West Bengal Election 2026: विधानसभा चुनाव 2026 के दौरान पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में मतदान जारी है। सुबह 11 बजे तक जारी आंकड़ों के अनुसार, पश्चिम बंगाल में 41.11% मतदान दर्ज किया गया, जबकि तमिलनाडु में 37.56% वोटिंग हुई। इससे यह साफ संकेत मिल रहा है कि बंगाल में मतदाता अधिक सक्रिय नजर आ रहे हैं, जबकि तमिलनाडु में मतदान अपेक्षाकृत धीमा है।
बंगाल में तनावपूर्ण माहौल, तमिलनाडु में शांति
पश्चिम बंगाल के कई इलाकों से तनाव और हिंसा की खबरें सामने आई हैं। कुछ स्थानों पर बमबाजी और राजनीतिक झड़पों की सूचना मिली है। कई उम्मीदवारों को विरोध का सामना भी करना पड़ रहा है। हालांकि, चुनाव आयोग ने स्थिति को नियंत्रण में बताया है और सुरक्षा बलों को सतर्क रखा गया है। इसके विपरीत, तमिलनाडु में मतदान शांतिपूर्ण ढंग से चल रहा है। वहां किसी बड़े विवाद या हिंसा की खबर नहीं आई है, जिससे मतदाता बिना किसी डर के अपने मताधिकार का उपयोग कर रहे हैं।
किन जिलों में सबसे ज्यादा और कम मतदान?
पश्चिम बंगाल
पश्चिम बंगाल में सुबह 11 बजे तक सबसे अधिक मतदान पश्चिमी मेदिनीपुर जिले में 44.69% दर्ज किया गया। इसके बाद झारग्राम (43.71%) और बांकुरा (43.22%) में भी अच्छी भागीदारी देखने को मिली। वहीं, सबसे कम मतदान मालदा में 38.22% रहा। इसके अलावा कूचबिहार, अलीपुरद्वार और उत्तरी दिनाजपुर में भी अपेक्षाकृत कम वोटिंग हुई।
तमिलनाडु
तमिलनाडु में तिरुपुर जिले में सबसे अधिक 42.45% मतदान हुआ। इसके बाद इरोड और कोयंबटूर जैसे जिलों में भी संतोषजनक मतदान दर्ज किया गया।
सबसे कम मतदान रामनाथपुरम में 34.02% रहा। राजधानी चेन्नई में भी केवल 35.47% वोटिंग दर्ज की गई, जो औसत से कम मानी जा रही है।
विस्तृत जिला-वार आंकड़े
पश्चिम बंगाल के विभिन्न जिलों में मतदान प्रतिशत 38% से 45% के बीच रहा, जिसमें मुर्शिदाबाद, बीरभूम और पूर्वी मेदिनीपुर जैसे जिलों में मध्यम से उच्च मतदान देखा गया।
तमिलनाडु में ज्यादातर जिलों में मतदान 34% से 41% के बीच रहा, जहां कुछ जिलों में मतदान धीमा रहा, जबकि कुछ क्षेत्रों में मतदाताओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
ज्यादा वोटिंग के क्या हैं संकेत?
विशेषज्ञों का मानना है कि अधिक मतदान राजनीतिक दलों के लिए चिंता का कारण बन सकता है, क्योंकि यह सत्ता परिवर्तन या मजबूत जनमत का संकेत भी हो सकता है।
हालांकि, मतदान प्रतिशत में वृद्धि का एक कारण मतदाता सूची का पुनरीक्षण भी है। इस प्रक्रिया के तहत मृतकों और स्थानांतरित हो चुके लोगों के नाम हटाए गए हैं, जिससे वास्तविक मतदाताओं की संख्या अधिक सटीक हुई है और प्रतिशत बढ़ा हुआ दिखाई दे रहा है।









