग्लादेश से आए दलित हिंदू शरणार्थियों का एक बड़ा समूह है। यह समुदाय उत्तर 24 परगना, नदिया और दक्षिण 24 परगना जिलों में चुनावी नतीजों को प्रभावित करने की क्षमता रखता है। इसी वजह से हर चुनाव में सभी राजनीतिक दल इस समुदाय को साधने की कोशिश करते हैं।

ठाकुरनगर घटना पर जांच की मांग

ठाकुरनगर में हुई कथित मारपीट के बाद मतुआ समुदाय ने निष्पक्ष जांच की मांग की है। समुदाय का कहना है कि SIR प्रक्रिया के दौरान जिन लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं, उन्हें दोबारा जोड़ा जाए। उनका आरोप है कि इस प्रक्रिया से सबसे ज्यादा नुकसान मतुआ समाज को हो सकता है।

TMC का आरोप और SIR पर सवाल

TMC नेता अरूप चक्रवर्ती ने कहा है कि SIR से सबसे अधिक प्रभावित मतुआ समुदाय ही होगा। उनके अनुसार, बड़ी संख्या में शरणार्थी परिवारों के नाम मतदाता सूची से हटने का खतरा है, जिससे उनकी राजनीतिक भागीदारी कमजोर हो सकती है।

अमित शाह का भरोसा

इससे पहले 30 दिसंबर को कोलकाता में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था कि SIR को लेकर मतुआ समुदाय या शरणार्थियों को घबराने की जरूरत नहीं है। उन्होंने आश्वासन दिया कि नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के तहत योग्य मतुआ और नामशूद्र समुदाय के लोगों को किसी तरह का नुकसान नहीं होगा।

ड्राफ्ट वोटर लिस्ट और आगे की प्रक्रिया

16 दिसंबर को चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी की थी, जिसमें 58 लाख 20 हजार 898 नाम हटाने के लिए चिन्हित किए गए हैं। SIR का दूसरा चरण फरवरी 2026 तक चलेगा और अंतिम मतदाता सूची 14 फरवरी 2026 को प्रकाशित की जाएगी। यह प्रक्रिया बिहार सहित देश के 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में 28 अक्टूबर से लागू की गई है, जिसका उद्देश्य वोटर लिस्ट को अपडेट और त्रुटिरहित बनाना है।

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