West Bengal Election 2026 : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के मद्देनजर राज्य में राजनीतिक पारा अपने चरम पर पहुंच गया है। सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (TMC) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच वर्चस्व की जंग अब सड़कों पर हिंसक रूप ले रही है। ताजा विवाद ‘फॉर्म-6’ को लेकर शुरू हुआ है, जिसे मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा अवैध तरीके से बड़ी संख्या में फॉर्म जमा कर रही है। दूसरी ओर, भाजपा ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए चुनाव आयोग से निष्पक्ष निगरानी की मांग की है। यह मुद्दा अब केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि एक बड़े राजनीतिक टकराव का केंद्र बन गया है।
चुनाव आयोग के दफ्तर के बाहर हाई-वोल्टेज ड्रामा और धरना
विवाद उस समय गहरा गया जब टीएमसी समर्थित बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) ने दावा किया कि मेदिनीपुर से एक संदिग्ध व्यक्ति भारी मात्रा में फॉर्म-6 लेकर कार्यालय पहुंचा था। टीएमसी कार्यकर्ताओं ने उसे पकड़ लिया और आरोप लगाया कि वह भाजपा के इशारे पर काम कर रहा था। इसके विपरीत, भाजपा ने स्पष्ट किया कि उक्त व्यक्ति पार्टी का समर्थक नहीं बल्कि एक आम नागरिक था जो अपने निजी काम से वहां आया था। इस खींचतान के बाद स्थिति अनियंत्रित हो गई और दोनों ही पार्टियों के कार्यकर्ता चुनाव आयोग के दफ्तर के सामने धरने पर बैठ गए। घंटों तक चली नारेबाजी ने इलाके में तनावपूर्ण माहौल पैदा कर दिया।
बाइक सवार समर्थकों का हमला और पथराव: पुलिस ने संभाली स्थिति
धरने के कुछ समय बाद माहौल तब और बिगड़ गया जब टीएमसी समर्थकों का एक बड़ा जत्था बाइकों पर सवार होकर मौके पर पहुंचा। भाजपा का आरोप है कि इन लोगों ने उन पर हमला करने की कोशिश की और पथराव शुरू कर दिया। देखते ही देखते दोनों पक्षों के बीच हिंसक झड़प शुरू हो गई। मौके पर मौजूद पुलिस बल को स्थिति को नियंत्रित करने के लिए खासी मशक्कत करनी पड़ी। पुलिस ने बीच-बचाव कर दोनों पार्टियों के समर्थकों को एक-दूसरे से अलग किया, लेकिन इलाके में अभी भी भारी पुलिस बल तैनात है ताकि दोबारा कोई अप्रिय घटना न हो।
वोट चोरी और मतदाता सूची में फेरबदल का गंभीर आरोप
टीएमसी के प्रवक्ता ललितेश त्रिपाठी ने इस घटना को ‘वोट चोरी’ करार दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा और चुनाव आयोग की मिलीभगत से लगभग 30 हजार फॉर्म-6 के जरिए मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर फेरबदल करने की कोशिश की जा रही है। त्रिपाठी ने तीखे लहजे में कहा कि भाजपा चुनाव जीतने के लिए किसी भी स्तर तक गिर सकती है और संवैधानिक संस्थाओं का दुरुपयोग कर रही है। टीएमसी का दावा है कि बंगाल की जनता की राय बदलने के लिए बाहरी लोगों के नाम मतदाता सूची में शामिल किए जाने की साजिश रची जा रही है।
क्या है फॉर्म-6 और क्यों है इसकी इतनी अहमियत?
आम जनता के लिए यह समझना जरूरी है कि फॉर्म-6 आखिर क्या है। भारतीय चुनाव आयोग (ECI) द्वारा जारी यह फॉर्म उन नागरिकों के लिए होता है जिनका नाम मतदाता सूची में नहीं है या जो 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुके हैं। इसके अलावा, यदि कोई मतदाता अपना निवास स्थान बदलकर दूसरी जगह शिफ्ट हो गया है, तो उसे नए क्षेत्र की मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए इसी फॉर्म का प्रयोग करना पड़ता है। बंगाल जैसे संवेदनशील राज्य में, जहां जीत-हार का अंतर बहुत कम होता है, वहां नए मतदाताओं का जुड़ाव किसी भी पार्टी का खेल बना या बिगाड़ सकता है।
लोकतंत्र के उत्सव पर हिंसा का साया
31 मार्च 2026 की यह घटना दर्शाती है कि बंगाल का चुनावी रण क्षेत्र अब बेहद संवेदनशील हो चुका है। फॉर्म-6 जैसे प्रशासनिक दस्तावेज पर छिड़ी यह जंग आने वाले मतदान के दिनों के लिए शुभ संकेत नहीं है। चुनाव आयोग के लिए अब यह बड़ी चुनौती है कि वह न केवल पारदर्शी तरीके से मतदाता सूची को अपडेट करे, बल्कि राजनीतिक दलों के बीच बढ़ते इस अविश्वास को भी दूर करे। फिलहाल, मेदिनीपुर की इस झड़प ने पूरे बंगाल में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं।
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